बंगाल की राजनीति में उभरता नया चेहरा: TMC की सयानी घोष का बढ़ता प्रभाव…क्या मतदाताओं को लुभा सकेंगी सयानी

Bengal politics Sayani Ghosh

पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों एक चेहरा तेजी से उभर रहा है। एक ऐसा नाम जो मीडिया और सोशल मीडिया—दोनों पर छाया हुआ है। हम बात कर रहे हैं टीएमसी की नेता और अभिनेत्री से राजनेता बनीं सयानी घोष की।

टीएमसी की राजनीति में महिला चेहरों की बात हो तो सबसे पहले नाम आता है मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का और अब उसी कतार में तेजी से अपनी जगह बना रहीं हैं सयानी घोष। सिनेमा से राजनीति में आई सयानी अब धीरे-धीरे राजनीतिक दांव-पेंच में भी माहिर होती नजर आ रही हैं।
सयानी की चुनावी सभाओं में उमड़ती भीड़ और सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि वो अब सिर्फ एक चेहरा नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक आवाज बनती जा रही हैं। हालांकि राजनीति में उनकी एंट्री को ज्यादा समय नहीं हुआ है। साल 2015 में एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के चलते वो सुर्खियों में आई थीं। शिवलिंग और कंडोम से जुड़े उस ट्वीट पर विवाद बढ़ा, जिसके बाद पोस्ट हटा दिया गया। लेकिन यहीं से सयानी का नाम चर्चा में आ गया।

इसके बाद साल 2021 में त्रिपुरा में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी देकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। यहीं से टीएमसी में उनकी सक्रियता बढ़ी और उन्हें पार्टी की युवा विंग की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। साल 2024 में जादवपुर लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद सयानी घोष ने संसद में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। अपने धारदार भाषणों और सरकार पर तीखे हमलों के जरिए उन्होंने खुद को एक मुखर नेता के रूप में स्थापित किया। अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में सयानी घोष अपने आक्रामक अंदाज और बीजेपी पर सीधे तंज कसने की शैली को लेकर सुर्खियों में हैं।

तो क्या सयानी घोष आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में एक बड़ा नाम बनकर उभरेंगी… ये देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, उनकी बढ़ती सक्रियता ने सियासी गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

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