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पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती, लेकिन आम आदमी को नहीं मिलेगी राहत! जानिए सरकार के फैसले का पूरा असर

DigitalDesk by DigitalDesk
May 31, 2026
in बिजनेस
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petrol and diesel prices
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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने तेल क्षेत्र को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद तेल कंपनियों को निर्यात के दौरान कम टैक्स देना होगा। हालांकि, इस घोषणा के बाद आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि फिलहाल ऐसा होने की संभावना नहीं है।

  1. सरकार ने घटाई एक्सपोर्ट ड्यूटी, तेल कंपनियों को बड़ी राहत
  2. पेट्रोल पर 1.50 और डीजल पर 3 रुपये की कटौती
  3. घरेलू कीमतों पर नहीं पड़ेगा कोई सीधा असर
  4. मिडिल ईस्ट संकट के बाद बदली सरकार की रणनीति
  5. एटीएफ पर भी मिली बड़ी टैक्स राहत

सरकार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार 1 जून से पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं डीजल पर यह शुल्क 16.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी पेट्रोल पर 1.50 रुपये और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की राहत तेल कंपनियों को मिलेगी।

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तेल कंपनियों को मिलेगा फायदा

यह कटौती सीधे तौर पर उन तेल कंपनियों को लाभ पहुंचाएगी जो भारत में तैयार पेट्रोल और डीजल का निर्यात करती हैं। पहले निर्यात के दौरान उन्हें अधिक कर देना पड़ता था, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती थी। अब टैक्स कम होने से उनकी लागत घटेगी और निर्यात कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।

सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिति पहले की तुलना में कुछ स्थिर हुई है। मिडिल ईस्ट में तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण पहले सरकार ने निर्यात शुल्क बढ़ाया था ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध रहे।

क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

सरकार के फैसले के बाद आम लोगों को यह उम्मीद थी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आएगी। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह राहत सीधे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचेगी।

इसकी वजह यह है कि सरकार ने केवल एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती की है, जबकि घरेलू स्तर पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी, वैट और अन्य करों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतें मुख्य रूप से इन्हीं करों और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करती हैं।

यानी वाहन चालकों को फिलहाल पेट्रोल और डीजल खरीदते समय पहले जितनी ही कीमत चुकानी होगी।

क्यों लगाया गया था निर्यात शुल्क?

केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में पहली बार पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) लागू किया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि तेल कंपनियां घरेलू बाजार की जरूरतों को नजरअंदाज कर अधिक मात्रा में ईंधन विदेशों में न बेचें। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें काफी ऊंची थीं और कंपनियां निर्यात में ज्यादा लाभ देख रही थीं। ऐसे में सरकार ने निर्यात को नियंत्रित करने और घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया था।

लगातार बदलती रही हैं दरें

पिछले कुछ महीनों में सरकार ने कई बार निर्यात शुल्क की समीक्षा की है। डीजल पर निर्यात शुल्क मार्च में 21.50 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बाद में बढ़ाकर 55.50 रुपये तक किया गया। इसके बाद परिस्थितियों में सुधार होने पर इसे धीरे-धीरे कम किया जाता रहा और अब यह 13.50 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। इसी तरह एटीएफ पर भी कई बार शुल्क में संशोधन किया गया। सरकार का उद्देश्य बाजार की स्थिति के अनुसार कर संरचना को संतुलित बनाए रखना है ताकि कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

एटीएफ पर सबसे ज्यादा राहत

सरकार ने जेट फ्यूल यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर भी बड़ी राहत दी है। पहले एटीएफ के निर्यात पर 16 रुपये प्रति लीटर शुल्क देना पड़ता था, जिसे अब घटाकर 9.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस कटौती से विमानन क्षेत्र को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। साथ ही तेल कंपनियों के लिए निर्यात कारोबार अधिक लाभदायक बन सकता है। पेट्रोल, डीजल और एटीएफ को मिलाकर तेल कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग 11 रुपये प्रति लीटर तक की कर राहत मिली है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है और सरकार घरेलू करों में भी कटौती करती है, तभी आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। फिलहाल यह फैसला मुख्य रूप से तेल कंपनियों को राहत देने और ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती निश्चित रूप से तेल कंपनियों के लिए राहत भरी खबर है। हालांकि इसका सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है। यह फैसला घरेलू बाजार में आपूर्ति और निर्यात के बीच संतुलन बनाने की सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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Tags: #Government reduces export duty #Major relief for oil companies#Major tax cuts on petrol and diesel #oil prices come down #petrol and diesel prices
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