प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन का यह दिन इसलिए खास है, क्योंकि इसी तारीख को 2001 में उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सरकार की कमान संभाली थी। इसके बाद गुजरात से दिल्ली तक उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ा और 2014 से वे देश के प्रधानमंत्री हैं। इस तरह सरकार के प्रमुख के रूप में उनके 25 साल पूरे हुए हैं।
गुजरात से दिल्ली तक 25 साल का सफर
विनायक मंदिर में देश के लिए प्रार्थना
जनता का विश्वास, कार्यकर्ताओं का परिश्रम
25 साल का अनुभव, देश की पूंजी
अनुभव के साथ आगे सेवा का संकल्प
25 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने दिन की शुरुआत दिल्ली के श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना से की। मंदिर में उन्होंने देशवासियों की सुख-समृद्धि और देश की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की। इसके बाद इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा–सेवा ज्योति यात्रा’ कार्यक्रम में पहुंचे।
इस पूरे कार्यक्रम में एक बात खास तौर पर सामने आई—25 साल की राजनीतिक यात्रा को प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर नहीं, बल्कि जनता और कार्यकर्ताओं के विश्वास से जुड़ी यात्रा के रूप में पेश किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज वे जहां हैं और जिस दायित्व पर हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता-जनार्दन का है। उन्होंने जनता को ईश्वर का रूप बताते हुए कहा कि करोड़ों देशवासियों का विश्वास और लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम उनकी सबसे बड़ी शक्ति रहा है। यही इस मौके का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भी है। प्रधानमंत्री ने अपने 25 साल के अनुभव को अपनी निजी पूंजी न बताकर देश की पूंजी बताया। यानी 2001 से 2026 तक के सफर को वे शासन, संगठन, जनता और कार्यकर्ताओं के साझा अनुभव के रूप में रेखांकित कर रहे हैं।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत यात्राओं, सेवा कार्यक्रमों और दूसरे आयोजनों के जरिए प्रधानमंत्री के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को रेखांकित किया जा रहा है। दिल्ली के कार्यक्रम के साथ वडनगर और वाराणसी को जोड़ने वाली सेवा यात्राएं भी इस आयोजन का हिस्सा हैं। दिलचस्प बात यह है कि 25 साल के इस पड़ाव पर प्रधानमंत्री के भाषण का केंद्र सिर्फ अतीत नहीं रहा। उन्होंने आगे भी अधिक ऊर्जा के साथ देशसेवा करने की इच्छा जताई। मंदिर में उनकी प्रार्थना भी इसी भाव के इर्द-गिर्द रही कि उन्हें देश और देशवासियों की सेवा के लिए और अधिक शक्ति मिले।
यानी 25 साल का पड़ाव यहां मंजिल के तौर पर नहीं, बल्कि आगे की जिम्मेदारियों के लिए एक पड़ाव के रूप में सामने आता है। प्रधानमंत्री के शब्दों में अनुभव को पूंजी और सेवा को संकल्प बनाने का संदेश दिखाई देता है। कुल मिलाकर 7 अक्टूबर का दिन मोदी के सार्वजनिक जीवन की एक लंबी यात्रा का स्मरण भर नहीं है। यह उस राजनीतिक सफर का पड़ाव है जो गुजरात के मुख्यमंत्री पद से शुरू हुआ और प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। अब इस 25 साल के अनुभव को आगे की शासन-यात्रा में किस तरह इस्तेमाल किया जाता है, यह आने वाला समय तय करेगा। (प्रकाश कुमार पांडेय)