पुणे विश्वविद्यालय बना आंदोलन का केंद्र
देश की उभरती राजनीतिक और छात्र-आधारित संगठन Cockroach Janata Party (सीजेपी) ने गुरुवार को पुणे स्थित Savitribai Phule Pune University परिसर से अपने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समर्थक शामिल हुए। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग करना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाना था।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रियाओं और शिक्षा नीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। आयोजकों का दावा है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर में शिक्षा सुधार को लेकर चलाया जाने वाला व्यापक अभियान है।
सोनम वांगचुक ने पेश किया शिक्षा घोषणापत्र
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने मंच से पार्टी का शिक्षा घोषणापत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र लगातार परीक्षा प्रणाली की खामियों का सामना कर रहे हैं।
घोषणापत्र में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं, परीक्षा परिणामों में देरी, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी तथा परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। वांगचुक ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए व्यापक सुधारों की जरूरत है।
अभिजीत दिपके ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
पार्टी के संस्थापक Abhijeet Dipke ने सभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि पुणे का प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले प्रदर्शन की तुलना में अधिक प्रभावशाली रहा दिपके ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने एनसीईआरटी की पुस्तकों में मराठा साम्राज्य का मानचित्र दोबारा शामिल करने की भी मांग की।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब 2025-26 सत्र की कक्षा 8 की एनसीईआरटी पुस्तक में प्रकाशित एक मानचित्र को कुछ इतिहासकारों और पूर्व राजघरानों के सदस्यों की आपत्तियों के बाद मार्च 2026 में हटा दिया गया था। डिपके ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए पुनर्विचार की मांग की।
देशभर में होंगे आंदोलन और सभाएं
सीजेपी ने घोषणा की है कि पुणे से शुरू हुआ यह अभियान देश के कई प्रमुख शहरों तक पहुंचेगा। पार्टी के अनुसार अगला प्रदर्शन लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद जयपुर, अमृतसर और बेंगलुरु सहित कई शहरों में सभाएं और जनसंपर्क कार्यक्रम किए जाएंगे। यह अभियान 20 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन के साथ समाप्त होगा। गौरतलब है कि पार्टी का पहला बड़ा प्रदर्शन 6 जून को जंतर-मंतर पर आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाना है।
पीएम मोदी से मुलाकात के दावे को बताया गलत
प्रदर्शन से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में अभिजीत दिपके ने उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अमेरिका में प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात की थी। डिपके ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही तस्वीर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार की गई प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि उस समय वह अमेरिका में केवल एक छात्र थे और प्रधानमंत्री से मुलाकात जैसी बात पूरी तरह निराधार है।
यह बयान उस आरोप के बाद आया जिसमें Sanjay Raut ने दावा किया था कि डिपके की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात हुई थी। हालांकि इस कथित मुलाकात से जुड़ी कोई आधिकारिक तस्वीर या प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया।
पुणे से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार, शिक्षा संस्थान और छात्र संगठन इन मांगों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं।





