रक्षाबंधन से पहले उज्जैन में देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के सम्मान में एक भावुक और राष्ट्रभक्ति से भरी पहल देखने को मिली। उज्जैन की बहनों ने अपने हाथों से राखियां तैयार कर सरहद पर तैनात सैनिक भाइयों के लिए भेजीं। अभियान के तहत 15 हजार से अधिक राखियां जवानों तक पहुंचाई गईं। राखियों के साथ बहनों और बच्चों के भावुक पत्र और शुभकामना संदेश भी भेजे गए।
सरहद पर पहुंची उज्जैन की बहनों की राखी
15 हजार से ज्यादा रक्षासूत्रों में लिपटा सैनिकों के नाम प्यार
इस पहल का मकसद सिर्फ जवानों की कलाई पर राखी पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें यह एहसास कराना था कि परिवार से हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद पूरा देश उनके साथ खड़ा है। रक्षाबंधन के मौके पर भेजी गई इन राखियों में भाई-बहन के रिश्ते के साथ सैनिकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रप्रेम की भावना भी दिखाई दी।
डाक विभाग ने निभाई अहम भूमिका
अभियान को सरहद तक पहुंचाने में डाक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रवर अधीक्षक डाकघर अजय कुमार के मार्गदर्शन में उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से एकत्र राखियों और पत्रों को व्यवस्थित कर देश की दुर्गम सीमावर्ती चौकियों तक भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।
उज्जैन के डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने राखियों को सुरक्षित तरीके से पैक करने और निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने में सहयोग किया। इस पूरी पहल ने त्योहार की खुशियों को सीमा पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाने का काम किया।
बालिकाओं और छात्राओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
अभियान से जुड़े रवीन्द्र शर्मा के मुताबिक बड़ी संख्या में बालिकाओं और छात्राओं ने इसमें हिस्सा लिया। बच्चों ने अपने हाथों से राखियां तैयार कीं और सैनिक भाइयों के नाम भावनात्मक पत्र लिखे।
कहीं इन पत्रों में सैनिकों के साहस को सलाम किया गया तो कहीं उनके अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षित घर वापसी की कामना की गई। बच्चों के संदेशों में यह भावना प्रमुख रही कि सीमा पर तैनात जवानों की वजह से ही देशवासी अपने घरों में सुरक्षित और निश्चिंत रह पाते हैं।
‘आप हैं तो हम सुरक्षित हैं’
अभियान के दौरान बच्चों द्वारा लिखे गए पत्रों ने इस पहल को और भावुक बना दिया। कक्षा 5वीं की छात्रा वैदेही अग्रवाल ने अपने पत्र में सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए लिखा कि उसे खुशी है कि देश के वीर सैनिक सीमाओं पर डटकर देश की रक्षा कर रहे हैं।
छात्रा ने सैनिकों के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए उनकी सेवा और त्याग को नमन किया। बच्चों ने अपने पत्रों में जवानों को देश का गौरव बताते हुए कहा कि उनकी वजह से ही लोग अपने घरों में चैन की नींद सो पाते हैं।
राखी के साथ पहुंचा भरोसे का संदेश
आयोजकों के मुताबिक इस अभियान के पीछे भावना थी कि रक्षाबंधन के दिन सीमा पर तैनात जवानों को अपने घर-परिवार की कमी कुछ कम महसूस हो। सैनिकों के लिए भेजी गई राखियां उन्हें यह संदेश देने का माध्यम बनीं कि देश के करोड़ों परिवारों का स्नेह उनके साथ है।
स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी ने अभियान को व्यापक रूप दिया। इसके जरिए बच्चों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का प्रयास भी किया गया।
रक्षाबंधन आमतौर पर भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है, लेकिन उज्जैन की बहनों की इस पहल ने इस रिश्ते को एक बड़े राष्ट्रीय भाव से जोड़ दिया। यहां राखी सिर्फ एक धागा नहीं रही, बल्कि सीमा पर खड़े जवानों के लिए सम्मान, भरोसे और अपनत्व का संदेश बन गई। 15 हजार से अधिक राखियां, बच्चों के भावुक पत्र और बहनों की शुभकामनाएं—उज्जैन से सरहद तक पहुंची यह राष्ट्रभक्ति की डोर यही कहती है कि जवान भले ही अपने परिवार से दूर हों, लेकिन देश उनके साथ खड़ा है।