लालू प्रसाद यादव बिहार में कभी कानून का राज चाहते थे। यही वजह थी कि वो खुद पुलिस में भर्ती होना चाहते थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था इसलिए अब आर जे डी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव RJD Supremo Lalu Prasad Yadav पुलिस नहीं पोलिटिशियन है। किताब बंधु बिहारी –कहानी लालू प्रसाद यादव और नीतिश कुमार Nitish Kumar संकर्षण ठाकुर की इस किताब में लालू प्रसाद यादव के जीवन के उन किस्सों को बताया है जो आजतक जनता और उनकी पार्टी कार्यकर्ता भी अनजान हैं।
समाजवादी पार्टी से राजनीति में एंट्री की लालू ने
लालू प्रसाद यादव Lalu Prasad Yadav को समाजवादी पार्टी नेता नरेंद्र सिंह राजनीति में लेकर आए। नरेंद्र सिंह सोश्यलिस्ट नेता श्री कृष्ण सिंह के बेटे हैं। उन्होंने लालू यादव का हाथ पकड़कर राजनीति में एंट्री करवाई। नरेंद्र सिंह ने लालू यादव को सोशलिस्ट पार्टी की छात्रा शाखा में नियुक्त किया। उस समय लालू यादव पटना विश्वविद्यालट के नेशलन क़ॉलेज में पढा करते थे।
लालू के अंदाज देखकर उनको लिय़ा छात्र राजनीति में
लालू प्रसाद यादव में कुछ ऐसे गुर थे जिसके चलते उनको समाजवादी पार्टी ने छात्र राजनीति मे जगह दी थी। दरअसल लालू प्रसाद यादव का जो अंदाज था वो सबसे जुदा था। फिर चाहे वो लोगों की भीड़ जुटाने का अंदाज हो लोगो को हंसाने का या फिर जनता को अपनी बात समझाने का। सभी में लालू प्रसाद याद को महारत हासिल थी। इसी तरह एक सभा के लिए नरेंद्र सिंह ने लालू का नाम तय करा। माना जा रहा था कि लालू प्रसाद यादव बेहतर तरीके से सम्हाल लेंगे लेकिन लाख इंतजार करने के बाद भी लालू प्रसाद यादव देर तक सभा में नहीं पंहुचे । जब पहुंचे थी तो एकदम बेहाल थके हारे अंदाज में । जब इस बात खुलासा हुआ कि लालू प्रसाद यादव सभा छोड़कर पुलिस भर्ती की परीक्षा देने गए।
हांलाकि दौड में पीछे छूटने बाद वो पुलिस में नहीं जा सके। वही राजनीति उनके इंतजार में बैठी थी। इसी के बाद से लालू प्रसाद यादव धीरे धीरे राजनीति में बढ़ने लगे और मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया। न केवल लालू प्रसाद यादव नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार अब राजनीति में है।
इसी अंदाज में लालू सभी को किसी भी काम के लिए राजी कर पाते थे।





