समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और भाजपा नेता Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव की तेरहवीं सोमवार को आयोजित होगी। रविवार शाम अपर्णा यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तेरहवीं का कार्ड साझा कर इसकी जानकारी दी। कार्ड सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
- तेरहवीं कार्ड में शामिल हुआ पूरा यादव परिवार
- अखिलेश और अपर्णा के नाम साथ आने से चर्चाएं तेज
- सैफई की परंपरा के बीच तेरहवीं आयोजन पर बहस
- अंतिम संस्कार के बाद बढ़ी थीं पारिवारिक दूरियों की चर्चाएं
- हरिद्वार कार्यक्रम के बाद बदले रिश्तों के संकेत
तेरहवीं के कार्ड की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल अपर्णा यादव और उनकी बेटियों के नाम ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav और उनके बच्चों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इसे यादव परिवार के बीच रिश्तों में आई नरमी और एकजुटता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, 38 वर्षीय प्रतीक यादव का 13 मई को अचानक निधन हो गया था। बताया गया कि वह पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और हार्ट में ब्लड क्लॉट जमने की वजह से उनकी मौत हुई। कम उम्र में हुए इस निधन ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही वर्गों को स्तब्ध कर दिया था। अगले दिन 14 मई को Lucknow में गोमती नदी किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया।
प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के भीतर दूरी की चर्चाएं भी तेज हो गई थीं। अंतिम संस्कार की रस्में यादव परिवार के किसी सदस्य की बजाय अपर्णा यादव के पिता अरविंद बिष्ट ने निभाईं। इससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि अपर्णा यादव और अखिलेश यादव के परिवार के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हैं। हालांकि प्रतीक यादव के निधन की खबर मिलते ही अखिलेश यादव सबसे पहले अस्पताल पहुंचे थे। उस समय अपर्णा यादव असम में थीं और बाद में लखनऊ लौटी थीं।
इन चर्चाओं के बीच हरिद्वार में हुए अस्थि विसर्जन कार्यक्रम ने माहौल बदलने का काम किया। इस दौरान Aditya Yadav लगातार अपर्णा यादव के साथ नजर आए। आदित्य यादव, Shivpal Singh Yadav के बेटे हैं। इसके बाद से ही यादव परिवार के भीतर रिश्तों के सामान्य होने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं।
अब तेरहवीं के कार्ड ने इन चर्चाओं को और मजबूत कर दिया है। कार्ड में अपर्णा यादव के साथ अखिलेश यादव का नाम प्रमुखता से दर्ज किया गया है। इसके अलावा अपर्णा यादव की बेटियों पद्मजा और प्रथमा के साथ अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव का नाम भी शामिल किया गया है। राजनीतिक जानकार इसे केवल पारिवारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं।
तेरहवीं के कार्ड के साथ एक श्रद्धांजलि पोस्टर भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह पोस्टर लखनऊ के कई इलाकों में लगाया गया है। पोस्टर में पूरे यादव परिवार के नाम दर्ज हैं। इसमें अपर्णा यादव, अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, Dimple Yadav और आदित्य यादव के साथ प्रतीक यादव की दोनों बेटियों के नाम भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि तेरहवीं कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी और भाजपा समेत कई दलों के नेताओं की मौजूदगी देखने को मिल सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सैफई की परंपरा को लेकर भी बहस तेज हो गई है। Saifai में वर्षों पहले गांव के लोगों ने तेरहवीं भोज की परंपरा को खत्म करने का निर्णय लिया था। गांव के लोगों का मानना था कि इस तरह के आयोजनों से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और शोक के माहौल में भोज का आयोजन उचित नहीं माना जाता। यही वजह थी कि मुलायम सिंह यादव के निधन पर भी तेरहवीं का आयोजन नहीं किया गया था।
ऐसे में प्रतीक यादव की तेरहवीं का आयोजन कई मायनों में खास माना जा रहा है। एक ओर यह परिवार की एकजुटता का संदेश दे रहा है, तो दूसरी ओर सैफई की पुरानी सामाजिक परंपरा पर भी नई बहस छेड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।