अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं. तीसरे मोर्चे की चर्चाओं के बीच ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने नया मोर्चा बना लिया है. खास बात यह है कि इसमें कांग्रेस को एंट्री नहीं दी जाएगी। वहीं बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक इस मोर्चे से जुड़े रहेंगे.
यूपी में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में 42 सीटें हैं।
कांग्रेस के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इसके बाद अखिलेश ने कहा कि भगवा खेमे को हराने के लिए सपा टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
टीएमसी और सपा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से हाथ मिलाने से क्यों कतराती हैं? इसे समझना मुश्किल नहीं है।
कांग्रेस को क्यों रखा दूर
कांग्रेस ने मेघालय में चुनाव प्रचार के दौरान टीएमसी पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगाया था।
मेघालय विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कांग्रेस और टीएमसी के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई थी, जहां कांग्रेस ने टीएमसी पर भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस का कहना है कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ समान विचारधारा वाले दलों के विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करेगी। लेकिन कुछ विपक्षी दल इससे खुश नहीं हैं।
टीएमसी के सूत्रों ने कहा कि यादव के साथ बैठक के दौरान ममता ने मेघालय चुनाव लड़ने के लिए उनकी पार्टी की आलोचना करने पर कांग्रेस पर असंतोष व्यक्त किया और यह स्पष्ट कर दिया कि वह कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल नहीं होंगी।
विपक्षी एकजुटता हो सकती है कमजोर
अखिलेश और ममता बेनर्जी की मुलाकात भले ही दोनों दल पॉजिटीव नतीजे वाली बता रहें हों लेकिन इससे विपक्षी एकता को खतरा हो सकता है। विपक्ष लगातार एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। एक और के तेलंगाना मुख्यमंत्री अपने दल को दिल्ली में बढ़ा रहे हैं वहीं नीतिश कुमार खुद को पीएम मटेरियल बता रहे हैं। ऐसे में अखिलेश और ममता की मुलाकात नए राजनैतिक समीकरणों को बता रही है। कहीं न कहीं सारे घटनाक्रम से विपक्षी एकता ठंडे बस्ते में दिखाई दे रही है।