जुलाई का पहला सप्ताह देशभर में मानसून की पूरी ताकत लेकर आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को देश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश, आंधी और गरज-चमक के साथ मौसम बिगड़ने की संभावना है। झारखंड और छत्तीसगढ़ के ऊपर बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र लगातार उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। अरब सागर से आने वाली नमी और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से यह मौसम प्रणाली और अधिक सक्रिय हो गई है। इसका असर उत्तर, मध्य, पूर्व और पश्चिम भारत के कई राज्यों में दिखाई देगा।
- दिल्ली-एनसीआर में बदलेगा मौसम का मिजाज
- यूपी-बिहार में भारी बारिश की चेतावनी
- पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का बढ़ा खतरा
- मुंबई-गुजरात तट पर बारिश का कहर
- 20 से अधिक राज्यों में मानसून का असर
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में आज मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। दिनभर बादल छाए रहने के साथ तेज हवाएं चलने और कई स्थानों पर झमाझम बारिश होने का अनुमान है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा में भारी बारिश को लेकर विशेष चेतावनी जारी की गई है। तेज बारिश के कारण जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी रफ्तार पर है। पूर्वांचल के वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बलिया और आजमगढ़ सहित कई जिलों में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, बरेली, आगरा और अलीगढ़ में भी तेज बारिश के दौर की संभावना है। किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आएगी, लेकिन निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
बिहार में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। पटना, गया, भागलपुर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और दरभंगा सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। लगातार वर्षा के चलते छोटी नदियों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ सकता है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की अपील की है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। भोपाल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभाग में तेज बारिश की संभावना है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश चिंता का कारण बन सकती है। देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चारधाम यात्रा मार्गों पर भूस्खलन तथा पहाड़ों से पत्थर गिरने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने यात्रियों को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी है। कई संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
पश्चिमी भारत में भी मानसून का असर कम नहीं है। मुंबई, कोंकण, पुणे और गुजरात के तटीय जिलों में अत्यधिक बारिश का अनुमान है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है।
पूर्वोत्तर भारत में असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम में अगले 24 घंटे तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। लगातार हो रही वर्षा के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। कई जिलों में प्रशासन ने राहत और बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा है।
मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून की यही सक्रियता बनी रह सकती है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली चमकने के समय खुले स्थानों पर न रुकने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। मानसून भले ही गर्मी से राहत लेकर आया हो, लेकिन इसके साथ आने वाले खतरे भी कम नहीं हैं। इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।





