महिला आरक्षण पर पीएम का बड़ा संदेश: राजनीति नहीं, राष्ट्रहित में लें फैसला
“नारी शक्ति को अधिकार दें, बहाने नहीं” — संसद में सर्वसम्मति की अपील
नई दिल्ली: महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ऐतिहासिक फैसला लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण में बराबरी का अधिकार देने का मौका है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत को “लोकतंत्र की जननी” कहा जाता है और ऐसे महत्वपूर्ण अवसर बार-बार नहीं आते। उन्होंने माना कि यह कदम दशकों पहले उठाया जाना चाहिए था, लेकिन अब देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने विकसित भारत के विजन को महिलाओं की भागीदारी से जोड़ा और कहा कि 50% आबादी को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना न तो न्यायसंगत है और न ही प्रगतिशील। पंचायत स्तर पर महिलाओं के मजबूत नेतृत्व का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब यह अनुभव संसद और विधानसभाओं तक पहुंचना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में तकनीकी बहानों के जरिए इस मुद्दे को टाला गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “क्रेडिट की राजनीति” छोड़कर सर्वसम्मति से विधेयक पारित करना ही देशहित में होगा।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होगा। साथ ही यह दोहराया कि महिलाओं को आरक्षण देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। प्रधानमंत्री ने अंत में सभी दलों से एकजुट होकर इस विधेयक को पारित करने की अपील की, ताकि देश की नारी शक्ति को एक सशक्त संदेश दिया जा सके और लोकतंत्र में एक नया अध्याय जोड़ा जा सके।