बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आते-आते अलीनगर विधानसभा सीट इस बार राज्य ही नहीं, पूरे देश में सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई है। इसका कारण है—लोकप्रिय लोक गायिका और सोशल मीडिया सेंसेशन मैथिली ठाकुर का राजनीति में पदार्पण। बीजेपी ने पहली बार उन्हें टिकट देकर बड़ा दांव खेला है, जबकि उनके सामने आरजेडी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता बिनोद मिश्रा मैदान में हैं।
चुनाव गिनती के ताजा रुझानों में मैथिली ठाकुर लगभग 8,500 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं और जिस तरह माहौल बन रहा है, उससे मुकाबला रोमांचक ही नहीं, बल्कि जिज्ञासा से भरा भी हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यही क्या मैथिली ठाकुर गायिकी से जितना कमाती हैं, उससे ज्यादा MLA बनकर कमाएंगी?
अलीनगर… बिहार की सबसे चर्चित सीट
मैथिली ठाकुर दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट पर स्टार उम्मीदवार होने की वजह से शुरुआती प्रचार से ही राष्ट्रीय मीडिया की निगाहें बनी हुई हैं। गिनती के 18 राउंड तक मैथिली ठाकुर को 63,236 वोट मिल चुके हैं और वे 8 हजार 588 वोटों से आगे चल रही हैं। यह बढ़त सिर्फ मतों की नहीं है बल्कि यह संकेत भी है कि उनकी लोकप्रियता अब राजनीति में भी बदलती दिख रही है।
मंच से विधानसभा तक: कमाई का बड़ा सवाल
अब बात उस सवाल की, जो सोशल मीडिया, टीवी डिबेट और जनता के बीच लगातार उठ रहा है व्यक्तिगत कमाई किसमें ज्यादा है—गायिकी में या विधायकी में?
गायिकी से मैथिली की कमाई
मैथिली ठाकुर किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। देश-विदेश में उनके लाइव शो, वायरल भजन और लोकगीत, और यूट्यूब–इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर लाखों फॉलोअर्स… ये सब उनकी कमाई का प्रमुख स्रोत हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक..अनुमानित बाजार मूल्य
हर महीने 12–15 लाइव शो
प्रतीक शो फीस: 5–7 लाख रुपये
मासिक कमाई: 60–80 लाख रुपये
सालाना कमाई: 7–9 करोड़ रुपये
हालांकि, चुनाव आयोग को दिए गए एफिडेविट में उनके आधिकारिक आंकड़े अलग हैं
कुल घोषित संपत्ति: 3.82 करोड़ रुपये
चल संपत्ति: 3.04 करोड़ रुपये
अचल संपत्ति: 1.50 करोड़ रुपये (द्वारका, दिल्ली में फ्लैट)
आईटीआर के मुताबिक वार्षिक आय (2023-24): 28,67,350 रुपये
ये अंतर इसलिए होता है क्योंकि कलाकार की पूरी बाजार वैल्यू ITR में दिखाई गई कमाई में परिलक्षित नहीं होती।
MLA बनने पर मिलने वाली सैलरी और सुविधाएं
बिहार में एक विधायक को मिलने वाली मासिक सुविधाएं कुछ इस प्रकार हैं बेसिक सैलरी: 50,000 रुपये। क्षेत्रीय भत्ता: 55,000 रुपये
बैठक भत्ता: 3,000 रुपये प्रतिदिन। PA भत्ता: 40,000 रुपये।
स्टेशनरी भत्ता: 15,000 रुपये। यानी कुल मिलाकर मासिक औसत आय: 1.40 लाख रुपये से अधिक है। लेकिन MLA की असल ताकत सिर्फ सैलरी में नहीं होती। उन्हें कई महत्वपूर्ण सुविधाएं भी मिलती हैं—
सालाना 4 लाख रुपये तक की मुफ्त यात्रा
सरकारी आवास
सुरक्षा और विशेष मेडिकल सुविधाएं
25 लाख रुपये तक वाहन लोन
पूर्व विधायक होने पर 45,000 रुपये मासिक पेंशन
बिजली–पानी–फोन में विशेष रियायतें
यानी MLA की आय भले ही कम दिखती हो, लेकिन उनके पास सत्ता और सुविधा के साथ प्रतिष्ठा का पूरा पैकेज होता है। तो फिर कौन ज्यादा कमाई करवाता है—गायिकी या राजनीती?अगर सिर्फ पैसों की तुलना करें तो गायिकी की कमाई MLA की तनख्वाह से कई गुना ज्यादा है। एक लाइव शो की फीस ही विधायक की पूरी महीने की सैलरी से अधिक है। लेकिन राजनीति में कमाई का हिसाब सिर्फ पैसों से नहीं होता।
MLA बनने से मिलने वाले बड़े फायदे
राज्य और क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव
समाज में बड़ी प्रतिष्ठा
जनता के बीच बढ़ता संपर्क और लोकप्रियता
भविष्य में मंत्री, सांसद, या बड़े पदों की संभावना
जनसेवा का बड़ा प्लेटफॉर्म
राजनीति में प्रवेश से कला जगत से परे उनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
कमाई के हिसाब से—गायिकी कहीं ज्यादा फायदेमंद है। लेकिन राजनीतिक प्रभाव, प्रतिष्ठा और भविष्य की संभावनाएं—विधायकी को भी उतना ही आकर्षक बनाती हैं। मैथिली ठाकुर के लिए यह सिर्फ आर्थिक सफर नहीं, बल्कि लोकप्रियता से लोकसेवा की ओर बढ़ने का बड़ा कदम है।