यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी पड़ताल, ‘स्टेट रिव्यू मिशन’ के तहत 16 हजार से अधिक चिकित्सा इकाइयों का निरीक्षण

major investigation into health services in Uttar Pradesh

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने के लिए चलाया जा रहा “स्टेट रिव्यू मिशन” उल्लेखनीय परिणाम देता नजर आ रहा है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण और मूल्यांकन किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, कमियों की पहचान करना और स्वास्थ्य संस्थानों की जवाबदेही तय करना है।

छह माह में 75 जिलों और 18 मंडलों की सघन समीक्षा

16,249 स्वास्थ्य इकाइयों का हुआ भौतिक सत्यापन

मरीजों के फीडबैक से परखी गई जमीनी हकीकत

अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा जनता का भरोसा

अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) Amit Kumar Ghosh के अनुसार मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को उसके घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 29 अक्टूबर 2025 से स्टेट रिव्यू मिशन की शुरुआत की गई थी। पिछले छह महीनों में प्रदेश के सभी 18 मंडलों, 75 जिलों और 826 विकास खंडों में स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक एवं स्वास्थ्य सचिव Dr. Pinky Jowel ने बताया कि प्रदेश की कुल 33,044 चिकित्सा इकाइयों में से 16,249 इकाइयों का भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया गया है, जो कुल इकाइयों का लगभग 49 प्रतिशत है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए 901 मंडलीय और जनपदीय अधिकारियों के साथ 43 राज्य स्तरीय अधिकारियों की टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

निरीक्षण के दौरान 93 जिला अस्पतालों, 861 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), 2,825 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) तथा 12,405 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का स्थलीय मूल्यांकन किया गया। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित 2,661 मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों की भी समीक्षा की गई। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को बारीकी से परखा गया।

इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि निरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए विशेष “फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट” तैयार की गई। इसके माध्यम से अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकीय उपकरणों की स्थिति, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति, एंबुलेंस सेवाओं की कार्यक्षमता और रिकॉर्ड प्रबंधन की जांच की गई। साथ ही निरीक्षण टीमों ने मरीजों और उनके परिजनों से सीधे संवाद कर उनका फीडबैक भी लिया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई मंडलों में मिशन के दूसरे चरण की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। पहले चरण में सामने आई कमियों को दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान मिली जानकारियों के आधार पर संबंधित संस्थानों को सुधारात्मक निर्देश भी जारी किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार निगरानी, नियमित समीक्षा और जवाबदेही तय किए जाने से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। अस्पतालों में व्यवस्थाएं बेहतर हुई हैं, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आया है और मरीजों को पहले की तुलना में अधिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इसका सीधा असर आम जनता के विश्वास पर भी पड़ा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि योगी सरकार की यह पहल केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य स्वास्थ्य तंत्र को अधिक सक्षम, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाना है। इसी वजह से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि स्टेट रिव्यू मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का यह अभियान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगा।

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