भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने खरीदा रुस से 33 अरब डॉलर का तेल…ट्रंप की नाराज़गी का खतरा

Mukesh Ambani bought $33 billion worth of oil from Russia

भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने खरीदा रुस से 33 अरब डॉलर का तेल…ट्रंप की नाराज़गी का खतरा

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने भारत के ऊर्जा बाज़ार को नया मोड़ दिया है। भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने कथित तौर पर अब तक लगभग 33 अरब डॉलर का रूसी कच्चा तेल खरीदा है। इस खरीद से उनकी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को भारी लाभ हुआ है क्योंकि रूस भारत को डिस्काउंट पर तेल बेच रहा है।

अमेरिका और यूरोप लंबे समय से रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए प्रतिबंधों का सहारा ले रहे हैं। लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा ज़रूरतों और सस्ते आयात के अवसर को देखते हुए रूस से लगातार खरीदारी बढ़ाई है। इस बीच अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर भारतीय उद्योग जगत में चिंता गहराती जा रही है। ट्रंप प्रशासन पहले भी व्यापारिक मसलों पर भारत पर दबाव बना चुका है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि वॉशिंगटन से नई नाराज़गी भारत के बड़े उद्योगपतियों पर सीधा असर डाल सकती है।

पिछले महीने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “भारत के कुछ सबसे अमीर परिवार यूक्रेन युद्ध से मुनाफ़ा कमा रहे हैं।” उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों और ऊर्जा बाज़ार के जानकारों का मानना है कि यह सीधा इशारा मुकेश अंबानी की ओर था।

अंबानी की रिफाइनरियों ने रूस से आए सस्ते कच्चे तेल को प्रोसेस करके यूरोप, अफ्रीका और एशिया के दूसरे हिस्सों में ऊँचे दामों पर उत्पादों के रूप में बेचा। इससे रिलायंस के मुनाफ़े में तेज़ उछाल आया। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन यदि रूस से व्यापार करने वाली कंपनियों को निशाना बनाता है तो रिलायंस जैसी कंपनियों पर भारी असर पड़ सकता है।

भारत सरकार ने अब तक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय का तर्क है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और जनता की ज़रूरतों को देखते हुए स्वतंत्र निर्णय लेता है। फिर भी, अमेरिकी दबाव बढ़ने की स्थिति में मोदी सरकार के लिए अंबानी जैसे उद्योगपतियों के हित और रणनीतिक साझेदारी—दोनों को साधना बड़ी चुनौती होगी।

वैश्विक तेल बाज़ार में रूस-भारत के रिश्ते ने नई आर्थिक ध्रुवीकरण की झलक दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह धंधा लंबे समय तक चलेगा या फिर ट्रंप की संभावित नाराज़गी भारत के सबसे अमीर आदमी के लिए महंगा सौदा साबित होगी। प्रकाश कुमार पांडेय

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