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हर फल छिलका उतारकर नहीं खाया जाता…इन फलों की बाहरी परत में छिपे हैं फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स…पहले जान लें ये जरूरी बातें

DigitalDesk by DigitalDesk
August 13, 2026
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फल सेहत के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं, लेकिन फल खाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ज्यादातर लोग सेब, नाशपाती, अमरूद और यहां तक कि आम जैसे फलों का छिलका उतारकर खाना पसंद करते हैं। इसकी वजह स्वाद, बनावट या यह धारणा हो सकती है कि छिलका खाने से नुकसान हो सकता है। हालांकि कई फलों की बाहरी परत में फाइबर, विटामिन, पॉलीफेनोल्स और दूसरे एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

यही वजह है कि हर फल का छिलका बेकार नहीं होता। कुछ फलों को अच्छी तरह धोकर और साफ करके छिलके समेत खाना पोषण के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर फल का छिलका हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या जरूरी है। फल की गुणवत्ता, खेती में इस्तेमाल रसायन, सफाई और व्यक्तिगत पाचन क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए।

1. सेब: छिलके में भी छिपा है पोषण

सेब उन फलों में शामिल है जिन्हें आमतौर पर छिलके समेत खाने की सलाह दी जाती है। सेब के छिलके में फाइबर के साथ कई तरह के पौधों से मिलने वाले लाभकारी कंपाउंड पाए जाते हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, छिलके समेत सेब खाने पर कुछ पोषक तत्वों की मात्रा छिलका हटाकर खाने की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है। खास तौर पर विटामिन K, विटामिन A और विटामिन C के साथ कैल्शियम की उपलब्धता का उल्लेख किया जाता है। सेब के छिलके में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है।

लेकिन ध्यान रखें: सेब को खाने से पहले बहते पानी में अच्छी तरह धोना जरूरी है। सिर्फ पानी में हल्का सा डुबोना पर्याप्त नहीं माना जाता।

2. अमरूद: छिलका बढ़ा सकता है फाइबर

अमरूद को भारतीय घरों में अक्सर काटकर या नमक-मिर्च के साथ खाया जाता है। बहुत से लोग इसका छिलका नहीं हटाते और यह एक अच्छी आदत हो सकती है। अमरूद की बाहरी परत में फाइबर और विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। दिए गए आंकड़ों में छिलके में लगभग 31 प्रतिशत ज्यादा फाइबर होने का दावा किया गया है। फाइबर आंतों की सेहत और सामान्य पाचन के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पौधों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने में भूमिका निभाते हैं।

इसलिए अच्छी तरह धोया हुआ ताजा अमरूद छिलके समेत खाना पोषण के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकता है।

3. नाशपाती: आंखों और दिल के लिए क्यों खास है छिलका?

नाशपाती को कई लोग छिलका हटाकर खाना पसंद करते हैं, लेकिन इसकी बाहरी परत में भी कई लाभकारी पौध-आधारित कंपाउंड मौजूद होते हैं। नाशपाती के छिलके में पॉलीफेनोल्स और फ्लेवोनॉयड्स जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि से जुड़े होते हैं और शरीर में कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। नाशपाती में मौजूद फाइबर भी पाचन और संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए यदि नाशपाती साफ, ताजी और अच्छी तरह धुली हुई है तो उसे छिलके समेत खाना पोषण के लिहाज से अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि किसी एक फल को खाने से हार्ट या आंखों की बीमारी का इलाज नहीं होता। इसे संतुलित डाइट का हिस्सा समझना चाहिए।

4. खुबानी: रंगीन छिलके में एंटीऑक्सीडेंट्स

खुबानी यानी एप्रिकॉट भी उन फलों में शामिल है जिनकी बाहरी परत में पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। खुबानी का छिलका खाने योग्य होता है, बशर्ते फल साफ और अच्छी गुणवत्ता का हो। दिए गए कंटेंट में छिलके के साथ खुबानी खाने पर एंटीऑक्सीडेंट क्षमता में 328 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का दावा किया गया है। हालांकि ऐसे प्रतिशत अलग-अलग अध्ययनों, फल की किस्म और तुलना के तरीके पर निर्भर कर सकते हैं, इसलिए इन्हें हर खुबानी पर लागू होने वाला निश्चित आंकड़ा नहीं मानना चाहिए।

खुबानी में फोलेट, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसका छिलका खाने से डाइट में अतिरिक्त फाइबर और पौध-आधारित कंपाउंड शामिल हो सकते हैं।

5. आम: छिलका पोषक, लेकिन हर किसी के लिए नहीं

आम को फलों का राजा कहा जाता है और भारत में इसे सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में गिना जाता है। आम का गूदा पोषक तत्वों से भरपूर होता है, लेकिन इसके छिलके में भी पॉलीफेनोल्स, कैरोटेनॉयड्स और अन्य पौध-आधारित कंपाउंड पाए जाते हैं। कुछ शोधों में आम के छिलके में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स की एंटीऑक्सीडेंट और संभावित मेटाबॉलिक गतिविधियों पर अध्ययन किया गया है। हालांकि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आम का छिलका खाने से कैंसर खत्म या निश्चित रूप से रोका जा सकता है।

आम का छिलका कुछ लोगों को कड़वा या एलर्जी पैदा करने वाला लग सकता है। इसलिए जिन लोगों को आम के छिलके से खुजली, जलन या एलर्जी की समस्या होती है, उन्हें इसे खाने से बचना चाहिए।

छिलका खाएं तो इन बातों का रखें ध्यान

फलों के छिलके में पोषक तत्व हो सकते हैं, लेकिन उन्हें बिना धोए खाना बिल्कुल सही नहीं है। फल पर मिट्टी, गंदगी, मोम या खेती के दौरान इस्तेमाल किए गए रसायनों के अवशेष हो सकते हैं। फल को खाने से पहले साफ बहते पानी में अच्छी तरह धोएं और हाथ भी साफ रखें। सड़े, कटे या खराब हिस्से वाले फल का इस्तेमाल न करें। एक और जरूरी बात—छिलका खाना कोई अनिवार्य नियम नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को छिलका पचाने में परेशानी होती है या किसी फल से एलर्जी है, तो उसे छिलका हटाकर खाना बेहतर हो सकता है। सबसे जरूरी यह है कि फल आपकी रोजमर्रा की संतुलित डाइट का हिस्सा हों। केवल छिलका खाने से कोई बीमारी ठीक नहीं होती और न ही किसी एक फल को कैंसर से बचाव का इलाज माना जा सकता है।

निष्कर्ष यही है कि सेब, अमरूद, नाशपाती, खुबानी और आम जैसे कुछ फलों की बाहरी परत में भी पोषण छिपा हो सकता है। इसलिए अगली बार फल खाते समय छिलका हटाने से पहले यह जरूर सोचें—क्या इसे साफ करके छिलके समेत खाना ज्यादा पौष्टिक विकल्प हो सकता है?

Tags: #every fruit#Not every fruit is eaten after peeling fiber and antioxidants are hidden in the outer layers of these fruits
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