केंद्र सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और संगठनात्मक बदलावों के बीच यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा सकता है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार फिलहाल सरकार की प्राथमिकता मंत्रिमंडल विस्तार नहीं, बल्कि आगामी संसद सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कैबिनेट विस्तार को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए और यह प्रक्रिया सितंबर या अक्टूबर 2026 में पूरी की जाए। इस बीच पार्टी संगठन में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
सरकार की पहली प्राथमिकता संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना मानी जा रही है
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार फिलहाल मंत्रिमंडल में बदलाव की बजाय संसद के आगामी मानसून सत्र पर पूरा ध्यान केंद्रित किए हुए है। सरकार की कोशिश उन महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की है, जिनमें परिसीमन और ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख बताए जा रहे हैं। चूंकि सरकार के पास राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं है, इसलिए किसी भी बड़े राजनीतिक निर्णय से पहले सहयोगी दलों और सांसदों के बीच संतुलन बनाए रखना अहम माना जा रहा है। ऐसे में सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार की संभावना सीमित नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम के कारण भी विस्तार के लिए समय बेहद कम बचा है
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी कार्यक्रम पहले से तय है, जिससे मंत्रिमंडल विस्तार के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं है। द्रौपदी मुर्मू आंध्र प्रदेश के दौरे पर हैं और 1 जुलाई की शाम को राजधानी लौटेंगी। इसके बाद प्रधानमंत्री 1 से 3 जुलाई तक जापान के प्रधानमंत्री के भारत दौरे से जुड़े कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। 4 जुलाई को राजस्थान दौरा और 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड की विदेश यात्रा प्रस्तावित है। ऐसे में मानसून सत्र से पहले केवल सीमित समय ही उपलब्ध बचता है।
पिछले वर्षों में कई बार संसद सत्र से पहले भी हुए हैं बड़े मंत्रिमंडलीय फेरबदल
हालांकि राजनीतिक इतिहास बताता है कि अंतिम समय में भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। 7 जुलाई 2021 को संसद सत्र से ठीक पहले केंद्र सरकार ने व्यापक कैबिनेट विस्तार किया था। उस समय 36 नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जबकि 12 मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया गया था। इससे पहले नवंबर 2014 में 21, जुलाई 2016 में 19 और सितंबर 2017 में 9 नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह मिली थी। इसलिए अंतिम समय में फेरबदल की संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता।
महिला प्रतिनिधित्व, ओबीसी संतुलन और चुनावी राज्यों को मिल सकती है प्राथमिकता
सूत्रों के अनुसार यदि आगामी महीनों में मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो उसमें कई राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने, ओबीसी वर्ग को अधिक भागीदारी देने और अगले वर्ष जिन सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं को अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा कुछ पूर्व नौकरशाहों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चाएं चल रही हैं। इस बीच राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद कुछ पद खाली हुए हैं, जिन पर भी नए चेहरों की नियुक्ति की संभावना बनी हुई है।
सितंबर-अक्टूबर में हो सकता है बड़ा राजनीतिक संदेश देने वाला मंत्रिमंडल विस्तार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि संसद का मानसून सत्र सुचारु रूप से पूरा हो जाता है और सरकार अपने प्रमुख विधेयकों को आगे बढ़ाने में सफल रहती है, तो उसके बाद सितंबर या अक्टूबर में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है। इस संभावित फेरबदल के जरिए सरकार संगठन और शासन, दोनों स्तरों पर नया संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही लिया जाएगा, इसलिए आधिकारिक घोषणा होने तक सभी संभावनाओं को केवल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।





