महिला आरक्षण पर सियासी घमासान…गांधी परिवार पर भड़के सीएम डॉ.मोहन यादव..कहा एक परिवार ने विषबेल की तरह माखौल उड़ाया

Women Reservation Bill

महिला आरक्षण पर सियासी घमासान…भोपाल से बीजेपी का बड़ा सियासी संदेश

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न होने के बाद देश की राजनीति में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सीधे तौर पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और एआईएडीएमके के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए बीजेपी देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस और रैलियों के जरिए आक्रामक अभियान चला रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इस राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

महिला आरक्षण के समर्थन में बीजेपी का बड़ा अभियान

भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ किया कि बीजेपी अब इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी। उन्होंने ऐलान किया कि प्रदेशभर में ‘नारी शक्ति वंदन पदयात्रा’ और आक्रोश रैलियां निकाली जाएंगी। यह अभियान पंचायत स्तर तक पहुंचेगा, जिससे महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनजागरण किया जा सके। सीएम ने यह भी कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। ऐसे में बीजेपी इसे लेकर हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

विपक्ष पर तीखा हमला, ‘विषबेल’ वाला बयान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर बेहद तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने बिना नाम लिए गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि “एक परिवार ने विषबेल की तरह इस मुद्दे का मजाक उड़ाया है। सीएम ने कहा कि संसद में जो हुआ, वह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए कहा कि “द्रोपदी का चीरहरण पहले देखा था, अब लोकतंत्र में वैसा ही दृश्य देखने को मिला। उन्होंने विपक्ष को “पलटूराम” बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के समय महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले दल अब अपने रुख से पीछे हट गए हैं।

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का ऐलान

राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे को लेकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण बिल को लेकर निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके साथ ही बीजेपी हर स्तर—विधानसभा से लेकर पंचायत तक—विपक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाकर उसे घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष का भी हमला

इससे पहले प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा देश की आधी आबादी से जुड़ा है, लेकिन कांग्रेस ने इस पर राजनीति की।खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बिल के पास न होने पर जश्न मनाकर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का रुख पूरी तरह महिला विरोधी है।

विपक्ष पर घेरा, सपा और AIADMK भी निशाने पर

बीजेपी ने सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी और एआईएडीएमके को भी निशाने पर लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इन दलों की चुप्पी और विरोध यह दर्शाता है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में नहीं हैं। बीजेपी के अनुसार, विपक्ष की यह रणनीति वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है, जिसमें महिला सशक्तिकरण को नजरअंदाज किया जा रहा है।

महिला मुद्दे पर सियासी घमासान तेज

महिला आरक्षण को लेकर अब सियासत पूरी तरह गरमा चुकी है। एक ओर बीजेपी इसे महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बता रहा है। भोपाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद बीजेपी नेताओं—जिनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, मंत्री कृष्णा गौर, निर्मला भूरिया, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस और सांसद माया नारोलिया शामिल रहीं—ने भी विपक्ष पर जमकर निशाना साधा।

सड़क से सदन तक आंदोलन की तैयारी

बीजेपी ने साफ संकेत दिए हैं कि यह मुद्दा अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी इसे जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी में है। प्रदेशभर में रैलियां, पदयात्राएं और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है, खासकर तब जब इसे जनभावनाओं से जोड़ा जा रहा है। भोपाल से उठी यह सियासी आवाज अब पूरे देश में गूंजने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह महिला आरक्षण के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। वहीं विपक्ष पर लग रहे आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मुद्दा संसद के भीतर समाधान पाता है या फिर सड़क पर सियासी संघर्ष और तेज होता है। फिलहाल इतना तय है कि महिला आरक्षण अब सिर्फ एक बिल नहीं, बल्कि देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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