लॉरेंस बिश्नोई की सल्तनत में बगावत!…गोल्डी बराड़ से शहजाद भट्टी और हिमांशु भाऊ तक…बिश्नोई के दुश्मनों का बढ़ता दायरा

Rebellion within Lawrence Bishnoi empire from Goldy Brar to Shahzad Bhatti and Himanshu Bhau

जिस लॉरेंस बिश्नोई के नाम से कभी अपराध की दुनिया में खौफ का दावा किया जाता था, आज उसी लॉरेंस के सामने सबसे बड़ा सवाल अपनी सुरक्षा का है। गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस की सुरक्षा को लेकर खतरे के इनपुट सामने आने की चर्चा है। लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि उसके विरोधियों में सिर्फ पुराने दुश्मन नहीं, बल्कि कभी उसके साथ मिलकर आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

लॉरेंस बिश्नोई की दुश्मनों से घिरी दुनिया!
गोल्डी बराड़ से शहजाद भट्टी तक…
…कभी दोस्त रहे तो कभी बने जानी दुश्मन

 

लॉरेंस की सल्तनत में दुश्मनों का घेरा!
कभी दोस्त, अब लॉरेंस के विरोधी!
गोल्डी से भट्टी तक, दुश्मनी का विस्तार
लॉरेंस की जेल में सुरक्षा क्यों बढ़ी?
अपने ही पुराने साथी बने चुनौती?
बंबीहा गैंग से लॉरेंस की पुरानी जंग
विदेश में बैठे गैंगस्टरों का नेटवर्क
अमेरिका में पकड़े गए दो बड़े नाम
जेल में लॉरेंस, बाहर बदलते समीकरण
गैंगवार की दुनिया में कौन किसके साथ?
लॉरेंस के 10 दुश्मन, किससे सबसे बड़ा खतरा?

गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा, लकी पटियाल, कौशल चौधरी, शहजाद भट्टी और हिमांशु भाऊ। ये नाम एक ऐसी आपराधिक दुनिया की तस्वीर पेश करते हैं, जहां दोस्ती स्थायी नहीं, दुश्मनी की कोई सीमा नहीं और वर्चस्व की लड़ाई लगातार नए समीकरण पैदा करती रहती है।

सवाल है कि आखिर लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ दुश्मनों का इतना बड़ा मोर्चा कैसे तैयार हुआ? क्या उसके अपने पुराने सहयोगी ही अब उसके लिए चुनौती बन गए हैं? और क्या जेल की सलाखें किसी ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह रोक सकती हैं, जिसकी गतिविधियों के तार देश और विदेश तक जुड़े होने के आरोप हैं? अपराध की दुनिया में कभी जिस लॉरेंस बिश्नोई के नाम का इस्तेमाल खौफ पैदा करने के लिए किया जाता था, आज उसी लॉरेंस के इर्द-गिर्द दुश्मनी के नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं हैं। उसे हाई सिक्योरिटी ब्लॉक में रखा गया है। लेकिन इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि लॉरेंस के विरोधियों की फेहरिस्त में कुछ ऐसे नाम भी हैं, जो कभी उसके सबसे करीबी सहयोगी हुआ करते थे।

गोल्डी बराड़ से रोहित गोदारा तक, लकी पटियाल से कौशल चौधरी तक और शहजाद भट्टी से हिमांशु भाऊ तक। ये नाम उत्तर भारत के अलग-अलग आपराधिक नेटवर्क और कथित गैंगवार की कहानियों से जुड़े हैं।
कभी एक साथ मिलकर आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले चेहरों के बीच अब टकराव की खबरें हैं। विदेश में बैठे गैंगस्टरों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप और चुनौतियों का सिलसिला सामने आता रहा है।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है। क्या लॉरेंस का सबसे बड़ा खतरा बाहर के दुश्मनों से है या उसके पुराने नेटवर्क में पैदा हुई दरारें भी उसके लिए नई चुनौती बन चुकी हैं?

सबसे पहले एक जरूरी तथ्य: इन दस नामों को लॉरेंस की जान के लिए प्रमाणित खतरा बताने वाला कोई सार्वजनिक आधिकारिक आकलन उपलब्ध नहीं है। यह सूची रिपोर्टों में सामने आए पुराने सहयोगियों, प्रतिद्वंद्वी गैंगों और कथित विरोधी नेटवर्क के आधार पर समझी जानी चाहिए।
लॉरेंस बिश्नोई के विरोधी समीकरणों के 10 बड़े नाम

1. गोल्डी बराड़: दोस्ती टूटी तो बदल गए गैंग के समीकरण

गोल्डी बराड़ कभी लॉरेंस बिश्नोई का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में दोनों के नाम सामने आए थे। लेकिन जून 2025 में केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर आई कि दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं। बताई गई वजह लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई से जुड़े मामले में सहयोग को लेकर नाराजगी थी। रिपोर्टों के मुताबिक गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का नेटवर्क अलग दिशा में काम करने लगा, जबकि लॉरेंस का नेटवर्क अलग हो गया। यानी कभी एक-दूसरे के सहयोगी रहे इन दोनों के बीच कथित दरार ने गैंगों के समीकरण बदल दिए।

2. रोहित गोदारा: पुराने नेटवर्क से अलग हुआ बड़ा नाम
राजस्थान के रोहित गोदारा का नाम लंबे समय तक लॉरेंस और गोल्डी बराड़ के नेटवर्क से जुड़ता रहा। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था। लेकिन गोल्डी और लॉरेंस के बीच कथित अलगाव के बाद रोहित गोदारा का नाम भी नए आपराधिक समीकरणों में महत्वपूर्ण हो गया। जांच एजेंसियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में उसे गोल्डी बराड़ के करीब बताया गया। यह बदलाव बताता है कि आपराधिक नेटवर्क में पुरानी दोस्ती और साझेदारी टूटने के बाद विरोधी खेमों का स्वरूप भी बदल सकता है।

3. लकी पटियाल: बंबीहा गैंग का विदेश में सक्रिय चेहरा
लॉरेंस बिश्नोई के विरोधी नेटवर्क की बात हो और बंबीहा गैंग का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है। लकी पटियाल को देविंदर बंबीहा गैंग का प्रमुख चेहरा माना जाता है। लॉरेंस और बंबीहा नेटवर्क के बीच दुश्मनी पुरानी है। विक्की मिड्डूखेड़ा की हत्या के बाद दोनों गुटों के बीच टकराव और गहरा होने की खबरें सामने आई थीं। लकी पटियाल का नाम इस प्रतिद्वंद्विता के उस हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके तार पंजाब से लेकर विदेशों में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क तक बताए जाते हैं।

4. कौशल चौधरी: हरियाणा से दिल्ली-एनसीआर तक विरोधी नेटवर्क

हरियाणा के कौशल चौधरी का नाम भी लॉरेंस विरोधी आपराधिक समीकरणों में सामने आता रहा है। उसका नाम बंबीहा नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ जोड़ा जाता है। दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में रंगदारी, हत्या और आपराधिक वर्चस्व से जुड़े मामलों में उसके नेटवर्क की चर्चा होती रही है। यहां लड़ाई सिर्फ दो गैंगस्टरों की व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं, बल्कि अलग-अलग आपराधिक गुटों के प्रभाव और वर्चस्व की भी है।

5. शहजाद भट्टी: पाकिस्तान से आई चुनौती ने बढ़ाई चर्चा

शहजाद भट्टी का नाम लॉरेंस की दुश्मनी की कहानी में एक अलग अध्याय जोड़ता है। जून 2024 में ईद के मौके पर लॉरेंस और भट्टी की कथित बातचीत का वीडियो सामने आया था। उस समय दोनों के बीच संपर्क की चर्चाएं थीं। लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों के रिश्तों में कथित दरार की खबरें आईं। इसके बाद भट्टी की ओर से वीडियो जारी कर लॉरेंस को चुनौती देने और उसके खिलाफ बयान देने की खबरें सामने आईं। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कहानी भारत के भीतर सक्रिय गैंगवार से निकलकर पाकिस्तान में मौजूद बताए जाने वाले नेटवर्क तक पहुंचती है। हालांकि दोनों के बीच पहले संबंधों और बाद के विवाद के सभी पहलुओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

6. नीरज बवाना: दिल्ली का पुराना आपराधिक प्रतिद्वंद्वी

दिल्ली के आपराधिक नेटवर्क में नीरज बवाना का नाम लंबे समय से चर्चा में रहा है। उसका नाम बंबीहा गैंग और लॉरेंस विरोधी गुटों से जुड़े समीकरणों में सामने आता रहा है। सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद विरोधी गुटों की तरफ से बदले की धमकियों की खबरें भी आई थीं। नीरज बवाना का नाम इस बात को समझने के लिए अहम है कि दिल्ली-एनसीआर के आपराधिक नेटवर्क में अलग-अलग गुटों की प्रतिद्वंद्विता किस तरह व्यापक गैंगवार का रूप लेती रही है।

7. अर्श डल्ला: विदेश में मौजूद नेटवर्क का नाम
अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला का नाम पंजाब के कई गंभीर आपराधिक मामलों में सामने आया है। भारतीय एजेंसियों ने उसे वांछित बताया है। उसका नाम विदेश में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क और बंबीहा से जुड़े कथित समीकरणों में भी चर्चा में रहा है। लॉरेंस और उसके विरोधी नेटवर्क की कहानी में अर्श डल्ला का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेश में बैठे लोगों की गतिविधियां भारत में सक्रिय आपराधिक मामलों की जांच को भी जटिल बनाती हैं।

8. देविंदर बंबीहा: मौत के बाद भी कायम गैंग की विरासत
देविंदर बंबीहा की वर्ष 2016 में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी है। इसलिए उसे लॉरेंस का वर्तमान व्यक्तिगत दुश्मन बताना सही नहीं होगा। लेकिन बंबीहा के नाम से जुड़ा नेटवर्क और उसकी विरासत आज भी गैंगवार के समीकरणों में चर्चा का विषय है। लकी पटियाल समेत कई लोगों के नाम इस नेटवर्क को आगे बढ़ाने के संदर्भ में सामने आते रहे हैं। यानी बंबीहा की मौत के बावजूद उसके नाम से जुड़ी पुरानी दुश्मनी खत्म नहीं हुई। यही गैंगवार की सबसे खतरनाक वास्तविकताओं में से एक है कि कई बार व्यक्ति के मरने के बाद भी उसके नाम पर टकराव जारी रहता है।

9. हिमांशु भाऊ: हरियाणा का युवा गैंगस्टर, लॉरेंस का प्रतिद्वंद्वी
हरियाणा के रोहतक से जुड़े हिमांशु भाऊ का नाम लॉरेंस बिश्नोई के प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आया है। दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित बर्गर किंग आउटलेट में हुई हत्या के बाद उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। उस मामले में उसकी ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा भी सामने आया था। लेकिन इस कहानी का ताजा घटनाक्रम और भी महत्वपूर्ण है। 22 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी एजेंसियों ने लास वेगास में हिमांशु भाऊ को हिरासत में लिया। 24 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई हरियाणा एसटीएफ से मिले इनपुट और अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग से हुई। अब भारतीय एजेंसियां उसे भारत वापस लाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं।

10. नीरज फरीदपुरिया: बंबीहा नेटवर्क से जुड़ा नाम
हरियाणा के नीरज फरीदपुरिया का नाम बंबीहा नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण चेहरों में लिया जाता है। उसके खिलाफ हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज होने की खबरें हैं। उसे हिमांशु भाऊ के साथ जुड़े नेटवर्क के संदर्भ में भी जांच एजेंसियां देखती रही हैं। इस कहानी का ताजा मोड़ यह है कि 22 अक्टूबर को अमेरिकी अधिकारियों ने हिमांशु भाऊ के साथ नीरज फरीदपुरिया को भी लास वेगास में हिरासत में लिया। भारत लाने की प्रक्रिया को लेकर हरियाणा एसटीएफ और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय की खबरें हैं।

असली कहानी: लॉरेंस के लिए खतरा आखिर कहां से?
इस पूरी गैंगवार की कहानी को तीन बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है।

पहला- पुराने साथियों से टकराव।

गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे नाम कभी लॉरेंस के साथ जुड़े बताए जाते थे। लेकिन कथित अलगाव के बाद आपराधिक नेटवर्क के समीकरण बदलने की खबरें सामने आईं। यह लॉरेंस के पुराने सहयोगी तंत्र में आई दरार का संकेत है।

दूसरा- पुरानी गैंगवार की विरासत।

बंबीहा गैंग, लकी पटियाल, कौशल चौधरी और नीरज बवाना जैसे नाम उस प्रतिद्वंद्विता से जुड़े हैं, जिसकी जड़ें कई साल पुरानी हैं। सिद्धू मूसेवाला और विक्की मिड्डूखेड़ा हत्याकांड जैसे मामलों ने इन गुटों के बीच दुश्मनी को और चर्चा में ला दिया।

तीसरा- अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और नई चुनौतियां।

शहजाद भट्टी, अर्श डल्ला और विदेश में सक्रिय दूसरे नेटवर्क इस कहानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाते हैं। वहीं हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की अमेरिका में हिरासत बताती है कि इन नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई अब सीमाओं के पार भी हो रही है।

जेल की सलाखें और लॉरेंस की सुरक्षा

लॉरेंस बिश्नोई की सुरक्षा को लेकर सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम अक्टूबर 2026 में सामने आया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उसे साबरमती सेंट्रल जेल के विशेष उच्च सुरक्षा वाले ‘दो सौ खोली’ ब्लॉक में स्थानांतरित किया गया है। इस व्यवस्था का मकसद उसकी गतिविधियों और बाहरी संपर्कों पर नियंत्रण रखना है। गृह मंत्रालय के आदेश के तहत उसे जेल से बाहर ले जाने पर भी प्रतिबंध जारी है और जांच एजेंसियों को पूछताछ के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। हालांकि, जेल में सुरक्षा बढ़ाए जाने को अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि किसी खास गैंगस्टर ने उसकी हत्या की साजिश रची है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या अपने ही नेटवर्क में घिर गया लॉरेंस?
लॉरेंस बिश्नोई की कहानी अपराध जगत के उस बदलते चरित्र को सामने लाती है, जहां गैंग का विस्तार जितना बड़ा होता है, उसके साथ विवाद और प्रतिद्वंद्विता के समीकरण भी उतने ही जटिल होते जाते हैं।
कभी दोस्त रहे लोग अलग हो सकते हैं। सहयोगी प्रतिद्वंद्वी बन सकते हैं। विदेश में बैठकर नेटवर्क चलाने के आरोप लग सकते हैं। लेकिन इन सभी दावों और आशंकाओं के बीच एक बात स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति की जान को खतरा होने का निष्कर्ष केवल दुश्मनों की सूची देखकर नहीं निकाला जा सकता। जिस लॉरेंस बिश्नोई के नाम से कभी दूसरे गैंगों को चुनौती देने की खबरें आती थीं, आज उसकी अपनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गोल्डी बराड़ से लेकर शहजाद भट्टी तक और बंबीहा नेटवर्क से लेकर हिमांशु भाऊ तक, आपराधिक दुनिया के समीकरण लगातार बदल रहे हैं। यह गैंगवार सिर्फ दो गैंगस्टरों की दुश्मनी नहीं, बल्कि पुराने गठबंधनों के टूटने, नए नेटवर्क बनने और अपराध के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की कहानी है।

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