NEET विवाद के बाद सरकार लाएगी कड़ा कानून,
नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र का दूसरा सप्ताह सोमवार से शुरू हो रहा है और इसकी शुरुआत ही बेहद अहम मानी जा रही है। पिछले सप्ताह लगातार विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही लगभग पूरी तरह बाधित रही। अब सरकार इस गतिरोध को खत्म कर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सबसे चर्चित मुद्दे—पेपर लीक—पर बड़ा कदम उठाने जा रही है। आज लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों वाला विधेयक पेश किया जाएगा। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जब संसद पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया। इसे लेकर संसद परिसर में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया तथा विपक्ष ने भी सरकार पर तीखे हमले किए।
- पेपर लीक पर सरकार का बड़ा दांव
- संसद में आज कानून की परीक्षा
- विपक्ष के विरोध के बीच बड़ा बिल
- शिक्षा व्यवस्था सुधार पर निर्णायक दिन
- धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में NDA एकजुट
नीट पेपर लीक और उसके बाद देशभर में हुए छात्र आंदोलनों ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग करता रहा है। पहले सप्ताह में यही मुद्दा संसद में सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
सरकार अब इस पूरे विवाद का जवाब कानून के जरिए देने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही ऐसे विधेयक को मंजूरी दे चुका है, जिसमें पेपर लीक, परीक्षा में संगठित धांधली, फर्जीवाड़ा और परीक्षा माफिया के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। आज यह विधेयक लोकसभा में पेश किया जाएगा। सरकार की रणनीति है कि इस पर जल्द चर्चा शुरू कराकर संदेश दिया जाए कि वह परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।
संसद पहुंचने पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एनडीए सांसदों द्वारा स्वागत किया जाना भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। एनडीए सांसदों का यह स्वागत स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार फिलहाल शिक्षा मंत्री के पीछे मजबूती से खड़ी है और विपक्ष के दबाव में कोई राजनीतिक फैसला लेने के मूड में नहीं है।
हालांकि विपक्ष इस विधेयक को लेकर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्षी दलों का कहना है कि केवल नया कानून लाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली की निगरानी, एजेंसियों की जवाबदेही और प्रशासनिक विफलताओं पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष यह भी मांग कर सकता है कि पेपर लीक की घटनाओं की व्यापक समीक्षा कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकार का दावा है कि प्रस्तावित कानून देशभर में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगा। इसमें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक करने, तकनीकी माध्यमों से परीक्षा में गड़बड़ी करने, संगठित अपराध के रूप में पेपर लीक कराने और अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि सख्त कानून बनने से परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि पहले सप्ताह के गतिरोध के बाद संसद में विधायी कामकाज आगे बढ़े, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग को लेकर आक्रामक रुख बनाए हुए है। ऐसे में लोकसभा की कार्यवाही के दौरान तीखी बहस और हंगामे की पूरी संभावना बनी हुई है।
देशभर के लाखों छात्र और अभिभावक भी संसद की कार्यवाही पर नजर लगाए हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के बीच असंतोष बढ़ाया है। ऐसे में संसद में पेश होने वाला यह विधेयक केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार विपक्ष के विरोध के बीच इस विधेयक पर चर्चा शुरू करा पाती है या नहीं। यदि संसद में सार्थक बहस होती है और कानून पारित करने की दिशा में प्रगति होती है, तो यह शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार माना जाएगा। वहीं यदि हंगामा जारी रहता है तो मॉनसून सत्र का दूसरा सप्ताह भी पहले सप्ताह की तरह राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, संसद का आज का दिन केवल एक विधेयक पेश होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति, विपक्ष की रणनीति और देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े भरोसे की भी परीक्षा है। पेपर लीक पर प्रस्तावित कानून और उस पर होने वाली बहस आने वाले दिनों की राजनीति के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था की दिशा भी तय कर सकती है। (प्रकाश कुमार पाण्डेय