दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली ने देश की राजनीति में नया टकराव खड़ा कर दिया। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तो यहां तक कह दिया कि ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे। राहुल ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे देश के नागरिकों के अधिकारों की चोरी करार दिया। वहीं, बीजेपी ने विपक्ष की पूरी कवायद को फ्लॉप शो बताते हुए पलटवार किया। इस सियासी टकराव में कांग्रेस, आरजेडी, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने एक सुर में चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठाए।
रामलीला मैदान से राहुल का रणघोष!
ज्ञानेश कुमार पर राहुल का सीधा हमला
जेल जाएंगे CEC, राहुल की चेतावनी
विपक्ष की महारैली पर बीजेपी का वार
पसीने और मेहनत से बनता है पीएम: पात्रा
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन सकते थे। राहुल ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया को आम नागरिक के अधिकारों से जोड़ दिया। उनका बयान महज चुनाव आयोग की आलोचना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी तक पहुंच गया।
बिहार और बंगाल के चुनावों को लेकर भी विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दोनों राज्यों के चुनावों को फर्जी बताते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में विपक्ष की ओर से पेश किए गए ठोस साक्ष्य और कानूनी आधार पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी तरफ बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा करार दिया। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी के 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध बताने वाले बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे। वे 2025 में इस पद पर आए। पात्रा ने चुनौती दी कि यदि चुनाव अवैध था तो विपक्ष अदालत में याचिका क्यों नहीं लेकर गया? उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में खड़े होकर किसी चुनाव को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।
संबित पात्रा ने इंडिया गठबंधन की रैली में भीड़ के दावों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल कई दलों और झंडों को एक मंच पर लाने से प्रधानमंत्री नहीं बना जाता। प्रधानमंत्री बनने के लिए पसीना और मेहनत लगती है। बीजेपी ने इस रैली को विपक्ष की एकजुटता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से फ्लॉप शो बताया।
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम के तीन बड़े राजनीतिक मायने हैं। पहला, विपक्ष अब चुनाव आयोग की निष्पक्षता को आगामी राजनीतिक लड़ाई का केंद्रीय मुद्दा बनाना चाहता है। दूसरा, राहुल गांधी इस मुद्दे को केवल संस्थागत सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। तीसरा, बीजेपी विपक्ष के आरोपों को कानूनी चुनौती और राजनीतिक विश्वसनीयता के सवाल पर घेर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इंडिया गठबंधन चुनाव आयोग के खिलाफ अपने आरोपों को ठोस तथ्यों और कानूनी लड़ाई में बदल पाएगा या यह महारैली भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सिमटकर रह जाएगी? रामलीला मैदान से उठी इस सियासी आवाज का असली असर आने वाले चुनावों और देश की राजनीति में दिखाई देगा।





