ब्रिक्स में पहली बार डिजिटल सेवाओं पर बड़ा फैसला, भारत को मिलेंगे 10 नए बाजार

Major decision on digital services in BRICS for the first time India to gain access to 10 new markets

ब्रिक्स में पहली बार डिजिटल सेवाओं पर बड़ा फैसला, भारत को मिलेंगे 10 नए बाजार

12-13 सितंबर 2026 को दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहली बार सीमा पार डिजिटल सेवाओं के कारोबार को आसान बनाने पर अहम फैसला हो सकता है।  इससे पहले 7 अगस्त को जयपुर में हुई ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक में 4 समझौतों को मंजूरी दी गई थी, इनमें एक सीमा पार डिजिटल सेवाएं सुगम बनाने के ब्रिक्स सिद्धांत भी है। इन्हीं को दिल्ली सम्मेलन में रखा जाएगा।

 

5 मुद्दे जो तय करेंगे भविष्य

1. डेटा:ग्राहक का डेटा दूसरे देश में भेज सकेंगे या वहीं रखना पड़ेगा?

2. प्राइवेसी: देशों के डेटा-सुरक्षा कानूनों में तालमेल कैसे बनेगा?

3. भुगतान:कंपनी को विदेशी ग्राहक से भुगतान कितना आसान होगा?

4. टैक्स: इंटरनेट के जरिए दी गई सेवा पर टैक्स किस देश में लगेगा?

5. योग्यता:भारतीय डॉक्टर, लेखाकार, इंजीनियर या दूसरे पेशेवर की योग्यता दूसरे देश में मान्य होगी या नहीं?

क्या होगा आसान?

अभी तक सामान का व्यापार आसान था, अब सर्विस का होगा। इसके तहत इंटरनेट, ऐप, ईमेल, वीडियो कॉल और डिजिटल मंच के जरिए दूसरे देशों में दी जाने वाली सेवाएं शामिल होंगी। यानी बेंगलुरु की कोई छोटी कंपनी ब्राजील के कारोबारी का सॉफ्टवेयर संभाल सकेगी, और गुरुग्राम का फिनटेक स्टार्टअप यूएई में सेवाएं दे पाएगा। इसमें IT और कारोबारी सेवाओं के अलावा वित्तीय, बीमा, रिसर्च, परामर्श, इंजीनियरिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी डिजिटल तरीके से दी जा सकेंगी।

इसमें भारत की स्थिति सबसे मजबूत

नीति आयोग के मुताबिक 2015 से 2024 के बीच भारत का विदेशों में डिजिटल सेवा कारोबार तीन गुना हो गया।दुनिया में 5वां स्थान: 2024 में भारत ने दूसरे देशों को 269 अरब डॉलर यानी करीब 24 लाख करोड़ रुपये की डिजिटल सेवाएं दीं। भारत का ग्लोबल शेयर 5.8% था। अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड और जर्मनी के बाद भारत 5वें स्थान पर है, चीन छठे पर है।

ब्रिक्स में 48% हिस्सेदारी:

ब्रिक्स देशों की दुनिया में डिजिटल सेवा निर्यात में हिस्सेदारी 14% है। इसमें अकेले भारत की हिस्सेदारी 48% है। – RBI के अनुसार 2023-24 में भारत का सॉफ्टवेयर निर्यात 190.7 अरब डॉलर (17 लाख करोड़) था, इसमें 125.5 अरब डॉलर IT और 50.1 अरब डॉलर BPO सेवाओं से आया।भारत को ब्रिक्स के 10 नए बाजार मिल जाएंगे। कंपनियों को नए बाजार मिले तो सॉफ्टवेयर, प्रबंधन, AI, साइबर सुरक्षा और पेशेवर सेवाओं की मांग बढ़ेगी और नौकरियां भी बढ़ेंगी।

क्या ये EU जैसा बाजार बन जाएगा?

नहीं। EU में सदस्यों के बीच व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा है। ब्रिक्स में भारत, चीन, रूस, ब्राजील जैसे बिल्कुल अलग राजनीतिक, कानूनी व आर्थिक मॉडल वाले देश हैं।

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