उज्जैन में महाकाल लोक के बाद 20 गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या… अब मध्य प्रदेश के देवस्थलों को भी बड़े धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी
भोपाल/द्वारका… जन्माष्टमी से ठीक पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात के द्वारका पहुंचकर भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन किए… सपत्नीक मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की… लेकिन मुख्यमंत्री का यह दौरा सिर्फ धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रहा… दर्शन के बाद दिए बयान ने मध्य प्रदेश की धार्मिक पर्यटन नीति की बड़ी तस्वीर सामने रख दी…मुख्यमंत्री ने धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को देश के विकास का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए उज्जैन का उदाहरण सामने रखा… उनका दावा है कि श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करीब 20 गुना बढ़ी है और अब सालाना 10 करोड़ से ज्यादा तीर्थयात्री उज्जैन पहुंच रहे हैं…
महाकाल मॉडल… अब दूसरे देवस्थलों पर नजर
मुख्यमंत्री के बयान का सबसे बड़ा संदेश यही है कि मध्य प्रदेश धार्मिक पर्यटन को केवल आस्था से नहीं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़कर देख रहा है… महाकाल लोक के बाद उज्जैन में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या को सरकार एक सफल मॉडल के तौर पर पेश कर रही है… इसी मॉडल की तर्ज पर प्रदेश के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर जोर है… आवागमन आसान हो… ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था हो… सुरक्षा मजबूत हो… मंदिरों के आसपास बुनियादी सुविधाएं विकसित हों… और बढ़ते श्रद्धालुओं के दबाव को संभालने के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो… सरकार का फोकस इन्हीं बिंदुओं पर दिखाई दे रहा है…
द्वारका से उज्जैन तक… धार्मिक पर्यटन का नया कनेक्शन
मुख्यमंत्री ने द्वारकाधीश मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि द्वारका सनातन संस्कृति के चार धामों में प्रमुख तीर्थ है… जन्माष्टमी से ठीक पहले यहां दर्शन को उन्होंने सौभाग्य बताया… लेकिन इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश के देवस्थलों में व्यवस्थाओं को और बेहतर करने की बात भी कही… यानी संदेश साफ है… गुजरात की द्वारका और मध्य प्रदेश का उज्जैन जैसे धार्मिक केंद्र अब सिर्फ तीर्थ नहीं… बड़े पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र भी हैं…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे प्रोजेक्ट्स का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने धार्मिक स्थलों के विकास को व्यापक पर्यटन नीति से जोड़ने की बात कही…
आस्था के साथ रोजगार का गणित
धार्मिक पर्यटन बढ़ता है तो उसका असर सिर्फ मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहता… होटल… होम-स्टे… परिवहन… स्थानीय बाजार… प्रसाद… हस्तशिल्प… भोजन… गाइड और दूसरे सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं… यही वजह है कि मुख्यमंत्री धार्मिक पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दे रहे हैं… सरकार का दावा है कि प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवागमन, ठहरने, सुरक्षा और अधोसंरचना पर तेजी से काम किया जा रहा है…
जन्माष्टमी पर बड़ा सियासी-सांस्कृतिक संदेश
जन्माष्टमी से पहले मुख्यमंत्री का द्वारका पहुंचना और धार्मिक पर्यटन पर जोर देना राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों नजरियों से महत्वपूर्ण है… एक तरफ मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और द्वारकाधीश की नगरी से आस्था का संदेश दिया… वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को विकास के मॉडल से जोड़ने की सरकार की प्राथमिकता भी सामने रखी… अब सवाल यह है कि महाकाल लोक की सफलता के बाद मध्य प्रदेश के दूसरे धार्मिक स्थलों को भी क्या इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा? अगर ऐसा होता है तो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश सिर्फ धार्मिक स्थलों के लिए नहीं… बल्कि बड़े आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट के तौर पर अपनी पहचान मजबूत कर सकता है… यानी… द्वारकाधीश के दरबार से निकला संदेश सिर्फ आस्था का नहीं… मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन के नए रोडमैप का भी संकेत है…