केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर हुए इस घटनाक्रम का असर अब पंजाब की राजनीति पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों ने इसे नैतिक जवाबदेही का बड़ा उदाहरण बताते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि राज्य में भी परीक्षा प्रणाली पर लगातार सवाल उठे हैं।
- पंजाब में गरमाई इस्तीफे की राजनीति
- कांग्रेस-शिअद ने AAP को घेरा
- हरजोत बैंस पर बढ़ा सियासी दबाव
- पेपर लीक बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
- क्या पंजाब में भी होगी जवाबदेही?
पंजाब में पिछले कुछ समय से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा पेपर लीक के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म था। विपक्ष का आरोप है कि इन मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष का कहना है कि जब केंद्र में नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की जा सकती है तो पंजाब सरकार को भी वही मानक अपनाने चाहिए।
सबसे ज्यादा राजनीतिक दबाव शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस पर दिखाई दे रहा है। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि यदि राज्य में परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार विवाद सामने आए हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हालांकि हरजोत सिंह बैंस पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि यदि उनके इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होती है तो वे पद छोड़ने को भी तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कथित गड़बड़ियों का खुलासा स्वयं पंजाब सरकार ने किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी सरकार ने ही शुरू कराई।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को सबसे आक्रामक ढंग से उठाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि राज्य में कई परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं पर सवाल उठे, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने में विफल रही। उनका कहना है कि यदि केंद्र में मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा दे सकते हैं तो पंजाब सरकार को भी उसी परंपरा का पालन करना चाहिए। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस दोनों को इस मुद्दे पर घेरा है।
शिरोमणि अकाली दल ने भी आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पंजाब में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने युवाओं का सरकार पर भरोसा कमजोर किया है। अकाली दल ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और राजनीतिक जवाबदेही भी तय की जाए।
भारतीय जनता पार्टी भी इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर है। भाजपा नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार से हमेशा नैतिक जिम्मेदारी की मांग करती रही है, इसलिए अब उसे पंजाब में भी वही सिद्धांत अपनाने चाहिए।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी अपने बचाव में लगातार यह दलील दे रही है कि राज्य सरकार ने किसी भी अनियमितता को छिपाने की कोशिश नहीं की। पार्टी का कहना है कि जिन मामलों में शिकायतें सामने आईं, उनमें सरकार ने खुद जांच शुरू कराई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की। AAP का दावा है कि उसकी सरकार भ्रष्टाचार और पेपर लीक के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने विपक्ष को एक नया राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। अब बहस केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी और राजनीतिक जवाबदेही पर भी केंद्रित हो गई है। आने वाले दिनों में यदि छात्र संगठन और युवा समूह इस मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज करते हैं तो पंजाब सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्या पंजाब सरकार में केवल शिक्षा मंत्री ही नहीं, बल्कि अन्य मंत्रियों पर भी जवाबदेही का दबाव बढ़ेगा। हालांकि, अब तक पंजाब सरकार की ओर से किसी मंत्री का इस्तीफा स्वीकार किए जाने या दो मंत्रियों के इस्तीफे का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें जरूर लगाई जा रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से ऐसी किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल पंजाब की राजनीति में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, जबकि आम आदमी पार्टी सरकार जांच, कार्रवाई और पारदर्शिता का हवाला देकर अपना बचाव कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति का सबसे अहम केंद्र बना रह सकता है।





