अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी: पीएम मोदी करेंगे केन–बेतवा परियोजना का शिलान्यास…ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का उद्घाटन

PM Modi to lay the foundation stone of Ken Betwa project

अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी

पीएम मोदी करेंगे केन–बेतवा परियोजना का शिलान्यास

ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का उद्घाटन

25 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खजुराहो में केन–बेतवा परियोजना का शिलान्यास और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का उद्घाटन अटल जी की दीर्घकालिक विकास दृष्टि का प्रत्यक्ष प्रमाण है। ये परियोजनाएँ मध्य प्रदेश के किसानों को सिंचाई, पेयजल और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराएँगी। इसके साथ ही राज्य में 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का शिलान्यास सुशासन को जमीनी स्तर पर और सुदृढ़ करेगा।

अटल जी केवल राजनेता नहीं थे; वे संवेदनशील कवि और गहन विचारक भी थे। उनकी कविताएँ राष्ट्रप्रेम, संघर्ष, आशा और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत हैं। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ—“हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काट के सदा आगे बढ़ता चलूँगा”—आज भी युवाओं को साहस, संकल्प और दृढ़ता की प्रेरणा देती हैं।

आज के समय में, जब सार्वजनिक विमर्श में ध्रुवीकरण और कटुता बढ़ रही है, अटल जी का जीवन सिखाता है कि असहमति को सम्मान के साथ व्यक्त किया जा सकता है, विरोध को रचनात्मक बनाया जा सकता है और राजनीति को नैतिकता तथा संवैधानिक मूल्यों से जोड़ा जा सकता है। उनकी शताब्दी यह संदेश देती है कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि मूल्यों, सहिष्णुता, संवाद और सुशासन से ही साकार होगा।

हम सब मिलकर उनके सपनों को साकार करने का संकल्प-मोदी 

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी भारत की चेतना, लोकतंत्र और आत्मविश्वास में सदैव जीवित रहेंगे। उनकी जन्म शताब्दी हमें स्मरण कराती है कि सच्ची राजनीति वही है जो राष्ट्र को जोड़े, समाज को सशक्त बनाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भारत का निर्माण करे। उनके आदर्श आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं—आइए, हम सब मिलकर उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लें।

जब हम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के अंतिम चरण में खड़े हैं, यह केवल अतीत को स्मरण करने का समय नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को हृदय में संजोने और उन्हें जीवन में उतारने का अवसर भी है। अटल जी का जीवन भारतीय राजनीति की उस दुर्लभ परंपरा का प्रतीक है, जिसमें गरिमा, संवाद, संयम, सहिष्णुता और राष्ट्रप्रथम सर्वोपरि रहे। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने विरोधियों को भी सम्मान दिया, असहमति को सकारात्मक बनाया और राजनीति को नैतिकता का पवित्र माध्यम माना।

उनकी विरासत आज भी हर भारतीय के मन में प्रज्ज्वलित है, विशेषकर मध्य प्रदेश में—उनकी जन्मभूमि ग्वालियर में, जहाँ उनकी स्मृति जन-जन के हृदय में बसी है। भोपाल में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय उनकी दूरदृष्टि का जीवंत प्रमाण है, जो हिंदी माध्यम से उच्च शिक्षा को सशक्त बनाकर देश की सांस्कृतिक आत्मा को मजबूत कर रहा है।
ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि उन्नयन, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और युवा कौशल विकास—ये सभी प्रयास अटल जी की उसी दूरदर्शिता से प्रेरित हैं, जिसने ग्रामीण भारत को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता, स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित कर, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। कराटे एसोसिएशन ऑफ इंडिया में मेरी भूमिका ग्रामीण युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास, शारीरिक सुदृढ़ता और नेतृत्व गुण प्रदान करने की है। यह कार्य अटल जी के उस दृष्टिकोण से जुड़ा है, जिसमें स्वस्थ शरीर और मजबूत मन को एक सशक्त भारत के लिए अनिवार्य माना गया।

अटल जी का सार्वजनिक जीवन स्वतंत्र भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण और परिवर्तनकारी कालखंडों से होकर गुजरा। 1950 के दशक से लेकर 2004 तक, उन्होंने राजनीति को सत्ता का खेल नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का पवित्र दायित्व माना। उनका ऐतिहासिक वक्तव्य—“सरकारें आएँगी-जाएँगी, पार्टियाँ बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश रहना चाहिए”—आज भी भारतीय लोकतंत्र का नैतिक आधार है।

प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी। 1998 में पोकरण-II परमाणु परीक्षण ने भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को अटल आधार प्रदान किया। इसके बावजूद उन्होंने शक्ति का प्रयोग शांति के उद्देश्य से किया। 1999 की लाहौर बस यात्रा इस बात का प्रमाण थी कि सच्ची ताकत संवाद, विश्वास और साहस में निहित होती है। उनके कार्यकाल में स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, ग्रामीण सड़क विकास, दूरसंचार क्रांति और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास ने भारत को भौगोलिक और आर्थिक रूप से जोड़ा। मध्य प्रदेश में इन परियोजनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी—किसानों को बाजार तक पहुँचा, व्यापार बढ़ा और लाखों परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हुआ।

Exit mobile version