छत्तीसगढ़ का बस्तर जो कभी नक्सलवाद और हिंसा की वजह से देशभर में चर्चा में रहता था, अब विकास और बदलाव की नई पहचान बना रहा है। लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं से दूर रहे इस क्षेत्र में अब गांव-गांव तक बिजली, शिक्षा, बैंकिंग और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। इस बदलाव के केंद्र में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘नियद नेल्ला नार’ है, जिसका स्थानीय बोली में अर्थ होता है — “आपका अच्छा गांव”।
कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित इलाकों में अब सुनाई दे रही स्कूलों की घंटियां
327 से अधिक गांवों में बिजली, सड़क और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच
आदिवासी समुदाय को बैंकिंग और सरकारी योजनाओं का मिल रहा लाभ
महिलाओं और बच्चों के जीवन स्तर में दिख रहा सकारात्मक बदलाव
सुरक्षा और विकास के संयुक्त मॉडल से बदल रहा बस्तर का माहौल
करीब डेढ़ साल पहले शुरू की गई इस योजना ने बस्तर संभाग के सैकड़ों गांवों में विकास की रफ्तार तेज कर दी है। सरकार का दावा है कि योजना के जरिए अब तक 327 से अधिक गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा चुका है। जिन इलाकों में पहले विकास कार्य करना चुनौती माना जाता था, वहां अब सड़क, बिजली, आंगनबाड़ी और स्कूल जैसी सुविधाएं दिखाई देने लगी हैं।
गांवों तक पहुंची बिजली और शिक्षा
बस्तर के कई ऐसे गांव, जहां वर्षों तक अंधेरा और अलगाव बना रहा, अब बिजली की रोशनी से जगमगाने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार शाम ढलते ही जहां पहले सन्नाटा और डर का माहौल होता था, वहीं अब बच्चे घरों में पढ़ाई कर पा रहे हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के शुरू होने से शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार देखा जा रहा है। महिलाएं अब बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी लेकर जा रही हैं, जिससे पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी मिल रहा है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा है।
मोबाइल नेटवर्क से डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे ग्रामीण
योजना के तहत कई गांवों में मोबाइल टावर लगाए गए हैं, जिससे दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क सुविधा मजबूत हुई है। पहले जहां मोबाइल सिग्नल के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, वहीं अब गांवों में ही संचार सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। मोबाइल नेटवर्क मजबूत होने से ग्रामीण डिजिटल सेवाओं से भी जुड़ने लगे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, सरकारी योजनाओं की जानकारी और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं का लाभ अब आदिवासी समुदाय तक पहुंच रहा है। इससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और पहुंच दोनों में सुधार हुआ है।
बैंकिंग सुविधा से बढ़ा आर्थिक आत्मविश्वास
बस्तर क्षेत्र के कई गांवों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार भी इस योजना की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पहले ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूर शहरों तक जाना पड़ता था, लेकिन अब गांवों के आसपास बैंक और बैंकिंग प्रतिनिधियों की उपलब्धता बढ़ी है। इससे मजदूरी, पेंशन और सरकारी सहायता राशि सीधे खातों में पहुंच रही है। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि बैंकिंग सुविधा मिलने से नकदी पर निर्भरता कम हुई है और बचत की आदत बढ़ी है।
सुरक्षा और विकास साथ-साथ
छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास योजनाओं के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया है। बस्तर के अलावा Sukma, Dantewada, Narayanpur, Bijapur और Kanker जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में 54 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं।
प्रशासन का मानना है कि सुरक्षा और विकास का संयुक्त मॉडल ही क्षेत्र में स्थायी बदलाव ला सकता है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी से सड़क, बिजली और संचार परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिली है।
बदलाव की नई पहचान बनता बस्तर
विशेषज्ञों के अनुसार बस्तर में हो रहे बदलाव केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण जीवन में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। जिन गांवों में पहले भय और असुरक्षा का माहौल था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की भागीदारी और बाजार गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना को बस्तर में विश्वास बहाली और विकास के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में और अधिक गांवों को इस योजना से जोड़कर क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास जारी रहेगा।