महिला सशक्तिकरण: मिट्टी से जुड़ा हौसला बना पहचान… पूजा माहौरे की सफलता की कहानी..इस तरह बनीं महिलाओं के लिए मिसाल

Rohana Kalan woman farmer Pooja Mahore

मिट्टी से जुड़ा हौसला बना पहचान: पूजा माहौरे की सफलता की कहानी

कहते हैं कि जब मेहनत सही दिशा में हो, तो मुश्किल हालात भी सफलता की कहानी बन जाते हैं। पूजा माहौरे ने इसे सच कर दिखाया है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के छोटे से गांव रोहनाकला की यह महिला किसान आज प्राकृतिक खेती के जरिए आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और हर महीने करीब 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

जब खेती बन गई थी बोझ

करीब 10 एकड़ जमीन की मालिक पूजा माहौरे पहले पारंपरिक खेती करती थीं।

  • रासायनिक खाद और कीटनाशकों का बढ़ता खर्च
  • मिट्टी की घटती उर्वरता
  • लगातार कम होता मुनाफा

इन सबने खेती को मुनाफे के बजाय चिंता का कारण बना दिया था।

प्रशिक्षण ने बदल दी दिशा

परिस्थितियां तब बदलीं जब उन्हें आत्मा परियोजना के तहत “कृषि सखी” बनने का मौका मिला।

साथ ही नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिसमें उन्होंने सीखा:

  • बीजामृत
  • जीवामृत
  • पंचगव्य
  • प्राकृतिक कीटनाशक (निर्मास्त्र, ब्रह्मास्त्र)

यहीं से उनकी खेती की नई शुरुआत हुई।

प्राकृतिक खेती से बदली तस्वीर

आज पूजा माहौरे अपने खेत के एक हिस्से में पूरी तरह रसायन मुक्त सब्जियों की खेती कर रही हैं।

  • जैविक उत्पादों की बाजार में ज्यादा मांग
  • हाट-बाजार में सीधे बिक्री
  • करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध लाभ

कम लागत और ज्यादा मुनाफे का यह मॉडल अब उनके लिए स्थायी आय का जरिया बन चुका है।

पशुपालन से बढ़ी आय

खेती के साथ उन्होंने पशुपालन को भी जोड़ा।

  • गिर और साहीवाल नस्ल की 10 गायों का पालन
  • दूध बिक्री से करीब 30 हजार रुपये मासिक आय

खेती + पशुपालन = 40 हजार रुपये अतिरिक्त आय प्रति माह

मेहनत को मिला सम्मान

कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत आयोजित मिलेट मेले में उनकी जैविक सब्जियों को खूब सराहना मिली।

  • कृषि विभाग द्वारा सम्मानित
  • प्रमाण पत्र से नवाजा गया

यह सम्मान उनकी मेहनत की आधिकारिक पहचान बना।

महिलाओं के लिए बनी मिसाल

आज पूजा माहौरे सिर्फ किसान नहीं, बल्कि प्रेरणा बन चुकी हैं।

  • आसपास की महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं
  • प्राकृतिक खेती के फायदे समझाती हैं
  • आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं

पूजा माहौरे की कहानी यह साबित करती है कि  खेती में बदलाव ही भविष्य है कम लागत वाली प्राकृतिक खेती ही टिकाऊ समाधान है मिट्टी से जुड़ा उनका हौसला आज उनकी पहचान बन चुका है—और हजारों किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण भी।

Exit mobile version