मुंबई में चीनी महावाणिज्य दूतावास ने मंगलवार को रामनारायण रुइया ऑटोनॉमस कॉलेज के
सहयोग से दूसरे चीन-भारत ब्रिक्स संवाद और चीनी फिल्म प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस अवसर पर महावाणिज्यदूत छिन च्ये और कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अनुश्री लोकुर ने कार्यक्रम में
हिस्सा लिया और संबोधित किया। कार्यक्रम में कॉलेज के करीब 400 शिक्षक और छात्र शामिल
हुए।
इस मौके पर महावाणिज्यदूत छिन च्ये ने कहा कि चीन और भारत दोनों प्राचीन इतिहास और
समृद्ध संस्कृतियों वाले देश हैं। चीन के थांग राजवंश (618-907) में महाचार्य ह्वेन त्सांग की
पश्चिम यात्रा दोनों सभ्यताओं के बीच आपसी सीख और सांस्कृतिक आदान प्रदान का एक अच्छा
उदाहरण है।
छिन च्ये ने यह भी कहा कि आज दुनिया में उथल पुथल और तेजी से बदलाव का दौर है। ऐसे में
चीन और भारत को एक दूसरे के विकास के अवसर और साझेदार बने रहना चाहिए। साथ ही, दोनों
देशों को ब्रिक्स के तहत आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाना चाहिए तथा वैश्विक दक्षिण की एकता
और विकास को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि दुनिया में शांति और विकास को मजबूती मिल सके।
महावाणिज्यदूत ने बल देते हुए कहा कि युवा दोनों देशों का भविष्य हैं। उन्होंने उम्मीद जताई
कि युवा एक दूसरे के साथ संवाद और संपर्क बढ़ाएंगे और दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता के दूत
की भूमिका निभाएंगे।
वहीं, डॉ. अनुश्री लोकुर ने कहा कि भारत और चीन दोनों बड़ी आबादी वाले देश हैं। ऐसे में विभिन्न
क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाना न केवल दोनों देशों, बल्कि पूरी
दुनिया के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अगले महीने होने वाले ब्रिक्स शिखर
सम्मेलन की सफलता की भी कामना की।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)