मिडिल ईस्ट जंग LIVE: ईरान का ‘70 लाख सैनिक’ दावा, ऑस्ट्रिया ने US को रोका—अब रूस बनेगा मध्यस्थ?
जंग के 34वें दिन हालात और तनावपूर्ण, कूटनीति और सैन्य बयानबाज़ी दोनों चरम पर
मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान तनाव अब और गहराता जा रहा है। जंग के 34वें दिन एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए “ऑपरेशन फ्यूरी” जारी रखने की बात कही, वहीं दूसरी ओर ईरान ने अपनी ताकत का बड़ा संकेत दिया है।
ईरान का बड़ा दावा—70 लाख लोग तैयार
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग में 70 लाख लोग सेना में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा—ईरान पूरी तरह तैयार है और दुश्मनों को आगे बढ़ने का इंतजार कर रहा है। यह बयान साफ संकेत देता है कि ईरान सिर्फ सैन्य ही नहीं, बल्कि जनसमर्थन के स्तर पर भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है।
ऑस्ट्रिया ने US को दिया झटका
इस जंग के बीच अमेरिका को कूटनीतिक मोर्चे पर झटका लगा है। ऑस्ट्रिया ने ईरान से जुड़े सैन्य ऑपरेशन के लिए अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अमेरिकी अपील को ठुकरा दिया है। यह फैसला यूरोप के भीतर भी इस जंग को लेकर मतभेदों को उजागर करता है और अमेरिका की रणनीति पर असर डाल सकता है।
क्या रूस बनेगा ‘पीस ब्रोकर’?
इसी बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। व्लादिमीर पुतिन ने सऊदी क्राउन प्रिंस से बातचीत की है और संकेत दिए हैं कि रूस, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने को तैयार है। अगर ऐसा होता है, तो इस संकट में पाकिस्तान की जगह रूस एक बड़े ‘मध्यस्थ’ की भूमिका में नजर आ सकता है।
अमेरिका का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा और ऑपरेशन जारी रहेगा।
इससे साफ है कि सैन्य कार्रवाई फिलहाल रुकने के आसार कम हैं।
जंग और कूटनीति साथ-साथ
मिडिल ईस्ट में हालात अब दो दिशाओं में बढ़ रहे हैं—
- एक तरफ सैन्य ताकत और आक्रामक बयान
- दूसरी तरफ कूटनीतिक मध्यस्थता की कोशिश
आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या यह संघर्ष और बढ़ेगा या रूस जैसे देशों की पहल से कोई रास्ता निकलेगा।





