दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर सिर्फ दो दिन पटाखों की छूट! सुप्रीम कोर्ट की सख्त शर्तें, जानिए कब और कहां जला सकेंगे ग्रीन पटाखे

Permission to burst firecrackers in Delhi NCR for only two days during Diwali Supreme Court sets strict conditions

दिवाली 2026 पर दिल्ली-एनसीआर के लोगों को पटाखे जलाने के लिए केवल दो दिन की अनुमति मिली है, लेकिन यह छूट भी कई कड़ी शर्तों के साथ दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, 7 और 8 नवंबर को केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे। समय निर्धारित है, स्थान सीमित हैं और नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है।

प्रदूषण की गंभीर होती समस्या के बीच अदालत का यह फैसला दिवाली के उत्साह और पर्यावरण की चिंता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।

कब जला सकेंगे पटाखे?

दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति केवल दो समयावधियों में होगी।

  • सुबह 6 बजे से 7 बजे तक।
  • रात 8 बजे से 10 बजे तक।

इन निर्धारित समयों के अलावा पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। यानी दिवाली के दिन भी मनमाने समय पर आतिशबाजी नहीं की जा सकेगी।

इन जगहों पर पटाखे जलाने पर पूरी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशील स्थानों के आसपास पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा निर्धारित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे नहीं जलाए जा सकेंगे।

शैक्षणिक संस्थानों को भी प्रतिबंधित क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन स्थानों को ‘नो क्रैकर जोन’ के रूप में चिह्नित किया जाएगा।

सामान्य पटाखे और अवैध पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित

अदालत ने साफ किया है कि दिल्ली-एनसीआर में सामान्य और अवैध पटाखों की बिक्री तथा इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। बेरियम युक्त पटाखों पर भी प्रतिबंध रहेगा।

केवल उन्हीं पटाखों की बिक्री और उपयोग किया जा सकेगा जिन्हें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान यानी सीएसआईआर-नीरी ने ग्रीन पटाखे के रूप में मंजूरी दी हो। इनके निर्माण के लिए भी वैध प्रमाणन वाले निर्माता ही अधिकृत होंगे।

क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?

ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। इन्हें सीएसआईआर-नीरी ने विकसित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनसे पारंपरिक पटाखों की तुलना में करीब 30 प्रतिशत तक कम प्रदूषण होने का दावा किया जाता है।

इनमें कुछ हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम किया जाता है और धूल तथा धुएं के उत्सर्जन को नियंत्रित करने वाले पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इनकी आवाज और जलने की अवधि भी अपेक्षाकृत कम रखने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं होते।

प्रशासन की जिम्मेदारी और नागरिकों की सावधानी

इन नियमों को लागू कराने के लिए प्रशासन को बाजार में पटाखों की बिक्री, निर्माताओं के प्रमाणन और निर्धारित समय तथा स्थान पर इस्तेमाल की निगरानी करनी होगी। नागरिकों के लिए भी जरूरी है कि वे केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे खरीदें और निर्धारित समय का पालन करें।

दिवाली पर पटाखों की सीमित अनुमति के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने उत्सव और प्रदूषण नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। दो दिन, दो निर्धारित समय और संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्ण प्रतिबंध। इन शर्तों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतिशबाजी होगी। अब असली चुनौती इन निर्देशों के प्रभावी पालन की है, क्योंकि त्योहार की खुशी के साथ स्वच्छ हवा और लोगों का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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