नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत विपक्ष के जोरदार शक्ति प्रदर्शन के साथ हुई। संसद के भीतर और बाहर सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर देखने को मिले। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने NEET पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि संसद परिसर के बाहर विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रदर्शन कर अपनी एकजुटता का संदेश दिया।
- डिंपल यादव हिरासत में, विपक्ष का प्रदर्शन तेज
- राहुल-प्रियंका से मिले अखिलेश, रणनीति पर मंथन
- NEET और राम मंदिर मुद्दे पर सरकार घिरी
- संसद से जंतर-मंतर तक विपक्ष का मार्च
- परिसीमन विधेयक पर होगी विपक्षी एकता की परीक्षा
सत्र के पहले दिन समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में संसद से मार्च निकालते हुए पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव समेत कई नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने पहले ही दिन राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया।
इसी बीच संसद भवन में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। संसद सत्र के पहले दिन हुई यह बैठक राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इसमें संसद के भीतर सरकार को घेरने की साझा रणनीति और विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में NEET पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर विपक्ष की संयुक्त रणनीति पर विचार किया गया। हालांकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से बैठक के एजेंडे को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन दोनों दलों के बीच बढ़ता समन्वय साफ दिखाई दिया।
संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने NEET पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए काम रोको प्रस्ताव भी पेश किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाब देने से बच रही है। वहीं राम मंदिर चंदा मामले को लेकर भी विपक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के पहले दिन का यह घटनाक्रम सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि विपक्षी एकजुटता का संकेत भी है। खासकर ऐसे समय में जब आने वाले दिनों में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक ला सकती है। यदि परिसीमन (Delimitation) विधेयक या उससे जुड़ा कोई प्रस्ताव संसद में आता है, तो विपक्ष की एकजुटता की असली परीक्षा होगी।
फिलहाल मानसून सत्र की शुरुआत ने साफ कर दिया है कि विपक्ष संसद के भीतर बहस और संसद के बाहर जनआंदोलन—दोनों मोर्चों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और राजनीतिक टकराव दोनों के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।





