भगवान शिव के पवित्र धाम कैलाश मानसरोवर की यात्रा का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए बड़ा दिन आ गया है। वर्ष 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत हो चुकी है और नाथुला मार्ग से जाने वाले यात्रियों का पहला दल सिक्किम की राजधानी गंगटोक पहुंच गया है। देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है। धार्मिक महत्व से भरपूर इस यात्रा को कई लोग अपने जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं।
देश के 12 राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु, पहले दल में 44 यात्रियों को मिला मौका
यात्रा के पहले समूह में कुल 44 श्रद्धालु शामिल हैं, जिनमें 32 पुरुष और 12 महिलाएं हैं। इनके साथ चिकित्सा दल, सहायता कर्मी और संपर्क अधिकारी भी मौजूद हैं। इस जत्थे में बिहार, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा के श्रद्धालु शामिल हैं। सबसे अधिक 11 यात्री दिल्ली से हैं, जबकि महाराष्ट्र से छह श्रद्धालु इस दल का हिस्सा बने हैं।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षित यात्रा के लिए चार दिन का विशेष प्रशिक्षण
कैलाश मानसरोवर यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इसी वजह से यात्रियों के लिए विशेष अनुकूलन कार्यक्रम तैयार किया गया है। गंगटोक पहुंचने के बाद सभी श्रद्धालु चार दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर रुककर मौसम और वातावरण के अनुरूप खुद को ढालेंगे। इस दौरान स्वास्थ्य जांच और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
20 जून को नाथुला दर्रा पार कर तिब्बत में प्रवेश करेगा पहला बैच
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह जत्था 20 जून को नाथुला दर्रे को पार कर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश करेगा। इससे पहले श्रद्धालु हांगू झील का भ्रमण करेंगे। तिब्बत पहुंचने के बाद यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव ग्यांग्जे होगा, जो कैलाश मानसरोवर मार्ग का प्रमुख ट्रांजिट केंद्र माना जाता है। इसके बाद यात्री अपने अंतिम गंतव्य की ओर रवाना होंगे।
इस साल 10 बैचों में पूरी होगी यात्रा, 500 श्रद्धालु करेंगे दर्शन
यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष नाथुला रूट से कुल 10 बैच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाएंगे। प्रत्येक बैच में 50 श्रद्धालुओं को शामिल किया जाएगा। इस तरह पूरे सीजन में लगभग 500 यात्रियों को भगवान शिव के धाम तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। प्रशासन और पर्यटन विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
श्रद्धालुओं ने बताया जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अवसर
गंगटोक पहुंचे यात्रियों ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का माध्यम है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे वर्षों से इस अवसर का इंतजार कर रहे थे और अब उनका सपना साकार होने जा रहा है। भगवान शिव के धाम तक पहुंचने की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही है।