मध्यप्रदेश में शहरी विकास और कारोबार को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार प्रदेश की लैंड यूज पॉलिसी में व्यापक बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत अब रेजिडेंशियल प्लॉट पर भी निर्धारित शर्तों के साथ व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। प्रस्तावित संशोधित नियमों के अनुसार, लोग अपने आवासीय भूखंडों पर छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय, गृह उद्योग, होटल, अस्पताल, क्लिनिक, कोचिंग सेंटर, रेस्तरां और अन्य गैर-प्रदूषणकारी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर सकेंगे।
हालांकि यह सुविधा पूरे प्रदेश में एक साथ लागू नहीं होगी। नई व्यवस्था मुख्य रूप से ग्रीनफील्ड क्षेत्रों यानी नई विकसित होने वाली कॉलोनियों और टाउनशिप में लागू की जाएगी। पहले से विकसित आवासीय कॉलोनियों में फिलहाल इस तरह की अनुमति नहीं दी जाएगी, ताकि वहां रहने वाले लोगों की सुविधा, यातायात व्यवस्था और शांति प्रभावित न हो।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टीएंडसीपी) ने संशोधित लैंड यूज नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। विभाग के अनुसार यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और मिक्स्ड लैंड यूज नीति के अनुरूप तैयार किया गया है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से छोटे उद्यमियों, स्टार्टअप संचालकों और स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक आवासीय भूखंड पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने के लिए लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई मामलों में अनुमति नहीं मिलने से लोग व्यवसाय शुरू ही नहीं कर पाते थे।
घर से कारोबार करना होगा आसान
नई नीति लागू होने के बाद नागरिक अपने घर से ही कई प्रकार के व्यवसाय संचालित कर सकेंगे। इनमें प्रमुख रूप से—
- गृह उद्योग
- बुटीक एवं सिलाई केंद्र
- कोचिंग संस्थान
- क्लिनिक
- डायग्नोस्टिक सेंटर
- छोटे होटल एवं गेस्ट हाउस
- रेस्तरां और कैफे
- गैर-प्रदूषणकारी उद्योग
- प्रोफेशनल ऑफिस
- सेवा आधारित स्टार्टअप
जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि प्रत्येक गतिविधि के लिए निर्धारित मानकों, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा और स्थानीय निकायों की शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
महिलाओं और दिव्यांगों को सबसे अधिक लाभ
नई नीति का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं, दिव्यांगजनों और ऐसे लोगों को मिलने की संभावना है जो घर से बाहर जाकर व्यवसाय नहीं कर पाते। अब वे अपने ही घर से छोटा उद्योग, प्रशिक्षण केंद्र, ऑनलाइन सेवा, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग या अन्य स्वरोजगार गतिविधियां शुरू कर सकेंगे।
विशेष रूप से गृहिणियां घरेलू खाद्य उत्पाद, बुटीक, ब्यूटी पार्लर, ट्यूशन, डे-केयर सेंटर और अन्य छोटे व्यवसाय आसानी से संचालित कर सकेंगी। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
स्टार्टअप और युवाओं को मिलेगा नया अवसर
राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगी। आज बड़ी संख्या में युवा डिजिटल सेवाएं, आईटी, डिजाइनिंग, ऑनलाइन शिक्षा, कंसल्टेंसी और अन्य सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। महंगे व्यावसायिक परिसर किराये पर लेने की बजाय वे अपने घर से ही कारोबार संचालित कर सकेंगे।
इससे शुरुआती निवेश कम होगा और नए उद्यम शुरू करना आसान बनेगा।
ग्रीनफील्ड क्षेत्रों में ही लागू होगी व्यवस्था
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था मुख्य रूप से ग्रीनफील्ड क्षेत्रों में लागू होगी। ग्रीनफील्ड क्षेत्र वे इलाके होते हैं जहां नई कॉलोनियां, नई टाउनशिप और नए शहरी विस्तार विकसित किए जा रहे हैं।
इन क्षेत्रों की योजना पहले से ही मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज) को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। सड़कें, पार्किंग, जल निकासी, यातायात और सार्वजनिक सुविधाएं भी उसी अनुसार विकसित की जाएंगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
पुरानी कॉलोनियों को मिलेगी राहत
पहले से विकसित आवासीय कॉलोनियों में इस व्यवस्था को लागू नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि पुराने रिहायशी क्षेत्रों में यदि बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी गई तो कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इनमें—
- यातायात का दबाव
- पार्किंग संकट
- ध्वनि प्रदूषण
- भीड़भाड़
- सुरक्षा संबंधी चुनौतियां
- आवासीय वातावरण पर असर
जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए वर्तमान में पुराने क्षेत्रों को इस नीति से बाहर रखा गया है।
विशेषज्ञों की राय
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई विकसित देशों में मिक्स्ड लैंड यूज मॉडल पहले से लागू है। इससे लोगों को कार्यस्थल और निवास के बीच लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि उचित नियोजन नहीं किया गया तो यातायात, पार्किंग और पर्यावरण संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
नगर नियोजन के लिए नई चुनौती
नई नीति लागू होने के बाद नगर एवं ग्राम निवेश विभाग तथा स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। प्रत्येक क्षेत्र में यह तय करना होगा कि कौन-कौन सी व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है और किन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा।
इसके अलावा पार्किंग, सड़क की चौड़ाई, अग्निशमन व्यवस्था, सीवरेज, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा।
छोटे उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन
प्रदेश सरकार लंबे समय से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। नई लैंड यूज नीति इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यदि लोग अपने घर से छोटे उद्योग शुरू कर पाएंगे तो—
- रोजगार बढ़ेगा।
- स्थानीय उत्पादन में वृद्धि होगी।
- महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
- स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।
- छोटे निवेशकों का खर्च कम होगा।
होटल, अस्पताल और सेवा क्षेत्र को भी फायदा
प्रस्तावित नीति के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप छोटे अस्पताल, क्लिनिक, होटल, गेस्ट हाउस और सेवा आधारित संस्थानों को भी अनुमति मिल सकती है। इससे नागरिकों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
हालांकि बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अलग नियम लागू रहेंगे।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। छोटे व्यापारी, सेवा प्रदाता और उद्यमी बिना अधिक निवेश के अपना कारोबार शुरू कर सकेंगे। इससे रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।
प्रशासनिक प्रक्रिया होगी सरल
नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अनुमति देना नहीं बल्कि अनुमोदन प्रक्रिया को भी सरल बनाना है। वर्तमान में कई विभागों से अनुमति लेने की जटिल प्रक्रिया के कारण छोटे व्यवसाय शुरू करने में काफी समय लग जाता है। संशोधित नीति लागू होने के बाद इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने की योजना है।
किन गतिविधियों पर रहेगी रोक
हालांकि सरकार सभी प्रकार के व्यवसायों को अनुमति देने के पक्ष में नहीं है। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, भारी मशीनों वाले कारखाने, अत्यधिक शोर पैदा करने वाली इकाइयां और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवसायों को आवासीय क्षेत्रों में अनुमति नहीं मिलेगी।
राज्य सरकार की मंशा
सरकार का उद्देश्य एक ऐसी शहरी विकास नीति तैयार करना है जिसमें आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले और नागरिकों को अपने घर से ही रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर उपलब्ध हो सकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि आवासीय क्षेत्रों का मूल स्वरूप और नागरिक सुविधाएं प्रभावित न हों।
मंजूरी के बाद होगा लागू
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा तैयार मसौदा अब राज्य सरकार के विचाराधीन है। मंजूरी मिलने के बाद संशोधित लैंड यूज नीति पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। ग्रीनफील्ड क्षेत्रों में इसकी शुरुआत पहले होगी, जबकि पुराने आवासीय क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था लागू रहेगी।
नई नीति को राज्य में शहरी विकास, निवेश, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि इसे प्रभावी नियोजन और कड़े मानकों के साथ लागू किया गया तो मध्यप्रदेश में घर से व्यवसाय शुरू करने का रास्ता आसान होगा, वहीं नागरिकों की सुविधाओं और शहरी संतुलन को भी बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।(प्रकाश कुमार पाण्डेय)