पेट्रोल और डीजल के महंगे दाम से परेशान भारतीय ग्राहकों के लिए अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार से राहत की उम्मीद जगाने वाले संकेत सामने आए हैं। पश्चिमी एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था और दुनिया के सामने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई थी। हालांकि अब वैश्विक बाजार की तस्वीर धीरे-धीरे बदलती दिखाई दे रही है। कच्चे तेल के भाव युद्ध के दौरान बने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। वहीं सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अपने प्रमुख कच्चे तेल की कीमत में दो दशक से अधिक समय की सबसे बड़ी मासिक कटौती की है। इसके अलावा OPEC+ देशों ने उत्पादन बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इन घटनाक्रमों के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले महीनों में भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि परिस्थितियां पहले के मुकाबले बेहतर जरूर हुई हैं, लेकिन भारतीय ग्राहकों को तुरंत राहत मिलने की गारंटी नहीं है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों को इस साल कच्चे तेल में आई तेजी के दौरान नुकसान उठाना पड़ा था और खुदरा कीमतों में कटौती से पहले कंपनियां अपने घाटे की भरपाई को प्राथमिकता दे सकती हैं।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध के ऊंचे स्तर से नीचे आईं, सप्लाई सुधरने से बदला माहौल
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में मंगलवार को कीमतों में मामूली तेजी दर्ज की गई, लेकिन भाव अब भी अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के आसपास बने हुए हैं। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.2 प्रतिशत बढ़कर 72.84 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI में 1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और कीमत 69.29 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। बाजार का ध्यान अब केवल भू-राजनीतिक तनाव पर केंद्रित नहीं है। निवेशक वैश्विक तेल आपूर्ति में सुधार और आने वाले महीनों में मांग की स्थिति पर भी नजर रख रहे हैं। सप्लाई चेन सामान्य होने के संकेतों ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाई है।
OPEC+ ने अगस्त से तेल उत्पादन बढ़ाने पर जताई सहमति, बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने की उम्मीद मजबूत
कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा घटनाक्रम OPEC+ के उत्पादन से जुड़े फैसले को माना जा रहा है। उत्पादक देशों के समूह ने अगस्त से प्रतिदिन 1,88,000 बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे पहले जून और जुलाई के दौरान भी उत्पादन में इसी तरह बढ़ोतरी की गई थी। नए फैसले के तहत सऊदी अरब और रूस प्रतिदिन 62,000 बैरल उत्पादन बढ़ाएंगे। इसके अलावा अल्जीरिया और ओमान भी तेल उत्पादन में वृद्धि करेंगे। बाजार में अधिक कच्चा तेल उपलब्ध होने से सप्लाई की चिंता कम हो सकती है और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलने की संभावना है।
सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत में 11 डॉलर की बड़ी कटौती की
तेल बाजार से सबसे बड़ा संकेत सऊदी अरब की ओर से आया है। सऊदी अरामको ने एशियाई खरीदारों के लिए अपने प्रमुख ‘अरब लाइट’ कच्चे तेल की अगस्त की आधिकारिक बिक्री कीमत में पिछले महीने की तुलना में 11 डॉलर की कटौती की है। इसे 20 साल से अधिक समय में सबसे बड़ी मासिक मूल्य कटौती बताया जा रहा है। सऊदी अरब के इस कदम से भारत समेत एशियाई तेल आयातक देशों को आने वाले समय में फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी है। दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात ने अपना तेल उत्पादन बढ़ाकर 38 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया है। यह अप्रैल 2020 के बाद UAE का सबसे अधिक उत्पादन स्तर बताया जा रहा है।
अगस्त में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद बढ़ी, लेकिन तुरंत कीमत घटने पर अभी भी बना हुआ है संशय
तेल बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ महीने पहले के मुकाबले अब भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की संभावना बढ़ी है। ब्रेंट क्रूड के भाव संघर्ष से पहले वाले स्तर के करीब पहुंच गए हैं। OPEC+ का अतिरिक्त उत्पादन और सऊदी अरब की मूल्य कटौती भी वैश्विक तेल सप्लाई में सुधार की ओर इशारा कर रही है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर के आसपास बनी रहती हैं तो भारतीय तेल कंपनियों पर लागत का दबाव कम हो सकता है। ऐसे में अगस्त या उसके बाद ईंधन कीमतों में राहत की उम्मीद मजबूत हो सकती है।
सरकारी तेल कंपनियां पहले पुराने नुकसान की कर सकती हैं भरपाई, उसके बाद ही ग्राहकों तक पहुंचेगा सस्ते क्रूड का फायदा
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल पंप पर उसी समय पेट्रोल और डीजल सस्ता हो जाएगा। भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों यानी OMCs को इस साल की शुरुआत में तेल की कीमतों में तेज उछाल के दौरान वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा था। विशेषज्ञों के अनुसार कंपनियां पहले अपने पुराने घाटे का बड़ा हिस्सा वसूलने का इंतजार कर सकती हैं। इसके बाद ही खुदरा ईंधन कीमतों में कटौती पर विचार होने की संभावना है। इसलिए ग्राहकों को राहत के लिए कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल वैश्विक तेल बाजार के संकेत सकारात्मक हैं और अगर कच्चे तेल के भाव स्थिर रहते हैं तो आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद और मजबूत हो सकती है।





