सात दशक का सफर… रियासतों के एकीकरण से आधुनिक मध्यप्रदेश के निर्माण तक की कहानी। नर्मदा की कलकल धारा, महाकाल की नगरी, खजुराहो की कला और जनजातीय संस्कृति की विरासत। यह प्रदेश सिर्फ भारत के नक्शे का एक हिस्सा नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और संभावनाओं की जीवंत पहचान है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए मध्यप्रदेश ने सात दशकों में विकास के अनेक पड़ाव पार किए हैं। अब स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समृद्ध किसान, सशक्त युवा, आत्मनिर्भर महिला और विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प सामने रखा है। आखिर कैसा होगा आने वाले वर्षों का मध्यप्रदेश? देखिए यह विशेष रिपोर्ट।
-
सात दशक का सफर, नए मध्यप्रदेश का संकल्प
-
विरासत का गौरव, विकास का नया अध्याय
-
किसान से युवा तक, विकास का रोडमैप
-
मोहन यादव का विकसित मध्यप्रदेश विजन
-
गौरवशाली अतीत, समृद्ध भविष्य की तैयारी
-
सात दशक में कितना बदला मध्यप्रदेश?
-
समृद्ध किसान, सशक्त युवा, आत्मनिर्भर प्रदेश
एक नवंबर… मध्यप्रदेश के इतिहास का गौरवशाली दिन। सात दशक पहले अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों और रियासतों को मिलाकर एक नए प्रदेश का निर्माण हुआ। नागपुर से भोपाल तक का सफर तय करते हुए मध्यप्रदेश ने अपनी अलग पहचान बनाई। महाकाल की नगरी उज्जैन, मां नर्मदा की जीवनदायिनी धारा, सांची का विश्व प्रसिद्ध स्तूप, खजुराहो की अद्भुत स्थापत्य कला और भीमबेटका की प्राचीन विरासत। प्राकृतिक संपदा से लेकर सांस्कृतिक वैभव तक मध्यप्रदेश के पास ऐसा खजाना है, जो उसे देश के दूसरे राज्यों से अलग पहचान देता है।
- 1 नवंबर 1956… मध्यप्रदेश का गठन
- सात दशक… गौरव और विकास का सफर
- नागपुर से भोपाल तक राजधानी की कहानी
- विरासत भी… विकास भी… भविष्य भी
किसान कल्याण वर्ष
इस बार स्थापना दिवस का मूल मंत्र है… समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्पष्ट संदेश है कि किसान की खुशहाली ही प्रदेश की आर्थिक मजबूती का आधार है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार का जोर है। खेती के साथ दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी को जोड़कर किसानों की आमदनी के नए रास्ते तैयार करने का संकल्प है।
- किसान समृद्ध तो प्रदेश समृद्ध
- खेती को तकनीक से जोड़ने का संकल्प
- कृषि से उद्योग तक नई संभावनाएं
- गांवों की खुशहाली… प्रदेश की ताकत
युवा शक्ति और रोजगार
विकसित मध्यप्रदेश की अगली तस्वीर युवाओं के सपनों से बनेगी। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना है। कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों पर जोर दिया जा रहा है। खेल अधोसंरचना के विस्तार से प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की तैयारी है। स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देकर कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और विनिर्माण के क्षेत्र में नवाचार को नई उड़ान देने की परिकल्पना है।
- युवा शक्ति… विकसित मध्यप्रदेश
- नौकरी पाने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा
- स्टार्टअप से आत्मनिर्भरता की नई राह
- प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच
महिला सशक्तिकरण और शिक्षा
विकास की इस यात्रा में आधी आबादी की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है। स्व-सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में सांदीपनि विद्यालयों की परिकल्पना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार की सोच है कि गांव हो या शहर, हर बच्चे को बेहतर शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
- महिला शक्ति बनेगी विकास की भागीदार
- आत्मनिर्भर नारी… सशक्त परिवार
- सांदीपनि विद्यालयों से शिक्षा को नई दिशा
- गांव-शहर के बच्चों को समान अवसर
सुशासन, सुरक्षा और स्वास्थ्य
विकसित प्रदेश की पहचान सिर्फ बड़ी परियोजनाओं से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में आने वाले बदलाव से होती है। कानून व्यवस्था को मजबूत करना, पुलिस का आधुनिकीकरण, तकनीक आधारित प्रशासन और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के जरिए सरकारी प्रक्रियाओं को सरल और प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने की बात कही गई है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, मेडिकल कॉलेज, आधुनिक अस्पताल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर उपचार पहुंचाना भी विकास के इस संकल्प का हिस्सा है।
- सुरक्षित प्रदेश… निवेश का बेहतर वातावरण
- सुशासन से जनता का विश्वास
- सरल प्रशासन… समयबद्ध समाधान
- हर नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मध्यप्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन की भी अहम भूमिका है। सरकार पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण, नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन और गोवंश संरक्षण पर जोर दे रही है। मकसद साफ है… खेती के साथ पशुपालन को भी आय का मजबूत आधार बनाया जाए। किसान और पशुपालक आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तो गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
सात दशक पहले एक प्रशासनिक इकाई के रूप में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का सफर आज नई आकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। गौरवशाली इतिहास इसकी पहचान है, विकास की कोशिशें वर्तमान की तस्वीर हैं और आत्मनिर्भरता, समृद्धि तथा सुशासन भविष्य का लक्ष्य। स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश भी इसी दिशा में है… विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर मिले। विरासत पर गर्व… विकास पर विश्वास… और समृद्ध भविष्य का संकल्प। यही है नए मध्यप्रदेश की परिकल्पना। एक नवंबर को स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश एक बार फिर अपने गौरवशाली अतीत के साथ विकसित भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का संकल्प ले रहा है।