मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए पढ़ाई के साथ रोजगार को जोड़ने की दिशा में सरकार ने नई व्यवस्था की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में कहा कि इंदौर-उज्जैन समेत प्रदेश के आईटी पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस में युवाओं को पढ़ाई के साथ रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार रोजगार को सिर्फ डिग्री मिलने के बाद की जरूरत के तौर पर नहीं, बल्कि शिक्षा के साथ ही काम का अनुभव और अवसर देने वाले मॉडल के रूप में देख रही है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे युवाओं को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों और सेवा क्षेत्र से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया से रोजगार का विस्तार
मुख्यमंत्री ने इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी एरिया के निर्माण का भी उल्लेख किया। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश में नई तकनीक, नवाचार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यानी सरकार का रोजगार मॉडल तीन स्तरों पर दिखाई दे रहा है—कैंपस में अवसर, औद्योगिक इकाइयों का विस्तार और बड़े शहरी क्षेत्रों के जरिए रोजगार का नया इकोसिस्टम।
सिंहस्थ 2028 भी बनेगा विकास का बड़ा आधार
उज्जैन में चल रहे विकास कार्यों को सिंहस्थ 2028 से भी जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ से जुड़े जरूरी विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
उज्जैन में बाबा महाकाल के मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम भी इसी व्यापक विकास योजना का हिस्सा बताया गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक स्थानीय लोग मार्ग चौड़ीकरण में स्वेच्छा से जिला प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
कुल मिलाकर सरकार का फोकस शिक्षा, रोजगार, तकनीक और बुनियादी ढांचे को एक साथ आगे बढ़ाने पर है। अब बड़ा सवाल यही रहेगा कि पढ़ाई के साथ रोजगार की यह व्यवस्था जमीन पर किस स्तर तक लागू होती है और इससे प्रदेश के कितने युवाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।





