मार्क एस्पर की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा है कि ईरान के खिलाफ केवल हवाई हमलों के भरोसे युद्ध नहीं जीता जा सकता। उनका मानना है कि लगातार बमबारी करने से भी ईरान की रणनीति में बड़ा बदलाव नहीं आएगा। एस्पर ने अमेरिकी प्रशासन को सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी है।
दो विकल्प बताए—सैन्य हमला या आर्थिक दबाव
मार्क एस्पर ने कहा कि अमेरिका के सामने दो ही प्रभावी विकल्प हैं। पहला, पूर्ण सैन्य अभियान चलाना और दूसरा, ईरान पर इतना मजबूत आर्थिक दबाव बनाना कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए मजबूर हो जाए। उनके अनुसार केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें सख्ती से लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जरूरी है।
होर्मुज संकट से दुनिया पर असर
एस्पर ने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। संघर्ष बढ़ने के बाद तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। यदि स्थिति लंबी चली तो वैश्विक महंगाई और ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
अमेरिका की सैन्य तैयारी पर भी चिंता
पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा कि लगातार सैन्य अभियानों से अमेरिका के हथियारों का भंडार तेजी से घट रहा है और पेंटागन अरबों डॉलर खर्च कर चुका है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे अमेरिका की वैश्विक सैन्य तैयारियों पर असर पड़ सकता है। एस्पर ने विशेष रूप से चीन को अमेरिका की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताते हुए सैन्य संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया।
परमाणु समझौते पर भी दिया सुझाव
मार्क एस्पर का मानना है कि ईरान के साथ भविष्य में ऐसा परमाणु समझौता होना चाहिए जो पहले के समझौतों से अधिक प्रभावी और कठोर हो। उन्होंने कहा कि किसी भी रणनीति की सफलता तभी मानी जाएगी जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन बहाल हो तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उनके बयान ने अमेरिका की ईरान नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।