भारत गुटनिरपेक्ष से ब्रिक्स शिखर वार्ता 2026 तक कितना बदली कूटनीति रणनीति और बदलते दौर में भारत
भारत ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है.। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सिंतबर को ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों सहित 21 से ज्यादा देश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ब्रिक्स की मजेबानी भारत चौथी बार कर रहा है। इसके पहले 2011 में ब्रिस्क की मेजबानी भारत ने की थी। ब्रिक्स संगठन 2006 में बनकर तैयार हुआ था और इस दौरान चार बार भारत की मेजबानी करना वैश्विक स्तर पर भारत की ताकत तो बता रहा है। कैसे भारत ने गुटनिरपेक्ष देशों के संगठन से निकलकर अब ब्रिस्क जैसा समूह तैयार कर लिया है।
गुटनिरपेक्ष से ब्रिक्स तक भारत
भारत का विदेश नीति का सफर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) से शुरू होकर आज ब्रिक्स (BRICS) जैसे व्यावहारिक और आर्थिक मंच तक पहुँच चुका है। यह बदलाव भारत की वैश्विक प्राथमिकताओं, आर्थिक शक्ति और दुनिया में बदलते समीकरणों को दर्शाता है।
विश्व पटल पर भारत की बदलती आर्थिक भूमिकाऐं
भारत हमेशा से अपनी अलग कूट और विदेश नीति के लिए जाना जाता है। पहले कभी भारत अलग और अकेले चलने में भरोसा रखता था। कभी गुटनिरपेक्ष देशों के साथ हुआ करता था जहां भारत की भूमिका वैचारिक स्तर पर थी। लेकिन समय के साथ भारत को ये समझ आया कि बदलते आर्थिक राजनैतिक दौर में पुरानी विदेश नीति के सात नहीं चला जा सकता। पर बदलते और दुनिया की बदलती आर्थिक और राजनैतिक तस्वीर के बीच भारत ने 1991 में उदारीकरण अपनाया। उदारीकरण के साथ अर्थव्यवस्था में दूसरे देशों की एंट्री हुई और देखते देखते भारत विश्व की तेजी से डवलप होती अर्थव्यस्था में गिना जाने लगा। उदारीकरण के साथ साथ भारत ने“ NO Alliance” से “All Alliance “ तक का सफऱ तय किया। इस लंबे अंतराल में भारत ने अपनी विदेश नीति भी बदली औऱ कूटनीति भी।सबसे पहले भारत ने खुद को रणनीति के तौर पर बदला किसी विचारधारा से बंधने की बजाए खुद स्वतंत्र विचारधारा अपनाई । इसके बाद देश के आर्थिक और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाने लगे।
भारत का विदेश नीति का सफर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) से शुरू होकर आज ब्रिक्स (BRICS) जैसे व्यावहारिक और आर्थिक मंच तक पहुँच चुका है। यह बदलाव भारत की वैश्विक प्राथमिकताओं, आर्थिक शक्ति और दुनिया में बदलते समीकरणों को दर्शाता है।
ग्लोबाल साउथ की ताकत बनता भारत
भारत का विदेश नीति का सफर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) से शुरू हो कर आज ब्रिक्स (BRICS) जैसे व्यावहारिक और आर्थिक मंच तक पहुँच चुका है। यह बदलाव भारत की वैश्विक प्राथमिक ताओं, आर्थिक शक्ति और दुनिया में बदलते समीकरणों को दर्शाता है। ब्रिक्स को बने बीस साल हो चुके हैं बीस सालों में भारत ब्रिक्स के साथ सात ग्लोबल साउथ की ताकत और जरूरत और आवाज तीनों बन चुका है। ब्रिक्स के माध्यम से भारत ने पश्चिमी देशों के वर्चस्व (जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक) को चुनौती दी और विकासशील देशों (Global South) के हितों की बात की। इसके साथ ही ब्रिक्स ने अपना बैंक बनाया, जिसका पहला अध्यक्ष भारत ही था। यह बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बहुत जरूरी चीजें है। ब्रिक्स वैसे भी विकासशील अर्थव्यवस्थआ वाले देशों का समूह है ऐसे में भारत एक बड़ी होती अर्थव्यवस्था के साथ साथ एक बड़ा बाजार भी है इसलिए विश्व की कितनी ही बड़ी और्थिक योजनाऐं ओऱ रणनीति क्यों न हो भारत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।
अब ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन की मजेबानी करते हुए भारत व्यवहारिक मंच और आर्थिक मंच पर खुद की ताकत बता रहा है। ग्लोबल साउथ की आवाज: ब्रिक्स के माध्यम से भारत ने पश्चिमी देशों के वर्चस्व (जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक) को चुनौती दी और विकासशील देशों (Global South) के हितों की बात की। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): ब्रिक्स ने अपना बैंक बनाया, जिसका पहला अध्यक्ष भारत ही था।