दुनिया की राजनीति इस समय एक दिलचस्प दौर से गुजर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर जहां ज्यादातर सत्ताधारी नेताओं और सरकारों के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी यानी सत्ता-विरोधी लहर दिखाई दे रही है, वहीं शहरों के मेयर कई जगह इसके उलट कहानी लिख रहे हैं। सवाल यही है—आखिर ऐसा क्यों?
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी इसका ताजा उदाहरण हैं। पद संभालने के छह महीने से ज्यादा समय बाद भी उनकी लोकप्रियता कायम है। उनका अप्रूवल रेटिंग 58 प्रतिशत बताया गया है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर के कई नेता ऐसी लोकप्रियता के लिए तरसते हैं।
बेशक ममदानी की व्यक्तिगत राजनीतिक क्षमता, उनकी तेज पहल और जनता से जुड़ने वाली राजनीति इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। लेकिन असली सवाल इससे आगे है— क्या ममदानी की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि वे ‘मेयर’ हैं? यानी क्या स्थानीय राजनीति में जनता और नेता के बीच जो सीधा रिश्ता बनता है, वह राष्ट्रीय राजनीति में संभव नहीं हो पाता?
दुनिया में ‘मेयर मैजिक’ क्यों दिख रहा है?
आज दुनिया के कई लोकतंत्रों में राष्ट्रीय नेताओं के प्रति मतदाताओं का भरोसा कमजोर हुआ है। 2024 में दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में हुए राष्ट्रीय चुनावों में लगभग हर मौजूदा सरकार को अपने वोट शेयर में गिरावट का सामना करना पड़ा। लेकिन स्थानीय राजनीति में तस्वीर हमेशा ऐसी नहीं रही। रियो डी जेनेरो के पूर्व मेयर एडुआर्डो पेस ने 2024 में 60 प्रतिशत से ज्यादा वोटों के साथ चौथा कार्यकाल जीता। अटलांटा के मेयर आंद्रे डिकेंस ने अगले साल 85 प्रतिशत वोटों के साथ दोबारा जीत हासिल की।
इसका मतलब यह नहीं कि हर मेयर लोकप्रिय होता है। स्थानीय स्तर पर भी भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और जनता की नाराजगी के कारण कई मेयर चुनाव हारते हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय राजनीति में जब जनता का भरोसा तेजी से टूट रहा है, तब कई स्थानीय नेता उस भरोसे को बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।
लोकल नेता जनता के ज्यादा करीब क्यों दिखता है?
‘मेयर मैजिक’ की सबसे बड़ी वजह है—मानवीय पैमाना।
एक शहर सीमित भौगोलिक क्षेत्र है। मेयर अपने शहर के लोगों के बीच दिखाई देता है। जनता उसे बाजार में, सड़क पर, कार्यक्रमों में और सार्वजनिक जगहों पर देख सकती है। मतदाता सिर्फ टीवी स्क्रीन पर नेता को नहीं देखता, बल्कि उसके फैसलों का असर अपनी जिंदगी में महसूस करता है।
सड़क बनी या नहीं बनी।
सार्वजनिक परिवहन सुधरा या नहीं।
साइकिल लेन बनी तो सुविधा हुई या परेशानी।
कचरा उठा या नहीं।
पार्क बेहतर हुआ या नहीं।
यानी स्थानीय राजनीति में नीति और उसका असर जनता के बीच ज्यादा प्रत्यक्ष होता है। यही लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत करता है।
‘वादा बनाम डिलीवरी’ का हिसाब आसान
राजनीति में किसी सरकार के काम का मूल्यांकन करना जटिल हो सकता है। अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, रक्षा, वैश्विक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां—इन सबका असर सरकार के प्रदर्शन पर पड़ता है। लेकिन शहर में मतदाता कई चीजों को सीधे अपनी आंखों से देख सकता है। यही वजह है कि स्थानीय नेता के लिए जनता के सामने जवाबदेही से बचना कठिन होता है।
मतदाता के पास एक स्पष्ट सवाल होता है—
“आपने जो वादा किया था, वो जमीन पर कितना उतरा?”
यही स्थानीय लोकतंत्र की ताकत है।
मेयर की राजनीति में ‘दिखाई देना’ सबसे बड़ा हथियार
मेयर जनता से सिर्फ राजनीतिक भाषणों के जरिए संवाद नहीं करता।
वह शहर में मौजूद रहता है।
यही वजह है कि न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी को लेकर लोगों के व्यक्तिगत अनुभव भी उनकी राजनीतिक छवि को प्रभावित करते हैं। जब कोई मतदाता किसी नेता को अपने शहर में चलते-फिरते देखता है या उसकी नीतियों का प्रत्यक्ष अनुभव करता है तो राजनीति ज्यादा व्यक्तिगत हो जाती है। यहां सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय नेता का एक छोटा फैसला भी तुरंत चर्चा का विषय बन सकता है। यानी मेयर की राजनीति में दूरी कम और जवाबदेही ज्यादा होती है।
अगर ‘मेयर मैजिक’ को समझा जाए तो राष्ट्रीय राजनीति के लिए इसमें कई बड़े सबक छिपे हैं।
पहला—जनता से दूरी कम करनी होगी।
दूसरा—नीतियों का असर दिखाई देना चाहिए।
तीसरा—स्थानीय सरकारों को ज्यादा अधिकार देने होंगे।
चौथा—जनता को यह महसूस होना चाहिए कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव के दिन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी काम कर रहा है।
यही सोच ‘न्यू लोकलिज्म’ के विचार के केंद्र में है। स्थानीय सरकारों को ज्यादा ताकत देकर उन्हें सार्वजनिक सेवाओं, परिवहन, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर ज्यादा नियंत्रण देना इस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एंटी-इंकम्बेंसी के दौर में स्थानीय राजनीति बनी उम्मीद
राष्ट्रीय राजनीति में आज एक दिलचस्प विरोधाभास दिखाई देता है।
एक तरफ मतदाता सत्ता में बैठे नेताओं से जल्दी नाराज हो रहा है।
दूसरी तरफ वही मतदाता अपने शहर के मेयर को लगातार मौका दे सकता है।
क्यों?
क्योंकि स्थानीय नेता की सफलता का पैमाना ज्यादा सीधा है।
काम दिखा—भरोसा कायम।
काम नहीं हुआ—जवाबदेही तय।
यही वह मॉडल है जिसे राष्ट्रीय राजनीति अपनाने की कोशिश कर सकती है।
ब्रिटेन का ‘बर्नहम मॉडल’
ब्रिटेन में एंडी बर्नहम का उदाहरण इस बहस को और दिलचस्प बनाता है। बर्नहम लंबे समय तक ग्रेटर मैनचेस्टर के लोकप्रिय मेयर रहे और लगातार तीन कार्यकाल जीत चुके हैं। अब वे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद पर हैं—ऐसे समय में जब देश पिछले दस वर्षों में छह प्रधानमंत्रियों का दौर देख चुका है। बर्नहम का अनुभव उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक अलग दृष्टिकोण देता है। उनका जोर सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण को कम करने और स्थानीय सरकारों को ज्यादा अधिकार देने पर है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री कार्यालय का उत्तरी आउटपोस्ट ‘No. 10 North’ बनाया गया है। सरकार ने ‘devolving by default’ यानी जहां संभव हो, सत्ता और फैसले स्थानीय स्तर तक पहुंचाने को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया है।
वित्तीय स्वायत्तता से लेकर परिवहन, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं तक स्थानीय सरकारों की भूमिका बढ़ाने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन विकेंद्रीकरण का जोखिम भी है सत्ता स्थानीय स्तर पर देना आसान है, लेकिन उसके साथ जवाबदेही भी बांटनी पड़ती है। अगर स्थानीय सरकार सफल होती है तो श्रेय किसे मिलेगा? और अगर स्थानीय सरकार असफल होती है तो जि म्मेदारी किसकी होगी? यही सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। सत्ता स्थानीय अधिकारियों को दी जा सकती है, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व पूरी तरह जवाबदेही से बाहर नहीं हो सकता। क्योंकि जनता आखिरकार पूरी व्यवस्था का मूल्यांकन करती है।