1956 से पहले मध्य प्रदेश कैसा था? चार हिस्सों में बंटा था आज का मध्य प्रदेश…जानें नागपुर से भोपाल तक बदलती रही राजधानी की कहानी

Madhya Pradesh like before 1956 present day state divided into four parts

आज का मध्य प्रदेश एक राज्य है, लेकिन 1 नवंबर 1956 से पहले इसका भूगोल, प्रशासन और राजनीतिक पहचान बिल्कुल अलग थी। आज जिन इलाकों को हम मध्य प्रदेश का हिस्सा मानते हैं, वे कभी अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों और रियासतों में बंटे हुए थे। कहीं अंग्रेजों का शासन था, कहीं सिंधिया और होलकर जैसे राजघरानों का प्रभाव, तो कहीं नवाबों की हुकूमत। आजादी के बाद राज्यों के पुनर्गठन ने इन बिखरे हुए इलाकों को एक प्रशासनिक पहचान दी और इसी प्रक्रिया से आधुनिक मध्य प्रदेश का जन्म हुआ।

  1. चार राज्यों से बना मध्य प्रदेश, जानिए 1956 की पूरी कहानी

  2. कभी नागपुर थी राजधानी, कैसे भोपाल बना मध्य प्रदेश का केंद्र?

  3. आजादी के बाद ऐसा था मध्य प्रदेश, जानिए इतिहास के अनसुने पन्ने

  4. सिंधिया, होलकर और नवाबों की रियासतों से बना मध्य प्रदेश

आजादी के समय चार प्रमुख प्रशासनिक इकाइयां

1947 में भारत की आजादी के समय वर्तमान मध्य प्रदेश का भूभाग मुख्य रूप से चार प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित था। इन्हें समझना मध्य प्रदेश के इतिहास को समझने की पहली सीढ़ी है।

1. मध्य प्रदेश – नागपुर से भोपाल तक का सफर

पहला हिस्सा – मध्य प्रदेश (पुराना मध्य प्रदेश):

यह तत्कालीन सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार से बना राज्य था। इसकी राजधानी नागपुर थी। इसमें महाकौशल और छत्तीसगढ़ के बड़े इलाके शामिल थे। 1956 में इसका मराठी भाषी विदर्भ क्षेत्र नए बंबई राज्य में चला गया।

दूसरा हिस्सा – मध्य भारत:

इस क्षेत्र में ग्वालियर और इंदौर सहित कई पूर्व रियासतें शामिल थीं। सिंधिया और होलकर राजघरानों का यहां ऐतिहासिक प्रभाव था। ग्वालियर और इंदौर इस क्षेत्र के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र थे।

तीसरा हिस्सा – विंध्य प्रदेश:

रीवा इसकी राजधानी थी। इसमें बुंदेलखंड और बघेलखंड की कई रियासतों को मिलाकर प्रशासनिक इकाई बनाई गई थी। रीवा के साथ सतना, सीधी और पन्ना जैसे इलाके इस क्षेत्र की पहचान थे।

चौथा हिस्सा – भोपाल राज्य:

आजादी के समय भोपाल एक अलग रियासती राज्य था। यहां नवाब हमीदुल्ला खान का शासन था। 1949 में भोपाल का भारतीय संघ में विलय हुआ और इसके बाद यह केंद्र शासित प्रशासन वाली पार्ट-C इकाई बना।

इन चारों क्षेत्रों की अपनी अलग प्रशासनिक व्यवस्था, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक पहचान थी।

2. एक नवंबर 1956: जब चार हिस्से मिलकर बना मध्य प्रदेश

आजादी के बाद देश में राज्यों की सीमाओं को लेकर व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई। भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग तेज हुई। इसी क्रम में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर संसद ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 बनाया।

एक नवंबर 1956 को ऐतिहासिक बदलाव हुआ।

इन क्षेत्रों को मिलाकर नए मध्य प्रदेश का गठन किया गया। राजस्थान के सिरोंज उपखंड को भी नए मध्य प्रदेश में शामिल किया गया।

वहीं पुराने मध्य प्रदेश के विदर्भ क्षेत्र को बंबई राज्य में स्थानांतरित कर दिया गया।

3. एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य: विंध्य प्रदेश पार्ट-C नहीं, पार्ट-B था

इतिहास को समझते समय एक तथ्य का ध्यान रखना जरूरी है।

1950 में संविधान लागू होने के बाद राज्यों को पार्ट-A, पार्ट-B और पार्ट-C में बांटा गया था।

श्रेणी मध्य प्रदेश के क्षेत्र
पार्ट-A पुराना मध्य प्रदेश
पार्ट-B मध्य भारत और विंध्य प्रदेश
पार्ट-C भोपाल

इसलिए विंध्य प्रदेश को पार्ट-C कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा। भोपाल पार्ट-C राज्य था।

4. भोपाल कैसे बना मध्य प्रदेश की राजधानी?

यह भी इतिहास का दिलचस्प पहलू है। 1956 में नए मध्य प्रदेश के गठन के बाद भोपाल को राजधानी बनाया गया। इससे पहले नागपुर पुराने मध्य प्रदेश की राजधानी हुआ करता था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इतिहास के अनुसार, नए राज्य के गठन के समय नागपुर उच्च न्यायालय को ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का दर्जा मिला और उसकी मुख्य पीठ जबलपुर में स्थापित हुई।

5. फिर 2000 में एक और बड़ा बदलाव

मध्य प्रदेश का भूगोल 1956 के बाद भी स्थायी नहीं रहा। एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना। इसके साथ मध्य प्रदेश का क्षेत्रफल और प्रशासनिक स्वरूप एक बार फिर बदल गया।

6. मध्य प्रदेश का इतिहास एक नजर में

आज का मध्य प्रदेश केवल नक्शे पर खींची गई सीमाओं का परिणाम नहीं है। इसके पीछे रियासतों का इतिहास, अंग्रेजों का प्रशासन, आजादी के बाद का राजनीतिक एकीकरण और राज्यों के पुनर्गठन की लंबी कहानी है। नागपुर से भोपाल तक का सफर मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान के निर्माण की कहानी है।

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