मध्यप्रदेश की झोली प्राकृतिक संसाधनों से भरने जा रही है। छतरपुर और दमोह जिलों में कोलबेड मीथेन (CBM) गैस के बड़े भंडार की खोज हुई है, जिससे राज्य को आर्थिक, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र में जबरदस्त लाभ मिलने की उम्मीद है। इस खोज में केंद्र सरकार का सहयोग और ओएनजीसी (ONGC) को खनन का जिम्मा सौंपा गया है। कंपनी को 462 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए प्रोविजनल लीज भी दी जा चुकी है।
मप्र देश का बनेगा अग्रणी CBM उत्पादक
मध्यप्रदेश पहले से ही देश के कुल कोलबेड मीथेन उत्पादन का 40% हिस्सा देता है, जो वर्तमान में केवल सोहागपुर के ईस्ट और वेस्ट ब्लॉकों से ही आ रहा है। रिलायंस कंपनी द्वारा संचालित 300 से अधिक कुओं से रोजाना 234.37 MMSCM गैस निकाली जा रही है, जो यूपी के फूलपुर तक 302 किलोमीटर की पाइपलाइन से भेजी जाती है।
छतरपुर-दमोह से आत्मनिर्भरता की ओर
नई खोज से न केवल राज्य की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी होंगी, बल्कि अन्य राज्यों को भी गैस की आपूर्ति संभव हो सकेगी। खनिज विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि केंद्र से सभी जरूरी अनुमतियां मिल चुकी हैं, और खनन कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
दूसरे जिलों में भी खोज तेज
शहडोल, उमरिया, बैतूल, छिंदवाड़ा और नर्मदापुर में भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के खनन का काम जारी है। इसमें ONGC और एनवेनियर पेट्रोडाउन लिमिटेड जैसी कंपनियां 8,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही हैं।
क्या होती है कोलबेड मीथेन गैस?
CBM एक अपरंपरागत गैस है जो कोयले की चट्टानों में पाई जाती है। इसे निकालने के लिए चट्टानों में ड्रिल कर भूमिगत जल को हटाया जाता है। यह गैस बिजली उत्पादन, उर्वरक, रसोई गैस, और औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश के विंध्य, सतपुड़ा और नर्मदा घाटी क्षेत्रों में लाखों टन हाइड्रोकार्बन मौजूद हैं। 2017 की हाइड्रोकार्बन रिसोर्स असेसमेंट रिपोर्ट में इन क्षेत्रों को बेहद संभावनाशील बताया गया था।
छतरपुर और दमोह में कोलबेड मीथेन की खोज न सिर्फ राज्य के लिए ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि यह हजारों करोड़ के निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का भी जरिया बनेगी। मध्यप्रदेश अब देश की ऊर्जा राजधानी बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। ..(प्रकाश कुमार पांडेय)