इस साल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नेतृत्व में लाल सेना के लांग मार्च की विजय
की 90वीं वर्षगांठ है। लांग मार्च मानव के सैन्य इतिहास में एक करिश्मा है और चीनी क्रांति
में एक शाश्वत स्मारक है। लाल सेना के अधिकारियों और जवानों ने अपने प्राण और खून से
जो लांग मार्च भावना ढाली, वह चीनी लोगों की अनमोल आध्यात्मिक संपत्ति है और आज
तक देश में प्रासंगिक है।
लांग मार्च की शुरुआत अक्तूबर 1934 में हुई। उस समय चीन दूसरे गृह क्रांतिकारी युद्ध में
था। “वामपंथी”रूढ़िवाद के गलत नेतृत्व में केंद्रीय लाल सेना क्वोमिनतांग पार्टी की सेना का
पांचवां घेरा तोड़ने में विफल रही और उसे दक्षिण चीन में स्थित केंद्रीय क्रांतिकारी अड्डे से
रवाना होकर रणनीतिक स्थानांतरण करना पड़ा। जनवरी 1935 में त्सुनयी शहर पर कब्जा
करने के बाद सीपीसी पोलित ब्यूरो ने एक बैठक बुलायी, जिसमें “वामपंथी”रूढ़िवाद के नेतृत्व
का अंत किया गया और पार्टी तथा सेना में माओ त्सेतुंग का नेतृत्वकारी स्थान बहाल किया
गया। यह बैठक चीनी क्रांति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ थी, जिसने सीपीसी और लाल
सेना को बचाने का काम किया।इसके बाद लाल सेना विजय के रास्ते पर चलने लगी।
अक्तूबर 1935 में केंद्रीय लाल सेना ने उत्तर पश्चिमी चीन के शैनशी प्रांत के उत्तरी भाग
पहुंचकर रणनीतिक स्थानांतरण पूरा किया, जिसने 12,500 किमी. का लंबा रास्ता तय किया।
केंद्रीय लाल सेना के लांग मार्च की शुरुआत के बाद अन्य क्रांतिकारी अड्डों में स्थित रेड
25वीं आर्मी, चौथी फ्रंट आर्मी और दूसरी फ्रंट आर्मी ने भी अलग अलग तौर पर लांग मार्च
आरंभ किया। अक्तूबर 1936 में लाल सेना की मुख्य शक्तियों का उत्तर पश्चिमी चीन में
सफल मिलन हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि लाल सेना का लांग मार्च सफलता से
संपन्न हुआ।
दो साल के लांग मार्च में लाल सेना ने दुश्मनों के साथ 600 से अधिक बार लड़ाई लड़ी और
क्वोमिनतांग पार्टी के लाखों सैनिकों के घेरने और पीछा करने को नाकाम किया। इस दौरान
लाल सेना ने सौ से अधिक नदियां पार कीं और 20 से अधिक बर्फ ढ़की 4000 मीटर से
अधिक ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ाई की और “मौत के ट्रेप” के रूप में मशहूर कई सौ किलोमीटर
लंबे सुंगपान घास मैदान को पार किया। लाल सेना पैदल से कुल 14 प्रांतों से गुजरी। लांग
मार्च की शुरुआत में लाल सेना के सैनिकों की संख्या लगभग 1 लाख 86 हजार थी, जबकि
लांग मार्च पूरा करने के समय सैनिकों की संख्या करीब 50 हजार रही। लांग मार्च में असंख्य वीरतापूर्ण और प्रभावकारी कहानियां हुईं। मसलन लाल सेना के 22 वीरों
ने गोलियों की बरसात में लोहे चेन का सहारा लेकर ब्रिज डेक के बिना झूला पुल पार कर
ब्रिजहेड में स्थित दुश्मनों को खदेड़ा, जिसने खतरनाक स्थान में फंसी लाल सेना के लिए
उबरने का रास्ता खोला। घास का मैदान पार करने में एक जवान ने गंभीर चोट और
कमजोरी के कारण जीवन के अंत से पहले क्रांति में अपना अंतिम और महत्वपूर्ण योगदान
दिया। जब लाल सेना आपा क्षेत्र पार कर रही थी, वहां के तिब्बती और यी समेत विभिन्न
जातियों के लोगों ने दो लाख से अधिक याक और बड़ी मात्रा में अनाज की सप्लाई की, जिसे
माओ त्सेतुंग ने याक क्रांति बताया। ये कहानियां लांग मार्च भावना का जीवंत प्रतिबिंब हैं।
लांग मार्च भावना का मर्म मुख्य तौर पर पांच पहलुओं को कवर करता है। वे हैं सुदृढ़ आदर्श
और विश्वास, निर्भीकता, स्वतंत्रता, व्यापक हित को ध्यान में रखना तथा सख्त अनुशासन,
जन-जुड़ाव।
नब्बे साल के बाद आज का चीन नये युग में दाखिल हो चुका है, लेकिन लांग मार्च भावना
बरकरार है, जो चीनी लोगों के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा और शक्ति का स्रोत है। नये युग
में चीन का लक्ष्य वर्ष 2049 यानी चीन लोक गणराज्य की सौवीं वर्षगांठ तक शक्तिशाली
समाजवादी देश का निर्माण पूरा करना है और चीनी शैली के आधुनिकीकरण से चीनी राष्ट्र
का महान पुनरुत्थान साकार करना है। यह महान लक्ष्य पूरा करने का रास्ता समतल नहीं
होगा, जो चुनौतियों और कठिनाइयों से भरा हुआ होगा। क्योंकि चीन एक बड़ी आबादी वाला
देश है और विभिन्न क्षेत्रों की स्थितियों में बड़ा फर्क मौजूद है। खास बात है कि चीन सभी
लोगों की समान समृद्धि का अनुसरण करता है। उधर अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति में अभूतपूर्व
बदलाव हो रहा है, विभिन्न शक्तियों का मुकाबला तीव्र हो रहा है और अस्थिर तथा
अनिश्चित तत्व स्पष्ट रूप से बढ़ रहे हैं। मानव समुदाय चौराहे पर आकर खड़ा है। ऐसी
पृष्ठभूमि में आधुनिक चीन के लिए लांग मार्च भावना का प्रचार कर समान आदर्श और
विश्वास पर जोर देना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे विभिन्न जातियों की एकजुटता को
मजबूती मिलेगी और संयुक्त दमदार शक्ति बन जाएगी। अन्यथा सामाजिक मूल्यदर्शन में
गड़बड़ी होगी, विभिन्न समुदायों के हितों का ताल मेल करना काफी मुश्किल होगा और देश
की समरसता कमजोर होगी।
नये युग के अभियान में चीन सुधार और विकास बढ़ाने के भारी कार्यों, हाई एंड
मैन्यूफैक्चरिंग में चिप्स, ईवीसी, मशीन टूल्स, नयी पदार्थों आदि व्यवसायों और कुछ बुनियादी
वैज्ञानिक अनुसंधान में दूसरों से स्ट्रेंगलहोल्ड करने, भ्रष्टाचार का विरोध और विभिन्न तरह के
बाहरी प्रहार व कुप्रभाव का सामना कर रहा है, जो लांग मार्च में दुर्गम दर्रे की तरह है। इस
दुर्गम दर्रे को पास करने के लिए चीन को लांग मार्च की भावना संजोए रखकर साहस के
साथ इन सवालों का सामना कर अपनी ठोस स्थिति के मुताबिक एकजुटता से संघर्ष करना होगा।
नये युग के अभियान में लांग मार्च की भावना का पालन कर जनता के साथ घनिष्ठ जुड़ाव
करना चीन के लिए कुंजीभूत बात भी है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कई बार बल दिया
कि देश तो जनता है और जनता ही देश है। चीनी शैली का आधुनिकीकरण जन केंद्रित
आधुनीकरण है। बेहतर जीवन के प्रति जन आकांक्षा पूरी करना चीनी आधुनिकीकरण का
प्रस्थान बिंदु और अंतिम लक्ष्य है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)