उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की संपत्ति पहली बार सार्वजनिक होने के बाद यह देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। मंदिर समिति ने इस बार केवल दान और आय का ब्योरा ही नहीं, बल्कि अपनी पूरी वित्तीय और अचल संपत्ति का विवरण भी साझा किया है। हाल के दिनों में देश के प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच महाकाल मंदिर का यह कदम पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है। समिति के अनुसार मंदिर के पास सैकड़ों करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट, करोड़ों रुपये नकद, बड़ी मात्रा में सोना-चांदी और लगभग 90 एकड़ जमीन मौजूद है। महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में आई तेज बढ़ोतरी का सीधा असर मंदिर की आय और दान पर भी दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि मंदिर की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है, हालांकि बढ़ती भीड़ के साथ व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
472 करोड़ की एफडी, 16 करोड़ नकद और 90 एकड़ जमीन के साथ मंदिर की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत
मंदिर समिति की ओर से जारी वित्तीय विवरण के अनुसार श्री महाकालेश्वर मंदिर के पास करीब 472 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। यह राशि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया समेत विभिन्न बैंकों में जमा है। इसके अलावा अलग-अलग बैंक खातों में लगभग 16 करोड़ रुपये नकद भी उपलब्ध हैं। समिति के पास करीब 90 एकड़ मूल्यवान भूमि भी है, जिसका उपयोग भविष्य की योजनाओं और मंदिर से जुड़े विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पहली बार मंदिर की चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्तियों का सार्वजनिक ब्योरा सामने आने से लोगों को मंदिर की वास्तविक आर्थिक स्थिति का स्पष्ट अंदाजा मिला है।
सोना-चांदी के भंडार में लगातार बढ़ोतरी, श्रद्धालुओं की आस्था से मजबूत हो रहा मंदिर का खजाना
महाकाल मंदिर को मिलने वाले दान में केवल नकद राशि ही नहीं, बल्कि सोना-चांदी का योगदान भी लगातार बढ़ रहा है। समिति के अनुसार मंदिर के पास 300 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सोना और करीब 20 क्विंटल चांदी मौजूद है। वर्ष 2025 के दौरान श्रद्धालुओं ने मंदिर को लगभग 600 किलोग्राम चांदी और करीब डेढ़ किलोग्राम सोना दान किया। वर्ष 2024 की तुलना में चांदी का दान लगभग 193 किलोग्राम अधिक रहा, जबकि सोने के दान में मामूली कमी दर्ज की गई। इससे साफ है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में उदारतापूर्वक योगदान दे रहे हैं।
महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ी, हर दिन उमड़ रही भारी भीड़
अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 40 से 50 हजार श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब सामान्य दिनों में एक लाख से डेढ़ लाख श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन कर रहे हैं। सप्ताहांत, सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। श्रद्धालुओं की इस बढ़ती भीड़ ने न केवल उज्जैन की अर्थव्यवस्था को गति दी है, बल्कि मंदिर की आय और दान में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।
दान बढ़ा तो खर्च भी बढ़ा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर सालाना 135 करोड़ रुपये तक हो रहा व्यय
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर समिति की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। सुरक्षा, सफाई, भीड़ प्रबंधन, बिजली, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर हर साल बड़ा खर्च किया जा रहा है। समिति के अनुसार वर्तमान में मंदिर का वार्षिक खर्च करीब 135 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यानी जितनी तेजी से आय बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से व्यवस्थाओं पर होने वाला व्यय भी बढ़ रहा है। समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 142 करोड़ रुपये की आय, छह वर्षों में सबसे बेहतर प्रदर्शन दर्ज
मंदिर समिति के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर की कुल आय 142 करोड़ रुपये रही, जो पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक मानी जा रही है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, ऑनलाइन दान, विशेष पूजन और अन्य धार्मिक गतिविधियों से हुई आय का परिणाम है। महाकाल मंदिर आज केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश के सबसे समृद्ध धार्मिक संस्थानों में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। पहली बार सार्वजनिक हुए इस विस्तृत वित्तीय ब्यौरे ने मंदिर की आर्थिक क्षमता और पारदर्शिता दोनों को नई पहचान दी है।