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दिवाली पर भी महंगा पेट्रोल!
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कच्चा तेल सस्ता, राहत कहां?
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100 डॉलर नीचे, दाम जस के तस
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त्योहार में भी महंगाई की मार
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दिवाली पर नहीं मिला तेल का तोहफा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास से गिरकर 97.76 डॉलर तक आ गया, तो फिर पेट्रोल पंप पर कीमतें क्यों नहीं घट रहीं? दरअसल, पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल से तय नहीं होतीं। इसमें रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, डीलर कमीशन और परिवहन खर्च भी शामिल होते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लग सकता है।
देश के अलग-अलग शहरों में कीमतों का अंतर भी आम आदमी की परेशानी बढ़ा रहा है। पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये, जयपुर में 113.19 रुपये और मुंबई में 111.21 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल 115.49 रुपये के स्तर पर है। दूसरी तरफ लखनऊ में पेट्रोल 101.89 रुपये प्रति लीटर है। यानी एक ही देश में पेट्रोल की कीमतों में 13 रुपये से ज्यादा का अंतर दिखाई दे रहा है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू अक्टूबर में तेल की खपत में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। देश में कुल 20.49 मिलियन टन तेल की खपत दर्ज की गई, जो मार्च के बाद सबसे अधिक है। यह बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, परिवहन और त्योहारी मांग का संकेत है। लेकिन इसके साथ ही महंगे ईंधन का बोझ भी बना हुआ है।
अब सवाल सरकार और तेल कंपनियों से है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो रहा है और कंपनियों पर लागत का दबाव घट रहा है, तो क्या इस राहत का कुछ हिस्सा आम उपभोक्ता को मिलेगा? आखिर दिवाली पर मिठाई, खरीदारी और त्योहार का खर्च तो बढ़ा है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत क्यों नहीं?दिवाली पर बाजार रोशन हैं, लेकिन पेट्रोल पंप पर कीमतों की चमक आम आदमी की जेब को भारी पड़ रही है