महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता दिख रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट की चर्चाओं ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं की ओर से किए गए दावों के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि दूसरी तरफ उद्धव खेमे ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए अपने सांसदों और विधायकों के एकजुट होने का दावा किया है।
सांसदों को लेकर शुरू हुई नई सियासी चर्चा ने बढ़ाई हलचल
हाल के दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि उद्धव ठाकरे के कुछ सांसद लगातार उनके संपर्क में हैं और संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आ सकता है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। हालांकि अभी तक किसी भी सांसद ने सार्वजनिक रूप से दल बदलने की पुष्टि नहीं की है।
मातोश्री की बैठक के बाद बढ़ीं अटकलें और राजनीतिक चर्चाएं
रविवार को उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों के साथ बैठक की, लेकिन इस बैठक के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर और तेज हो गया। बैठक में कुछ सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी खेमे ने सवाल उठाए। वहीं उद्धव गुट के नेताओं ने स्पष्ट किया कि सभी सांसद पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं और कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए थे। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य घटनाक्रम मानने के बजाय संभावित बदलावों के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
शिंदे गुट का दावा, उद्धव खेमे ने किया पूरी तरह खारिज
शिंदे समर्थक नेताओं का कहना है कि कई सांसद और विधायक उनके संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर उद्धव ठाकरे के करीबी नेताओं ने इन दावों को राजनीतिक प्रचार बताया है। उनका कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विरोधी खेमे द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। उद्धव गुट ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह आने वाले समय में राजनीतिक स्तर पर जवाबी रणनीति अपनाएगा।
दलबदल कानून के कारण हर कदम पर टिकी राजनीतिक नजरें
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 सांसद हैं। ऐसे में यदि किसी प्रकार का विभाजन होता है तो दलबदल कानून के प्रावधान अहम भूमिका निभाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी समूह को कानूनी चुनौतियों से बचने के लिए निर्धारित संख्या में सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। यही वजह है कि राजनीतिक गतिविधियों और बैठकों पर सभी दलों की पैनी नजर बनी हुई है।
मॉनसून सत्र से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ सकता है सस्पेंस
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार आने वाले कुछ सप्ताह महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। संसद का मॉनसून सत्र नजदीक है और उससे पहले यदि कोई बड़ा फैसला होता है तो उसका असर राज्य की राजनीति पर भी दिखाई देगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ होगी। तब तक महाराष्ट्र की राजनीति में सस्पेंस और चर्चाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।