महिला आरक्षण और परिसीमन पर सियासी संग्राम, संसद के विशेष सत्र में बड़ा दांव
राहुल गांधी ने उठाए सवाल
बदलाव की दहलीज पर संसद
देश की राजनीति में आज से एक अहम अध्याय शुरू हो रहा है। संसद के विशेष सत्र में सरकार तीन बड़े विधेयक पेश करने जा रही है, जिनका सीधा संबंध महिला आरक्षण और सीटों के पुनर्निर्धारण से है। इन प्रस्तावों का मकसद 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को नए सिरे से परिभाषित करना है। सत्र की शुरुआत से ही साफ हो गया है कि यह केवल विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सियासी ताकत का बड़ा इम्तिहान भी बनने वाला है।
कौन से तीन बिल लाएगी सरकार
सरकार जिन तीन विधेयकों को ला रही है, उनमें पहला केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा है। दूसरा संविधान संशोधन विधेयक है, जिसमें जनसंख्या के आधार पर संसद की संरचना में बदलाव का प्रस्ताव है। तीसरा और सबसे अहम परिसीमन विधेयक है, जिसके जरिए लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इन तीनों प्रस्तावों को मिलाकर राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
क्या बदल सकता है नया प्रस्ताव
अगर ये विधेयक पास हो जाते हैं, तो 2029 के आम चुनाव से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है। साथ ही लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक करने की योजना है, ताकि बढ़ती आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व बेहतर हो सके। यह बदलाव देश की चुनावी राजनीति का गणित पूरी तरह बदल सकता है और नए शक्ति संतुलन की शुरुआत कर सकता है।
परिसीमन क्यों बना विवाद की जड़
परिसीमन का मुद्दा सबसे ज्यादा विवादित बन गया है, क्योंकि इसमें सीटों के बंटवारे का नया फार्मूला तय होगा। विपक्ष को आशंका है कि इससे कुछ राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है, खासकर दक्षिण भारत और छोटे राज्यों का। वहीं सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और जनसंख्या आधारित होगी। यही कारण है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है।
सरकार के समर्थन में मायावती
बसपा प्रमुख मायावती ने इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने महिला आरक्षण को ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसका स्वागत किया, लेकिन साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा तय करने की मांग भी रखी। मायावती ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण देने की पक्षधर है, जिससे सामाजिक न्याय को और मजबूती मिल सके।
राहुल गांधी ने उठाए सवाल
विपक्ष की ओर से राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्तावों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के जरिए सत्ता संतुलन बदलने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन मौजूदा प्रस्तावों में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के हितों को नजरअंदाज किया जा सकता है।
विपक्ष की रणनीति और एकजुटता
सत्र से पहले विपक्षी दलों ने मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में बैठक कर अपनी रणनीति तय की। इस बैठक में कई प्रमुख दलों के नेता शामिल हुए और सरकार के तरीके पर सवाल उठाए गए। विपक्ष ने साफ किया कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन परिसीमन और विधेयकों को पेश करने की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति है। अब संसद में इस मुद्दे पर जोरदार बहस और टकराव के आसार हैं।
सियासी परीक्षा में सरकार
तीन दिन के इस विशेष सत्र में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन विधेयकों को पास कराना है। लोकसभा में चर्चा के लिए लंबा समय तय किया गया है और इसके बाद राज्यसभा में भी परीक्षा होगी। मौजूदा हालात को देखते हुए साफ है कि यह सत्र सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले चुनावों की दिशा भी तय कर सकता है।





