पटना के रहने वाले मनोज कुमार शर्मा की कारोबारी यात्रा उन लोगों के लिए एक उदाहरण है, जो सीमित आमदनी के बावजूद खुद का काम शुरू करना चाहते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज ने कोचिंग में अध्यापन किया, लेकिन कम आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। इसके बाद उन्होंने दूसरे शहर में नौकरी की, जहां मेडिकल फर्नीचर के क्षेत्र में काम करते हुए उन्हें इस कारोबार की बारीकियां सीखने का अवसर मिला। अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने बिहार लौटकर इसी क्षेत्र में अपनी यूनिट शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में पूंजी की समस्या सामने आई, लेकिन प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी PMEGP के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता मिला। सरकारी सहायता और संस्थागत मार्गदर्शन के साथ उनका व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ता गया। आज उनकी यूनिट में करीब 25 लोग काम करते हैं और उत्पाद बिहार के बाहर भी पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब पौने दो करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
PMEGP योजना नए कारोबार शुरू करने वालों के लिए किस तरह काम करती है?
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम केंद्र सरकार की credit-linked subsidy scheme है, जिसका मकसद नए सूक्ष्म उद्यम शुरू कर रोजगार के अवसर बढ़ाना है। यह योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गैर-कृषि गतिविधियों से जुड़े नए कारोबार के लिए लागू होती है। इसमें बैंक ऋण के साथ margin money subsidy का प्रावधान रहता है। सब्सिडी की मात्रा आवेदक की श्रेणी और कारोबार के ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में होने के आधार पर बदल सकती है। इसलिए इसे सीधे मिलने वाली मुफ्त रकम समझना सही नहीं है। परियोजना में बैंक finance, लाभार्थी का योगदान और सरकारी subsidy की भूमिका होती है।
नौकरी के अनुभव को मनोज ने अपने कारोबार के आइडिया में कैसे बदला?
मनोज ने जिस क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू किया, उसके बारे में उन्हें पहले से व्यावहारिक अनुभव था। मेडिकल फर्नीचर बनाने वाली कंपनी में नौकरी के दौरान उन्होंने उत्पादन और बाजार से जुड़ी जानकारी हासिल की। बाद में उन्होंने इसी अनुभव को अपने राज्य में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया और पटना लौटकर यूनिट शुरू की। कारोबार को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत पड़ी, जिसके दौरान उन्हें PMEGP योजना की जानकारी मिली। आवेदन और संबंधित संस्थाओं से मिले मार्गदर्शन के बाद कारोबार का विस्तार हुआ और रोजगार के नए अवसर भी बने।
PMEGP के तहत सब्सिडी कितनी हो सकती है और इसकी व्यवस्था क्या है?
योजना में मिलने वाली margin money subsidy आवेदक को सीधे नकद भुगतान के रूप में नहीं दी जाती। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसकी सामान्य दर परियोजना लागत के 15% से 35% तक हो सकती है। वास्तविक प्रतिशत आवेदक की श्रेणी और परियोजना के स्थान पर निर्भर करता है। Manufacturing तथा business/service activities के लिए परियोजना सीमा और वित्तीय नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए आवेदन से पहले मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार अपनी परियोजना की पात्रता और लागू सीमा देखना जरूरी है।
किन लोगों को PMEGP के लिए आवेदन करने का अवसर मिल सकता है?
PMEGP मुख्य रूप से नया micro enterprise शुरू करने वाले पात्र लोगों के लिए है। सामान्य तौर पर आवेदक की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए। कुछ निर्धारित लागत से अधिक वाली manufacturing और business/service परियोजनाओं में कम से कम 8वीं कक्षा पास होने की शर्त लागू हो सकती है। पहले से संचालित कारोबार के सामान्य विस्तार के लिए नया-project component इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए आवेदन से पहले यह जांचना जरूरी है कि आपका प्रस्ताव योजना की eligibility conditions के अनुरूप है या नहीं।
आवेदन से पहले कारोबार और बैंक ऋण की पूरी योजना समझना क्यों जरूरी है?
PMEGP के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है, लेकिन केवल subsidy देखकर आवेदन करना पर्याप्त नहीं है। कारोबार शुरू करने से पहले बाजार, ग्राहक, मशीनरी, कच्चे माल, किराया, बिजली, कर्मचारियों और बिक्री से जुड़े खर्चों का अनुमान लगाना चाहिए। Project report वास्तविक आंकड़ों पर तैयार करना भी महत्वपूर्ण है। साथ ही बैंक ऋण की repayment कैसे होगी, इसका स्पष्ट हिसाब होना चाहिए। मनोज की कहानी यह दिखाती है कि सरकारी योजना शुरुआती वित्तीय जरूरतों में सहायक हो सकती है, लेकिन कारोबार की सफलता के लिए सही business idea, बाजार की मांग, प्रबंधन और लगातार मेहनत भी जरूरी है। आवेदन से पहले PMEGP के आधिकारिक portal और Ministry of MSME की मौजूदा guidelines में पात्रता, project limits और subsidy नियम जरूर जांचें।





