लोकसभा चुनाव का मतदान की ओर चौथ कदम बढ़ गया है। चौथे चरण में आज मंगलवार को देश की 96 लोकसभा सीटों पर मतदाताओं की कतार सुबह 7 बजे से ही लगना शुरू हो गई है। इस चौथे चरण में 10 राज्यों की 96 सीटों पर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए और I.N.D.I.A महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर है लेकिन इस चरण में असली परीक्षा सियासी चौधरी बनने वाले नेताओं की हो रही है। जिसमें केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से लेकर नित्यानंद राय और अजय मिश्र टेनी सहित मोदी सरकार के पांच मंत्रियों की साथ भी दाव पर लगी हुई है। वहीं दूसरी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव से लेकर जदयू के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन यानी लल्लन सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की अग्निपरीक्षा भी आज हो रही है। वही वही एआइएमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी टीएमसी के प्रत्याशी और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, अभिरंजन चौधरी जैसे नेताओं के सामने अपना घर बचाने की चुनौती है।
हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी के सामने बीजेपी की माधवी लता चुनौती बनी हुई है तो बहरामपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अधीररंजन चौधरी के सामने TMC के यूसुफ पठान बोलिंग करते नजर आ रहे हैं। चौथे चरण की इन हाई प्रोफाइल सीटों पर देश भर के सियासत दलों की नजर लगी हुई है।
पहले बात करेंगे UP की कन्नौज सीट की जहां सुब्रत पाठक बनाम अखिलेश यादव मुकाबला है
समाजवादी पार्टी प्रमुख यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव इस बार कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। कन्नौज सीट यादव परिवार की गढ़ मानी जाती है जहां उनका हारना इस बार असंभव सा लग रहा है लेकिन बीजेपी के सुब्रत पाठक भी दूसरी बार कन्नौज से ही मैदान में है। जहां कन्नौज में पिछली बार 2019 में सुब्रत पाठक ने अखिलेश यादव की वाइफ डिंपल यादव को चुनाव में परास्त किया था। यही वजह है कि अखिलेश एक बार फिर से कन्नौज सीट पर उतरे हैं और बीजेपी को चुनौती देते नजर आ रहे हैं लेकिन यहां बसपा ने भी इमरान बिन जफर को मैदान में उठाकर मामले में थोड़ा सा ट्वीट घोल दिया दिया है और कन्नौज सीट इस बार कांटे की टक्कर में फंसी हुई है।
:दूसरी बड़ी सीट है बेगूसराय जहां गिरिराज सिंह के सामने की से अवधेश कुमार राय चुनावी चुनौती देते नजर आ रहे हैं तो बसपा ने चंदन कुमार दास को मैदान में उतार दिया है। बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट भी कांटे के मुकाबले में फंसी है। 2019 के चुनाव में गिरिराज सिंह ने कन्हैया कुमार को प्राप्त कर संसद की सीढ़ी चढ़ी थी। इस बार गठबंधन के तहत यह सीट लेफ्ट पार्टी को मिली है और अवधेश कुमार रूप में गठबंधन में भूमिहारग दांव खेल है। जिनका समर्थन RJD और कांग्रेस दोनों कर रहे हैं। लोकसभा सीट का सियासी समीकरण समीकरण देखें तो यहां भूमिहार, मुस्लिम और दलित वोट काफी अहम माने जाते हैं।
हैदराबाद में ओबीसी के सामने माधवी लता बनी चुनौती
हैदराबाद को देश की सबसे हाई प्रोफाइल सीट में शामिल किया जाता है। यहां एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी एक बार फिर से इस सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। बीजेपी ने उनके खिलाफ जमीन से जुड़ी हुई अपनी नेता माधवी लता को चुनाव मैदान में उतारा है तो कांग्रेस से यहां मोहम्मद अल्लाह समीर और बरस से श्रीनिवास प्रत्याशी है। बसपा ने यहां कृष्ण को चुनाव में उतारा है जो सियासी किस्मत आजमा रहे हैं । बता दे हैदराबाद लोकसभा सीट पर 2004 से ओबीसी का कब्जा है। इससे पहले उनके पिता यहां छह बार सांसद रह चुके हैं। इस तरह ओबीसी के लिए यह सीट काफी मजबूत मानी जाती रही है लेकिन बीजेपी ने इस बार कांटे का की टक्कर बना दिया है।
उजियारपुर में नित्यानंद वर्सेस आलोक मेहता
बिहार की उजियार लोक सभा सीट से इस बार भी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय चुनावी मैदान में उतरे हैं। वह तीसरी बार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं ।राजद ने नित्यानंद राय के खिलाफ आलोक कुमार मेहता को मैदान में उतारा है। वह बसपा से मोहन कुमार मौर्य चुनौती दे रहे हैं। नित्यानंद बीजेपी के यादव चेहरा बिहार में माने जाते हैं। वहीं राजद ने सीट पर कब्जा करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। लाल यादव ने जिस तरह से उजियार और सीट से अपने करीबी को मैदान में उतारा है। उसके चलते यहां मुकाबला रोचक हो गया है।वैसे बीजेपी के लिए यह सीट मजबूत मानी जाती है।
लखीमपुर खीरी में अजय मिश्र टेनी के लिए टेंशन
यूपी की लखीमपुर खीरी लोकसभा सीट पिछले चुनाव में भी चर्चा में रही थी। इस बार फिर सुर्खियों में है।यहां केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा तेली तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरे उनके खिलाफ समाजवादी पार्टी के उत्कर्ष वर्मा मधुर और बीएसपी के प्रत्याशी चुनाव मैदान में नजर आ रहे हैं बीजेपी 2019 और 14 में मोदी लहर के चलते यह सीट जीतने में कामयाब रही थी लेकिन इस बार मुकाबला टक्कर का है दरअसल टनी मिश्रा के बेटे पर किसानों को कार से कुचलना का आरोप है। इसी मामले को लेकर विपक्ष अक्सर अन्य मिश्रा पर निशाना साथ आ रहा है।समाजवादी पार्टी ने मिश्रा के लिए इस बार कड़ी चुनौती पेश कर दी है।
बहरामपुर में अधीर के सामने यूसुफ पठान की बोलिंग
पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को टीएमसी के क्रिकेटर प्रत्याशी यूसुफ पठान चुनौती दे रहे हैं । बीजेपी ने निर्मल कुमार साह पर दाँव लगाकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया है। बता दे मोदी लहर में भी कांग्रेस बहरामपुर को जीतने में सफल रही थी जहां टीएमसी और बीजेपी अभी तक उनके सामने चुनौती नहीं पेश कर सकी थी लेकिन इस बार ममता बनर्जी ने मुस्लिम दाव खेलकर यूसुफ पठान को चुनाव मैदान में उतार दिया है।
कृष्णा नगर सीट पर महुआ बनाम अमृता की जंग
पश्चिम बंगाल की ही कृष्णा नगर सीट पर टीएमसी की उम्मीदवार महुआ मोइत्रा तीसरी बार चुनाव मैदान में है। बीजेपी ने उनके सामने राजा कृष्ण चंद्र राय के परिवार की सदस्य अमृता राय को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनौती पेश की है तो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सवादी ने SM साहा को चुनाव मैदान में उतारा है। टीएमसी की फायर ब्रांड नेता महुआ मोइत्रा की सदस्यता पिछले साल लोकसभा स्पीकर ने खत्म कर दी थी क्योंकि उन पर पैसा लेकर सवाल पूछने का आरोप लगा था। टीएमसी ने एक बार फिर महुआ मोइत्रा पर दाव खेला है लेकिन बीजेपी और लेफ्ट यहां महुआ को त्रिकोणीय मुकाबले में फंसती नजर आ रही हैंl
आसनसोल में शत्रुघ्न के सामने अहलूवालिया
पश्चिम बंगाल की आसनसोल भी चर्चा में है। यहां से मौजूद भाजपा के सांसद और पूर्व भाजपा नेता के बीच चक्कर है। बता दे शत्रुघ्न सिन्हा पहले बीजेपी में हुआ करते थे जो आजकल टीएमसी में है और टीएमसी के टिकट पर चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ भाजपा ने एसएस अहलूवालिया को चुनाव मैदान में उतारा है। CPI ने जहां आरा खान तो बसपा ने सनी कुमार साहब पर चुनावी दाव खेला है। 2019 में मोदी लहर बीजेपी के टिकट पर बाबुल सुप्रियो ने यहां से जीत दर्ज की थी। हालांकि उसके बाद बाबुल सुप्रियो टीएमसी में शामिल हो गए लेकिन इस बार ममता बनर्जी ने शत्रुघ्न सिन्हा दांव खेला है।
बीड़ में पंकज और बजरंग की जंग
महाराष्ट्र की बीड़ लोकसभा सीट हाई प्रोफाइल सीट मानी जाती है। यहां से बीजेपी ने पंकजा मुंडे को चुनाव मैदान में उतारा है तो NCP शरद पवार गुट ने बजरंगबली और बसपा ने सिद्धार्थ राजेंद्र टाकणकर को चुनाव मैदान में उतारा है। बता दे 2014 में गोपीनाथ मुंडे ने यहां जीत हासिल की थी लेकिन इसके बाद उनका निधन हो गया। जिसके चलते उनकी बेटी पंकजा मुंडे यहां से चुनकर आई। 2019 में भी बीजेपी ने पंकजा मुंडे की बहन का टिकट काटकर उन पर भरोसा जताया था। इस बार एनसीपी ने एक मजबूत प्रत्याशी उतारा है जिसके चलते यहां भी मामला भाजपा के लिए खस्ता नजर आ रहा है।
वर्धमान में क्रिकेटर कीर्ति आजाद बनाम दिलीप घोष
वर्धमान लोकसभा सीट की बात करें तो यहां मुकाबला कांटे का हो चला है। इस सीट पर क्रिकेटर कीर्ति आजाद पीएमसी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे हैं। जिनके खिलाफ भाजपा ने दिलीप घोष को चुनाव मैदान में उतारा है तो बसपा के टिकट पर प्रभुनाथ शाह और CPI की स्वीकृति घोषाल भी चुनाव मैदान में खड़ी हुई है। इस सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई मानी जा रही है। बीजेपी के दिलीप घोष ने यहां मुकाबला रोचक बना दिया है।





