नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना ‘ऑल वेदर’ हब: घने कोहरे में भी उड़ान संभव, 10 मिनट में चेक-इन का दावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर दिया है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक बड़ा एविएशन हब बनने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। एयरपोर्ट को मार्च 2026 में DGCA से एयरोड्रोम लाइसेंस मिल चुका है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यहां हर मौसम में उड़ान संचालन संभव होगा, खासकर सर्दियों के घने कोहरे के दौरान भी।

3900 मीटर रनवे और आधुनिक तकनीक से कोहरे में भी सुरक्षित लैंडिंग संभव

जेवर एयरपोर्ट का रनवे 3900 मीटर लंबा बनाया गया है, जिसे कम विजिबिलिटी में भी ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। रनवे के दोनों सिरों पर ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) लगाया गया है, जिससे विमान को खराब मौसम या धुंध में भी सुरक्षित लैंडिंग में मदद मिलती है। यह सिस्टम पायलट को रनवे के सेंटर और सही एंगल पर उतरने में तकनीकी सहायता देता है।

एप्रोच लाइटिंग और नेविगेशन सिस्टम से बढ़ेगी फ्लाइट ऑपरेशन की क्षमता

एयरपोर्ट पर एडवांस ग्राउंड लाइटिंग और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे रात और कम दृश्यता की स्थिति में भी उड़ानों का संचालन सुचारू रहेगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार इन सिस्टम का परीक्षण और कैलिब्रेशन पहले ही पूरा किया जा चुका है, जिससे सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

10 मिनट में चेक-इन और बैगेज ड्रॉप की सुविधा से यात्रियों को बड़ी राहत

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को टर्मिनल में कम समय लगे। यहां सेल्फ सर्विस कियोस्क और डिजिटल प्रोसेसिंग सिस्टम के जरिए लगभग 10 मिनट में चेक-इन और बैगेज ड्रॉप की सुविधा देने की योजना है। इससे भीड़ कम होगी और यात्रा अनुभव बेहतर बनेगा।

दिल्ली-NCR के बढ़ते ट्रैफिक को संभालने में मिलेगी मदद

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए जेवर एयरपोर्ट को दूसरे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। खासकर सर्दियों में कोहरे के कारण फ्लाइट देरी की समस्या को कम करने में यह एयरपोर्ट अहम भूमिका निभा सकता है।

 

 

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