लोकल वाली दिवाली: योगी की अपील, खरीदारी से कारीगरों के घर जलाएं समृद्धि का दीप

A Local Diwali cm Yogi appeal bring prosperity to the homes of artisans through your purchases

दिवाली के दीपक सिर्फ घरों को रोशन नहीं करते, बल्कि किसी के रोजगार, किसी के हुनर और किसी के सपनों को भी नई रोशनी दे सकते हैं। त्योहार पर बाजार सजते हैं, खरीदारी होती है और उपहारों का आदान-प्रदान होता है। लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिवाली की खरीदारी को एक बड़े आर्थिक और सामाजिक संदेश से जोड़ने की अपील की है। संदेश है- लोकल वाली दिवाली मनाइए और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में भागीदार बनिए।

मुख्यमंत्री योगी ने धनतेरस और धन्वंतरि जयंती की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेशवासियों से अपील की कि इस बार उपहारों के लिए विदेशी या बड़े ब्रांडों के बजाय उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और एक जिला एक उत्पाद यानी ओडीओपी को प्राथमिकता दें। उनका कहना है कि आपकी एक खरीदारी किसी हुनरमंद परिवार के घर में स्वावलंबन और सम्मान का दीप जला सकती है।

दरअसल, इस अपील के पीछे सिर्फ स्वदेशी का भाव नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति भी है। उत्तर प्रदेश की पहचान उसके पारंपरिक हस्तशिल्प, कारीगरी और छोटे उद्यमों से रही है। भदोही के विश्वप्रसिद्ध कालीन, प्रयागराज का मूंज शिल्प, मैनपुरी की तारकशी और चित्रकूट के काष्ठ खिलौने सिर्फ उत्पाद नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कला और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।

इन उत्पादों को बाजार मिलता है तो इसका सीधा लाभ उन कारीगरों, बुनकरों, दस्तकारों और छोटे उद्यमियों तक पहुंच सकता है, जिनकी आजीविका इसी हुनर पर निर्भर है। त्योहारों पर इनकी खरीदारी बढ़ने से स्थानीय उत्पादन, रोजगार और कारोबार को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

ओडीओपी से वैश्विक बाजार तक उत्तर प्रदेश

योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के निर्यात में हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश का निर्यात वर्ष 2016-17 के करीब 84 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयासों को रेखांकित करता है।

लखनऊ और ग्रेटर नोएडा के आधुनिक एक्सपो मार्ट तथा भदोही का कार्पेट बाजार पारंपरिक उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ओडीओपी योजना का उद्देश्य भी यही है कि हर जिले की विशिष्ट पहचान वाले उत्पादों को प्रोत्साहन मिले। इससे स्थानीय कारीगरों को पहचान, बाजार और रोजगार के अवसर मिल सकें।

वोकल फॉर लोकल से आत्मनिर्भरता का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के विजन को आगे बढ़ाते हुए योगी की अपील त्योहारों की खरीदारी को आर्थिक राष्ट्रनिर्माण से जोड़ती है। इसका संदेश है कि अगर हर परिवार त्योहार पर स्थानीय उत्पाद खरीदने का संकल्प ले, तो छोटी-छोटी खरीदारी मिलकर बड़े आर्थिक बदलाव का आधार बन सकती है।

मुख्यमंत्री की अपील का एक दूसरा पहलू रोजगार और सम्मान से भी जुड़ा है। जब किसी कारीगर का बनाया सामान बाजार में बिकता है तो केवल उसकी आमदनी नहीं बढ़ती, बल्कि पारंपरिक हुनर को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश पुलिस के चयनित 4,543 उप निरीक्षकों और प्लाटून कमांडरों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने की भी जानकारी दी गई। यह त्योहार के अवसर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संदेश को भी सामने लाता है।

बाजार की चमक से कारीगर के घर तक पहुंचे दिवाली की रोशनी

कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ की लोकल वाली दिवाली की अपील त्योहार को सिर्फ खरीदारी और उपहारों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसे स्थानीय रोजगार, पारंपरिक कला और आत्मनिर्भरता से जोड़ती है। दिवाली पर एक दीप अपने घर में जलाइए, लेकिन एक खरीदारी किसी स्थानीय कारीगर के घर के लिए भी कीजिए। क्योंकि जब स्थानीय हुनर को बाजार मिलेगा, तभी पारंपरिक कला बचेगी, रोजगार बढ़ेगा और आत्मनिर्भरता का सपना मजबूत होगा। इस बार दिवाली का संदेश सिर्फ घर रोशन करने का नहीं, बल्कि हुनरमंद हाथों की मेहनत को सम्मान देने का भी है। यही है लोकल वाली दिवाली और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की परिकल्पना।

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