धनतेरस पर खरीदारी की चमक, महंगाई के बीच खर्च का गणित।
धनतेरस यानी धन, समृद्धि और शुभ खरीदारी का दिन। बाजारों में सोने-चांदी से लेकर बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। कोई नया वाहन खरीदकर धनतेरस को यादगार बना रहा है, तो कोई परिवार के साथ बाजार में खरीदारी के लिए निकल रहा है। लेकिन इस त्योहार की रौनक के बीच एक सवाल हर वाहन चालक के बजट से जुड़ा है कि क्या इस बार धनतेरस पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से कोई राहत मिली है?
6 नवंबर को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए भाव जारी कर दिए हैं, लेकिन आम उपभोक्ताओं को कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिली है। देश के प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम पहले की तरह बने हुए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये, जबकि डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है। वहीं कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और चेन्नई में 107.76 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में पेट्रोल 116.15 रुपये प्रति लीटर के साथ प्रमुख महानगरों में सबसे महंगा है।
इसका सीधा मतलब है कि धनतेरस पर बाजार जाने, परिवार के साथ घूमने और त्योहार की खरीदारी के लिए वाहन निकालने वालों को ईंधन के खर्च में फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली। एक तरफ बाजार में खरीदारी का उत्साह है, दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल की कीमतें घरेलू बजट का हिसाब बिगाड़ने की चुनौती बनी हुई हैं।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल की कीमतों को लेकर लगातार उतार-चढ़ाव की खबरें आ रही हैं। एक दिन पहले कच्चे तेल में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ता दिखाई दिया। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता ने तेल की कीमतों पर दबाव बना रखा है। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति अहम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करना पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत और सरकारी टैक्स भी पेट्रोल-डीजल के अंतिम दाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में मई 2022 से व्यापक स्थिरता बनी हुई है। तेल कंपनियां रोज सुबह छह बजे कीमतों की समीक्षा करती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव घटने का फायदा हर बार तत्काल उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचता।
धनतेरस का त्योहार आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाला अवसर भी है। वाहन बाजार से लेकर सराफा बाजार और खुदरा कारोबार तक में इस दिन मांग बढ़ती है। ऐसे में ईंधन की कीमतें केवल वाहन चालकों का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि परिवहन, माल ढुलाई और वस्तुओं की लागत से जुड़कर पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
कुल मिलाकर, धनतेरस पर बाजार में धन बरसाने की तैयारी है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर राहत का इंतजार बरकरार है। दीपों का त्योहार खुशियों की रोशनी लेकर आया है, मगर आम आदमी के लिए असली राहत तभी होगी, जब खरीदारी के साथ रोजमर्रा के खर्च का बोझ भी कम होगा। सवाल यही है कि त्योहार की चमक के बीच महंगाई का दबाव कब कम होगा?





