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हमारी दिवाली अब विश्व की धरोहर…यूनेस्को के इस कदम से जानें किस तरह बढ़ेगा भारत में पर्यटन मोदी बोले— दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा

DigitalDesk by DigitalDesk
December 11, 2025
in दिल्ली, धर्म, मुख्य समाचार, राजनीति, शहर और राज्य, संपादक की पसंद
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Our Diwali is now a world heritage
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हमारी दिवाली अब विश्व की धरोहर…यूनेस्को के इस कदम से जानें किस तरह बढ़ेगा भारत में पर्यटन

मोदी बोले— दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा

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भारत के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है। विश्व स्तर पर सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षण का सर्वोच्च निकाय—यूनेस्को ने दिवाली को आधिकारिक रूप से विश्व धरोहर Intangible Cultural Heritage घोषित कर दिया है। इसके साथ ही भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध त्योहार अब दुनिया की वह विरासत बन गया है जिसे वैश्विक स्तर पर संरक्षित, मान्यता प्राप्त और सांस्कृतिक रूप से मूल्यवान घोषित किया गया है।
इस घोषणा के साथ दिवाली अब उन अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्वों की सूची में शामिल हो गई है। जिन्हें मानवता की साझा परंपरा माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसे लेकर बधाई दी ओर कहा “दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए इसे “भारत की सांस्कृतिक चेतना का विश्व मंच पर सम्मान” बताया। उन्होंने कहा दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, यह भारतीय सभ्यता की आत्मा है। यह प्रकाश, आशा, पुनर्जन्म और करुणा की अनंत परंपरा है। इसका विश्व धरोहर बनना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि इससे पहले कुंभ मेला दुर्गा पूजा, वैदिक मंत्रोच्चार, रामलीला, छऊ नृत्य भी शामिल हैं। 15 भारतीय परंपराएँ, कला-रूप और सांस्कृतिक गतिविधियाँ यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल हो चुकी हैं। दिवाली के शामिल होने से यह संख्या 16 हो गई है।

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पर्यटन के लिए नए द्वार खुलेंगे

दिवाली बनेगी विश्व स्तर का ‘फेस्टिवल टूरिज्म मैगनेट’

दिवाली को विश्व धरोहर घोषित किए जाने का इसका सीधा असर भारत के पर्यटन उद्योग पर पड़ना तय है। सरकार, ट्रैवल एजेंसियों और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में भारत में फेस्टिवल टूरिज़्म कई गुना बढ़ सकता है।

1. अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में तेज़ वृद्धि

यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल होना दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक सर्टिफिकेट की तरह काम करता है। दिवाली अब विश्व के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक प्रमुख त्योहार के रूप में दर्ज होगी। विदेशी पर्यटक अब केवल भारत घूमने नहीं, बल्कि दिवाली अनुभव करने भी भारत आएंगे। जयपुर, वाराणसी, अयोध्या, कोलकाता और अमृतसर जैसे बड़े शहर दिवाली सीज़न में वैश्विक केंद्र बन सकते हैं।

2. दिवाली स्पेशल ग्लोबल टूर पैकेज लॉन्च होंगे

विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल कंपनियां, एयरलाइंस, सांस्कृतिक संगठन की ओर से “Diwali Tourism Packages” लॉन्च किए जाएंगे। ये पैकेज भारत के विभिन्न प्रांतों की दिवाली परंपराओं, अयोध्या दीपोत्सव, वाराणसी देव दीपावली, काली पूजा (कोलकाता), दक्षिण भारत की दीपोत्सव परंपराओं को
दुनिया के सामने लाएंगे।

3. अर्थव्यवस्था को बड़े स्तर पर लाभ

पर्यटन मंत्रालय उम्मीद है कि ऐसी मान्यताओं से भारत में होटल उद्योग, परिवहन क्षेत्र, स्थानीय मार्केट, मिठाई, सजावट और हस्तशिल्प व्यवसाय में भारी उछाल आ सकता है। दिवाली के दौरान पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में करीब 25 से 40% तक वृद्धि देखी जा सकती है।

4. सांस्कृतिक स्थलों का अंतरराष्ट्रीय आकर्षण बढ़ेगा

दिवाली का जुड़ाव कई प्राचीन और धार्मिक स्थलों से है।
अयोध्या: भगवान राम की वापसी और दीपोत्सव
वाराणसी: गंगा घाटों की देव दीपावली
मथुरा-वृंदावन: धार्मिक उत्सव
तमिलनाडु और कर्नाटक: मंदिर परंपरा
कोलकाता: काली पूजा
यूनेस्को टैग मिलने के बाद इन स्थलों को वैश्विक स्तर पर प्रचार मिलेगा। जिससे विदेशी आवक और बढ़ेगी।

5. डॉक्यूमेंट्री, वैश्विक शोध और सांस्कृतिक अध्ययन में वृद्धि

यूनेस्को लिस्टिंग के बाद अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री निर्माता, सांस्कृतिक शोधकर्ता, विश्वविद्यालय,आर्ट संस्थान, भारत में दिवाली पर अध्ययन, डॉक्यूमेंट्री और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यह भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करेगा। भारत की गौरव सूची में वृद्धि हुई है। इससे पहले ही 15 धरोहरें शामिल थीं। दिवाली के शामिल होने से पहले भारत की ये 15 सांस्कृतिक परंपराएँ यूनेस्को की अमूर्त धरोहर सूची में थीं। दिवाली के जुड़ने से यह सूची और मजबूत हुई है और भारत की सांस्कृतिक स्थिति वैश्विक पटल पर और विस्तृत हो गई है।

दिवाली—अब सिर्फ भारत का त्योहार नहीं, दुनिया की साझा विरासत

दिवाली का यूनेस्को की सूची में सम्मिलित होना यह संदेश देता है कि यह त्योहार अब सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का साझा सांस्कृतिक उत्सव है।

यह शांति का प्रतीक है

प्रकाश और अंधकार के संघर्ष की कथा है
आशा, करुणा और मानवता का संदेश है
और यही कारण है कि यह विश्व धरोहर घोषित की गई।

भारतीय पर्यटन, संस्कृति और वैश्विक पहचान—तीनों को बड़ा लाभ

यूनेस्को की मान्यता से भारत का पर्यटन बढ़ेगा। देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर और ऊँचाई मिलेगी। दिवाली एक ग्लोबल फेस्टिवल के रूप में उभरेगी। भारत की संस्कृति अब और भी चमकदार रूप में विश्व के सामने खड़ी है—और इस सूची में दिवाली का शामिल होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

दिवाली अब विश्व धरोहर

यूनेस्को की ओर से दिवाली को विश्व धरोहर घोषित ​किया गया है। दिवाली अब केवल धार्मिक त्योहार ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के साथ भारत की अर्थव्यवस्था और भारतीय परंपरा से गहराई से जुड़ा त्योहार है। दिवाली को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह भारत ही नहीं कई देशों में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दिवाली मुख्य रुप से पांच दिन का दीप पर्व है। जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और अंत में भाई दूज का अपना अलग-अलग महत्व है। कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दिवाली के मुख्य दिन यानी लक्ष्मी पूजा होती है। यह तिथि हर साल अक्टूबर या नवंबर के माह में आती है।
दिवाली का त्यौहार मनाने के कई परंपरागत वजह भी हैं। जैसे उत्तर भारत में भगवान श्रीराम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने की खुशी तो दक्षिण भारत में श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध करना, जैन धर्म में महावीर निर्वाण दिवस के रुप में और सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस के रूप में इस त्यौहार को मनाते हैं।

Tags: Diwali is now a world heritage
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